आ रही है Swami Ramdev की आत्‍मकथा: माई लाइफ, माई मिशन

पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा योग गुरु Swami Ramdev की शीघ्र प्रकाशित होने वाली अपनी आत्मकथा में अपने जीवन के उतार चढ़ाव और सफलताओं के बारे में बताएंगे। Swami Ramdev की आत्मकथा पुस्तक ‘माई लाइफ, माई मिशन’ का सहलेखन वरिष्ठ पत्रकार उदय माहुरकर ने किया है।

सैकड़ों अरब के सम्पत्तिशाली बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के पांव अब भले ही विश्व बाजार में लड़खड़ा रहे हों, उनकी सद्यःप्रकाशनाधीन पुस्तक ‘माई लाइफ, माई मिशन’ शीघ्र ही पेंगुइन से छपकर बाजार में आ रही है। अभी से इतनी चर्चाएं हैं तो जाहिर है, पतंजलि के खजाने की तरह किताब से पेंगुइन का कोष भी भर जाएगा ही।

इस किताब में रामदेव से जुड़े प्रमुख विवाद, महत्वपूर्ण घटनाक्रम और उपलब्धियों को रेखांकित किया गया है। प्रकाशक ‘पेंगुइन रैंडम हाउस’ ने एक बयान में कहा, योग गुरु का ‘अपनी तरह का एक व्यक्तिगत आख्यान’ अगस्त में बाजार में आने की उम्मीद है।

रामदेव ने इस बारे में घोषणा ट्विटर पर की. उन्होंने ट्वीट किया,‘अन्य व्यक्तियों द्वारा मेरे बारे में काफी कुछ लिखा गया है। अब मैं अपने जीवन की कहानी आपके साथ अपने शब्दों में साझा करूंगा। आज ही प्री..आर्डर करना नहीं भूलें।’

उन्होंने इस पुस्तक में हरियाणा के एक छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक की अपनी यात्रा लिपिबद्ध की है। उन्होंने इसमें योग और अच्छे स्वास्थ्य को लेकर अपने उत्साह, अपने मित्रों एवं शत्रुओं के बारे में लिखा है। उन्होंने इसके साथ ही इसमें स्वयं द्वारा शुरू किये स्वदेशी अभियान के बारे में भी लिखा है।

किताब में हरियाणा के एक छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की बाबा की जीवन यात्रा, स्वदेशी अभियान, पतंजलि ग्रुप का बाजारोन्मुखी उत्थान तो लिपिबद्ध है ही, बाबा ने अपने मित्रों और शत्रुओं की भी इस किताब में खबर ली है। प्रकाशक ‘पेंगुइन रैंडम हाउस’ का कहना है कि योग गुरु का यह ‘अपनी तरह का एक व्यक्तिगत आख्यान’ अगस्त तक बाजार में आ जाएगा। आधुनिक बाबा भी इस सम्बंध में ट्विटर पर लिख चुके हैं- ‘अन्य व्यक्तियों द्वारा मेरे बारे में काफी कुछ लिखा गया है। अब मैं अपने जीवन की कहानी आपके साथ अपने शब्दों में साझा करूंगा। आज ही प्री-ऑर्डर करना नहीं भूलें।’

किताब में पतांजलि समूह की यात्रा का भी जिक्र
रामदेव ने इसके साथ ही इसमें पतांजलि समूह की यात्रा को भी रेखांकित किया है जिसका कारोबार करीब 12000 करोड़ रुपये का है।

सह लेखक माहुरकर ने कहा कि स्वामी रामदेव के साथ इस पुस्तक का सहलेखन करना जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव है। उन्होंने लोगों के जीवन पर जितना प्रभाव डाला है उतना स्वतंत्र भारत में कुछ ही लोगों ने डाला है।
-एजेंसी

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