मुल्‍ला नसरुद्दीन का ज्‍योतिष ज्ञान

ज्‍योतिष विद्या पूर्ण है किंतु ज्‍योतिषी अपूर्ण हो सकते हैं। तथाकथित भविष्‍यवक्‍ताओं का जाल इंसान को किस तरह उलझा देता है, इसका अहसास उसे ही हो सकता है जो उनके चंगुल में फंस कर रह जाता है।
आधा ज्ञान प्राप्‍त ज्‍योतिषी कई बार तो खुद अपने ही जाल में फंस जाते हैं।
मुल्‍ला नसरुद्दीन को फांसी पर लटकाए जाने से ठीक पहले उसका एक मित्र उससे मुलाकात करने जेल गया।
उस मित्र ने मुल्‍ला से कहा- जहां तक मैं जानता हूं, तुम्‍हें ज्‍योतिष शास्‍त्र की अच्‍छी जानकारी थी और ज्‍योतिष के क्षेत्र में तुम्‍हारी गिनती पहुंचे हुए नजूमियों के तौर पर होती थी।
फिर ऐसा कैसे हो गया कि तुम्‍हें फांसी की सजा बोली गई और तुम्‍हें पहले से कुछ पता नहीं लगा।
मुल्‍ला ने अपने मित्र को बताया- नि:संदेह मुझे ज्‍योतिष की अच्‍छी जानकारी थी। मैंने नजूमी होने के नाते अपनी कुंडली का अध्‍ययन भी किया था। ग्रहों के मुताबिक मुझे मृत्‍यु से पूर्व कोई उच्‍च स्‍थान प्राप्‍त होना था।
अब तुम ही बताओ कि फांसी के तख्‍ते से ऊंचा कोई स्‍थान हो सकता है क्‍या, जो सीधे ऊपर पहुंचा देता है।