नागरिकता संशोधन विधेयक के लिए असम के मंत्री ने पीएम का आभार जताया

गुवाहाटी। असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में मचे घमासान के बीच लोकसभा में विवादित नागरिकता संशोधन विधेयक पास हो गया है। असम के मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा ने भी इस बिल का समर्थन किया।
उन्होंने कहा, ‘बिल के लिए हम पीएम मोदी का आभार व्यक्त करते हैं जिहोंने असम की 18 विधानसभा सीटें ‘जिन्ना’ या एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल के हाथों में जाने से बचा ली हैं।’
उन्होंने कहा, ‘हमें धर्म के आधार पर ऐसा करना पड़ा ताकि गैरकानूनी घुसपैठ को रोका जा सके। यह अच्छी तरह मालूम है कि हमारी जमीन पर मुस्लिम शरणार्थियों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस चाहती है कि जमीन अधिकार मुस्लिमों को दे दिया जाए लेकिन यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है।’
‘एजीपी ने की ऐतिहासिक भूल’
उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक का समर्थन नहीं कर एजीपी ने ‘ऐतिहासिक भूल’ की है और असमवासियों को धोखा दिया है। एक दिन पहले ही हिमंत के जिन्ना की विरासत वाले बयान से विवाद भड़क गया था लेकिन बीजेपी के वरिष्ठ नेता ‘जिन्ना की विरासत’ वाले अपने बयान पर मंगलवार को भी कायम रहे और उन्होंने कहा कि जो उनका विरोध कर रहे हैं वे असम और भारत विभाजन के दौरान इसके राज्य के तौर पर गठन के इतिहास को नहीं जानते हैं।
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हेमंत शर्मा ने कहा, ‘मुझे पूरा यकीन है कि अगर यह विधेयक पारित नहीं हुआ तो असमी हिंदू महज पांच साल में ही अल्पसंख्यक हो जाएंगे। यह उन तत्वों के लिए फायदेमंद होगा जो चाहते हैं कि असम दूसरा कश्मीर बन जाए।’ राज्य के वित्त मंत्री ने कहा कि जो भी असम के इतिहास से अवगत हैं वे जानते हैं कि मुस्लिम लीग चाहती थी कि असम पाकिस्तान का हिस्सा बने। लेकिन राज्य के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बारदोलोई और तत्कालीन कांग्रेस नेताओं ने उसकी इस कोशिश को नाकाम कर दिया।
‘राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है’
उन्होंने कहा, ‘यह सिर्फ मुस्लिम लीग की बात नहीं थी जो अपनी योजना में असम को शामिल करना चाहती थी, बल्कि उस वक्त यही मांग राज्य के अंदर से भी उठ रही थी। ये तत्व अब भी मौजूद हैं।’
शर्मा ने कहा, ‘अगर मैं ऐसा कहता हूं तो मैं इसे ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में कहता हूं और असम में जो कुछ भी हुआ उसके आधार पर कहता हूं। इसलिए इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।’
असम के वरिष्ठ मंत्री ने रविवार रात को कहा था कि अगर राज्य में नागरिकता विधेयक पारित नहीं किया जाता है, तो असम ‘जिन्ना’ के रास्ते पर पड़ेगा। उन्होंने कहा था कि लोग प्रतिक्रिया में आकर इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि बौद्धिक लोग गलत अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। शर्मा ने कहा था, ‘इस विधेयक के बगैर हमलोग जिन्ना के विचार को ही पोषित करेंगे। अगर ऐसे लोग वहां नहीं हों तो सारभोग सीट जिन्ना के विचार के पक्ष में चली जाएगी। क्या हम ऐसा चाहेंगे? यह जिन्ना की विरासत और भारत की विरासत के बीच की लड़ाई है।’
बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे लोगों को भारत में छह वर्ष निवास करने के बाद ही नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। ऐसे लोगों के पास कोई उचित दस्तावेज नहीं होने पर भी उन्हें नागरिकता दी जा सकेगी। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग अल्पसंख्यक हैं। राज्य में कई संगठन विधेयक का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि इसे सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचेगा।
-एजेंसियां

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