कर्नाटक कांग्रेस के कम से कम 5 और विधायक दे सकते हैं इस्‍तीफा

बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस के कम से कम 5 और विधायक विधानसभा से इस्तीफा दे सकते हैं। ये सभी विधायक बीजेपी के पाले में जा सकते हैं।
कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को मंगलवार को तब झटका लगा जब 2 निर्दलीय विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इससे सरकार को फिलहाल कोई खतरा नहीं है क्योंकि अभी भी उसे 224 सदस्यीय विधानसभा में 117 विधायकों का समर्थन हासिल है।
बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने विधायकों को विरोधी खेमा में जाने से रोकने के लिए जद्दोजहद कर रही हैं। बीजेपी के विधायक जहां हरियाणा के गुरुग्राम में ठहरे हुए हैं, वहीं कांग्रेस अपने विधायकों को मुंबई के एक होटल में रखी हुई है। इस तरह कर्नाटक का सियासी नाटक दिलचस्प होता जा रहा है। बीजेपी भले ही कुमारस्वामी सरकार को गिराने की कोशिशों से इंकार कर रही है, लेकिन ऐसी अटकलें हैं कि वह कांग्रेस और जेडीएस के कुछ विधायकों को अपने पाले में करके विधानसभा से इस्तीफा दिलाने की कोशिश में है ताकि सूबे में उसकी सरकार बन सके। कर्नाटक के मौजूदा सियासी गणित को समझने के लिए सबसे पहले जरूरी है यह समझना कि सूबे की विधानसभा की मौजूदा सूरत क्या है।
कर्नाटक विधानसभा में दलगत स्थिति
विधानसभा में कुल सदस्य- 224
बहुमत के लिए 113 विधायकों का समर्थन जरूरी
कांग्रेस-जेडीएस को मिलाकर 117 विधायक
किसके कितने विधायक
बीजेपी- 104
कांग्रेस- 80
जेडीएस- 37
बीएसपी- 1
निर्दलीय- 2 (सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर चुके हैं)
विधायकों के इस्तीफे से क्या होगा?
दलबदल विरोधी कानून की वजह से किसी पार्टी के विधायकों/सांसदों का पाला बदलना पहले के मुकाबले बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो गया है। इसके लिए पार्टी के कुल विधायकों/सांसदों के कम से कम 2 तिहाई विधायक/सांसद जरूरी हैं। ऐसे में न बीजेपी द्वारा कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल कराना संभव दिखता है और न ही कांग्रेस द्वारा बीजेपी के विधायकों को तोड़ना मुमकिन दिख रहा है।
यही वजह है कि कर्नाटक में बीजेपी दूसरे दलों के कुछ विधायकों को अपने पाले में खींचकर विधानसभा से उनका इस्तीफा दिलवाना चाहती है। विधायकों के इस्तीफे के साथ विधानसभा की कुल स्ट्रेंथ भी कम होगी और उसी के हिसाब से बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा भी कम होगा। 2 निर्दलीय विधायकों समर्थन वापसी के बाद अगर बीजेपी विरोधियों के 14 विधायकों का इस्तीफा करा लेती हैं तो विधानसभा की कुल संख्या 207 हो जाएगी और इस तरह 104 सदस्यों वाली बीजेपी का बहुमत हो जाएगा। बीजेपी इसी प्लान पर काम करती दिख रही है।
स्पीकर की भूमिका होगी अहम
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के कम से कम 5 विधायक आने वाले दिनों में विधानसभा से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति में स्पीकर की भूमिका काफी अहम होगी। स्पीकर कांग्रेस के हैं। स्पीकर विधायकों के इस्तीफे पर अपने फैसले को यह देखने के लिए सुरक्षित रख सकते हैं कि इस्तीफे किसी दबाव या लालच में तो नहीं दिए गए हैं। चूंकि, ऐसी कोई समयसीमा तय नहीं है कि स्पीकर विधायकों का इस्तीफा कितने वक्त में स्वीकार करेंगे, लिहाजा पूरा मामला अनिश्चित काल के लिए लटक सकता है।
कांग्रेस की रणनीति
बीजेपी की कोशिशों को नाकाम करने के लिए कांग्रेस पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। पार्टी ने अपने विधायकों को मुंबई के एक होटल में पहुंचा दिया है। इसके पीछे पार्टी की रणनीति विधायकों को एकजुट बनाए रखना और बीजेपी या अन्य की पहुंच से दूर करना है। अगर कुछ विधायक इस्तीफा देते भी हैं तो स्पीकर उन्हें स्वीकार करने के बजाय लंबे वक्त तक लटका सकते हैं। इस तरह संकट की स्थिति में कांग्रेस को उससे निपटने के लिए समय मिल जाएगा। कांग्रेस पलटवार की भी तैयारी में है। वह भी बीजेपी के कुछ विधायकों को अपने पाले में करने और इस्तीफा दिलाने की कोशिश करेगी।
-एजेंसियां

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