Asia Cup: बांग्लादेश को हराकर भारत सातवीं बार बना चैंपियन

भारत ने शुक्रवार को दुबई में खेले गए Asia Cup के रोमांचक फ़ाइनल मुक़ाबले में बांग्लादेश को तीन विकेट से हरा दिया.
भारत ने बांग्लादेश की ओर से जीत के लिए मिला 223 रन का लक्ष्य आखिरी ओवर की आखिरी गेंद पर सात विकेट गंवाकर हासिल किया. वनडे क्रिकेट में सिर्फ़ दूसरा मौका है जब किसी टूर्नामेंट का ख़िताबी फ़ैसला आखिरी गेंद पर हुआ.
भारतीय टीम ने रिकॉर्ड सातवीं बार Asia Cup जीता है. इससे पहले वह 1984, 1988, 1990, 1995, 2010 और 2016 में भी चैंपियन रह चुकी है.
फ़ाइनल में शतक बनाने वाले बांग्लादेश के लिटन दास को मैन ऑफ द मैच चुना गया. भारत के लिए पांच मैचों में 342 रन बनाने वाले शिखर धवन मैन ऑफ द सीरीज़ चुने गए.
भारत ने पांच साल बाद कोई वनडे टूर्नामेंट अपने नाम किया है. इससे पहले 11 जुलाई, 2013 को पोर्ट ऑफ़ स्पेन में कैरिबियन ट्राइ-सीरीज़ (सेल्कन मोबाइल कप) में भारत ने श्रीलंका को दो गेंदें बाक़ी रहते हुए 1 विकेट से हराया था.
फ़ाइनल में भारतीय टीम फेवरिट मानी जा रही थी. भारत ने जीत भी हासिल की लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ों को बांग्लादेश से पार पाने के लिए ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी.
बांग्लादेश के गेंदबाजों ने भारत के स्टार बल्लेबाज़ों का छोटे लक्ष्य पहुंचने के लिए कड़ा इम्तिहान लिया.
सुपर-4 के आख़िरी मैच में अफ़ग़ानिस्तान से टाई खेलने वाली भारतीय टीम बांग्लादेश के ख़िलाफ भी चैंपियन वाला दबदबा नहीं दिखा सकी.
आखिरी ओवर का रोमांच
भारत को आखिरी ओवर में जीत के लिए छह रन बनाने थे और उसके तीन विकेट बाकी थे. बांग्लादेश ने आख़िरी ओवर के लिए महमुदुल्लाह पर भरोसा दिखाया.
क्रीज़ पर कुलदीप यादव और चोटिल केदार जाधव थे. कुलदीप ने इस ओवर के पहले मैच में सिर्फ़ एक गेंद खेली थी.
कुलदीप ने पहली गेंद पर एक रन बनाया. दूसरी गेंद पर चोटिल जाधव ने एक रन लिया. तीसरी गेंद पर कुलदीप ने दो रन ले लिए.
अब तीन गेंदों पर भारत को दो रन बनाने थे. चौथी गेंद पर कोई रन नहीं बना. भारत को आखिरी दो गेंदों पर दो रन बनाने थे. पांचवीं गेंद पर भारत को एक रन मिला.
आखिरी गेंद पर एक रन की दरकार थी और जाधव स्ट्राइक पर थे. आखिरी गेंद पर जाधव के पैर से टकराकर शॉर्ट फाइन लेग की तरफ गई. भारत को लेग बाई के जरिए एक रन मिला और जीत उसके खाते में दर्ज़ हो गई.
जाधव 23 रन बनाकर नाबाद लौटे. कुलदीप यादव ने नाबाद पांच रन का योगदान दिया.
भारतीय टीम ने फ़ाइनल तक का सफ़र बिना कोई मैच गंवाए तय किया था लेकिन फ़ाइनल मुक़ाबले में छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए कई मौके ऐसे आए जब भारतीय टीम लड़खड़ाती दिखी.
भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. पूरे टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में रहे ओपनर शिखर धवन सिर्फ़ 15 रन ही बना सके. अंबाती रायडू (2 रन) भी बड़ी पारी नहीं खेल सके.
फीके पड़े सितारे
कप्तान रोहित शर्मा अच्छी लय में दिख रहे थे लेकिन वो अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके. रोहित 55 गेंदों में 48 रन बनाकर आउट हुए. भारत ने तीसरा विकेट गंवाया तो स्कोर बोर्ड पर 83 रन ही दर्ज़ हुए थे.
महेंद्र सिंह धोनी और दिनेश कार्तिक ने चौथे विकेट के लिए 54 रन जोड़े. जब ये जोड़ी लय में दिख रही थी तभी कार्तिक महमुदुल्लाह की गेंद पर आउट हो गए. उन्होंने 37 रन बनाए.
इसके बाद धोनी भी ज़्यादा नहीं टिके. वो 36 रन बनाकर मुस्तफिज़ुर रहमान का शिकार बने.
जडेजा-भुवनेश्वर की साझेदारी
भारत की मुश्किल उस वक्त बढ़ गई जब केदार जाधव को चोटिल होने की वजह से मैदान के बाहर जाना पड़ा. उनके दाएं पैर की हैमस्ट्रिंग में खिंचाव आ गया.
रिटायर्ड हर्ट होने के पहले जाधव 20 गेंदों में 19 रन बना चुके थे. जिस वक्त जाधव मैदान के बाहर गए, तब भारतीय टीम जीत से 56 रन दूर थी.
इसके बाद रविंद्र जडेजा और भुवनेश्वर कुमार ने मोर्चा संभाला. इन दोनों ने 45 रन जोड़े. रविंद्र जडेजा 23 रन बनाकर आउट हुए. जडेजा के आउट होने के बाद जाधव दोबारा मैदान में आए. भुवनेश्वर कुमार 21 रन बनाकर आउट हुए.
दास ने दिखाया दम
इसके पहले बांग्लादेश ने लिटन दास की शतकीय पारी (121 रन) के दम पर 222 रन बनाए. टॉस गंवाने के बाद बल्लेबाज़ी के लिए उतरी बांग्लादेश की पूरी टीम 48.3 ओवरों में आउट हो गई.
बांग्लादेश के लिए सौम्य सरकार ने 33 और मेहदी हसन मिर्ज़ा ने 32 रन बनाए. बाकी बल्लेबाज़ बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे.
भारत के लिए कुलदीप यादव ने तीन और केदार जाधव ने दो विकेट लिए. जसप्रीत बुमराह और युजवेंद्र चहल को एक-एक विकेट मिले.
-BBC

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