इमरान के सामने अशरफ गनी ने कहा: पाकिस्तान ने आतंकी समूहों से संबंध नहीं तोड़े हैं, पिछले महीने ही 10 हजार जिहादी अफगानिस्‍तान भेजे

मध्य और दक्षिण एशिया संपर्क सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से महज़ कुछ फ़ीट की दूरी पर ही बैठे हुए थे.
शुक्रवार को हुए इसी सम्मेलन में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान ने चरमपंथी समूहों से अपने संबंध नहीं तोड़े हैं.
खुफ़िया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने अपने संबोधन में कठोर शब्दों में कहा कि पिछले महीने 10,000 से अधिक ‘जिहादी’ लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान आए हैं जबकि पाकिस्तान सरकार तालिबान को शांति वार्ता में “गंभीरता से” भाग लेने के लिए मनाने में असफल रही है.
इस सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में क्षेत्रीय संपर्क के लिए चुनौतियों और ख़तरों पर बोलते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और उनके जनरलों ने बार-बार आश्वासन दिया कि वे नहीं समझते हैं की अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का अधिग्रहण पाकिस्तान के हित में है.
उन्होंने बार-बार कहा कि वे तालिबान को गंभीरता से बातचीत करने के लिए मनाने के लिए अपनी ताक़त और प्रभाव का इस्तेमाल करेंगे लेकिन तालिबान का समर्थन करने वाले नेटवर्क और संगठन खुलेआम अफ़ग़ान लोगों और राज्य की संपत्ति और क्षमताओं के विनाश का जश्न मना रहे हैं.
अशरफ़ ग़नी के इस बयान के कुछ मिनट बाद अपने ऊपर लगे इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान ने कहा कि इन आरोपों से वह “निराश” हुए. उन्होंने कहा कि उन्हें यह सुनकर निराशा हुई कि संघर्ष में पाकिस्तान की “नकारात्मक भूमिका” थी.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए कहा, “राष्ट्रपति ग़नी, अफ़ग़ानिस्तान में मची उथल-पुथल से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाला देश पाकिस्तान ही है. पिछले 15 सालों में पाकिस्तान में 70 हज़ार लोगों की जान गई है. अगर कोई अंतिम चीज़ है तो वो है कि पाकिस्तान अब और संघर्ष नहीं चाहता है.”
इमरान ख़ान ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति को जवाब देते हुए कहा, “मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि पाकिस्तान की तुलना में किसी भी देश ने तालिबान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए इस क़दर प्रयास नहीं किया होगा.”
”हमने सैन्य कार्यवाही करने के अलावा हर तरह की कार्यवाही की है और तालिबान को वार्ता की मेज पर लाने और वहां शांतिपूर्ण समझौता करने के लिए हर संभव प्रयास किया है. अफ़ग़ानिस्तान में जो कुछ हो रहा है उसके लिए पाकिस्तान को दोष देना न्यायसंगत नहीं है.”
अमरुल्ला सालेह का आरोप
अशरफ़ ग़नी और इमरान ख़ान के बीच अफ़ग़ानिस्तान के प्रथम उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह के आरोपों पर भी तनातनी है.
इससे एक दिन पहले ही अफ़ग़ानिस्तान के प्रथम उपराष्ट्रपति ने पाकिस्तान पर तालिबान को संरक्षण देने का आरोप लगाया था.
उन्होंने एक ट्वीट करके आरोप लगाया था कि पाकिस्तान वायु सेना ने अफ़ग़ान सेना और वायु सेना को आधिकारिक रूप से चेतावनी दी है कि अगर किसी ने भी स्पिन बोल्डक क्षेत्र से तालिबान को हटाने की कोशिश की तो पाकिस्तान वायु सेना उसका जवाब देगी.
हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से इस आरोप को ख़ारिज किया गया था. अपने बयान में पाकिस्तान ने कहा कि वह अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता को स्वीकार करता है.
इमरान ख़ान ने अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा के अतिरिक्त, भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर जैसे “व्यापक विवाद” को क्षेत्रीय संपर्क के लिए दूसरी सबसे बड़ी चुनौती बताया.
बाद में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता की सबसे बड़ी रुकावट बताया.
इमरान ख़ान की इस प्रतिक्रिया के बावजूद शुक्रवार को हुए इस सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के बीच बयानों का आदान-प्रदान उतना नहीं हुआ जितनी तीखी बयानबायी अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच देखने को मिली.
भारत के विदेश मंत्री ने भी उठाए ज़रूरी मुद्दे
मध्य और दक्षिण एशिया संपर्क सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हुए थे. अपने संबोधन में उन्होंने भी पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए व्यापार की समस्याओं का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास और समृद्धि, शांति और सुरक्षा के साथ ही संभव है. इस सम्मेलन के पूर्ण सत्र में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सीधे तौर पर पाकिस्तान का उल्लेख नहीं किया.
हाँ, लेकिन चीन के संदर्भ में उन्होंने वन-वे व्यापार की समस्याओं पर ज़रूर बल दिया. सम्मेलन के इस सत्र में रूस और चीन के विदेश मंत्री भी मौजूद थे. साथ ही अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और ईरान समेत लगभग 40 देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बाघा बॉर्डर से होते हुए स्थल-मार्ग से अफ़ग़ानिस्तान को भारत में व्यापार की अनुमति देने से पाकिस्तान के इनकार करने के संदर्भ में कहा कि सैद्धांतिक रूप से ऐसा करने से किसी को कोई लाभ नहीं है. कोई भी प्रभावी संपर्क कभी भी एकतरफ़ा नहीं हो सकता है.
चाबहार बंदरगाह
एस जयशंकर ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के लिए भारत के प्रयासों का भी उल्लेख इस सम्मेलन में किया. जिसे भारत अब समुद्र तक एक “सुरक्षित, व्यवहारिक और बाधामुक्त” विकल्प के तौर पर बढ़ावा दे रहा है.
उज़्बेकिस्तान और भारत ने सम्मेलन के दौरान चाबहार पर काम करने के लिए भारत-उज़्बेकिस्तान-ईरान-अफ़ग़ानिस्तान के क्वाड्रिलेट्रल समूह के गठन की घोषणा की.
हालांकि, उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने घोषणा की कि टर्मेज़-मज़ार-ए-शरीफ़-पेशावर रेलमार्ग कनेक्टिविटी एक प्रमुख तत्व होगा, जिसे भारत तब तक नहीं खोलेगा जब तक कि पाकिस्तान व्यापार के लिए भूमि मार्ग को फिर से नहीं खोल देता.
चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का पर एस जयशंकर ने कहा कि कनेक्टिविटी का निर्माण अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप होना चाहिए.
उन्होंने कहा, “संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के सबसे बुनियादी सिद्धांत हैं.”
-BBC

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