लड़के हों तो “टीपू” और “पप्‍पू” जैसे, वरना ना हों

लड़के हों तो “टीपू” और “पप्‍पू” जैसे वरना ना हों। पता नहीं कितनी “प्रतिभा” कूट-कूट कर भरी है ऊपर वाले ने कि थाह ही नहीं मिल रही।
आम जनता की बात तो छोड़ो, इन दोनों प्रतिभाओं के मूल स्‍त्रोतों तक को पता नहीं लग पा रहा है कि आखिर वो इतनी काबिलियत लाये कहां से।
सुना है कि एक ऑस्‍ट्रेलिया पढ़ने गया था और दूसरा अमरीका की हावर्ड यूनिवर्सिटी से तालीम हासिल करके पुश्‍तैनी गद्दी संभाल रहा है। फिलहाल दोनों राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष हैं।
पिछले दिनों ऑस्‍टेलिया रिटर्न के अब्‍बूजान को जरूर कुछ ऐसा फुसफुसाते पाया गया था कि लड़कों से छोटी-मोटी गलतियां हो जाती हैं। लोग अभी उनकी बातों का अर्थ निकालने में लगे ही थे कि पता लगा लड़के ने उन्‍हें ही निकाल दिया है।
उधर हावर्ड रिटर्न की अम्‍मीजान इस फिक्र में दुबली हुई जा रही हैं कि न पार्टी का पता न पोते का। पप्‍पू का ऊंट किस करवट बैठेगा, इसकी ठोस जानकारी कहीं से नहीं मिल पा रही।
सरकार का स्‍वच्‍छता अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है वैसे-वैसे शक के बादल गहरे होते जा रहे हैं।
रही-सही कसर उस मुई रेहम खान ने अपनी किताब में यह खुलासा करके पूरी कर दी कि इमरान खान तो ‘तालीपीटा’ हैं और उनके अपनी पार्टी में ही कई नेताओं से गहरे ताल्‍लुकात हैं।
पड़ोसी मुल्‍क का मामला है। ज्‍यादा दूर की बात है नहीं। क्‍या पता कोई छूत का रोग इधर भी लगा हो। आधी सदी देखकर भी अगर कोई पप्‍पू बना रहे तो शक होना स्‍वाभाविक है।
आज एक खबर और पढ़ी तो टीपू की काबिलियत आंखों के सामने नाचने लगी।
दरअसल, उत्तर कोरिया के राजकुमार किम जोंग-उन जब अमेरिका के राष्‍ट्रपति ट्रंप से मिलने सिंगापुर पहुंचे तो अपने साथ विमान में तमाम दूसरी चीजों सहित एक पोर्टेबल टॉइलेट भी लेकर गए थे। बताया गया कि उत्तर कोरियाई नेता के पास एक निजी टॉइलेट है जो उनके साथ-साथ चलता है। वह किसी अन्‍य के टॉइलेट का इस्‍तेमाल नहीं करते।
अब इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और नाम दें कि आज ही टीपू भी अपनी प्रेस कांफ्रेंस में नल की एक टोंटी लेकर पहुंचे। अवसर था सरकारी बंगले के उस विवाद का जो उनके द्वारा खाली करने पर बर्बाद कर दिया गया।
बहरहाल, अभी इस रहस्‍य से पर्दा उठना बाकी है कि टॉइलेट और टोंटी का आपस में क्‍या कनेक्‍शन है और दूर देश के दो प्रतिभावान राजकुमारों की सोच में इतनी समानता कैसे है।
परसों की ही तो बात है जब पप्‍पू ने मैकडोनल्‍ड और कोका कोला के मालिकों को उनकी औकात बताई थी। बताया था कि तुम होओगे रईस अपने घर के। मुझे पता है कि कोका कोला वाला कल तक शिकंजी बेचता था और मैकडोनल्‍ड वाला रोड साइड ढाबा चलाता था। अभी वो टि्वटर पर ट्रोल हो ही रहे थे कि टीपू जा पहुंचे आज अपनी टोंटी लेकर। उन्‍होंने मीडिया को बता दिया कि जिन टोटियों को योगी सरकार अपनी बता रही है, वह तो हमाए सैफई वाले कारखाने में बनी है और वहीं से ले जाकर हमने सरकारी बंगले में लगवाई थी। हमाई टोंटी थी, हम ले गए। देख लो, इस पर मेड इन सैफई की मुहर भी लगी है।
योगी जी को समझना चाहिए कि किम जोंग-उन यदि निजी इस्‍तेमाल के लिए उत्तर कोरिया से सिंगापुर अपने पोर्टेबल टॉइलेट को साथ ले जा सकता है तो टीपू क्‍या एक टोंटी नहीं ले जा सकता। योगी बाबा के साथ यही प्रॉब्‍लम है कि दूसरे की प्रॉब्‍लम समझने को तैयार नहीं है। किसी का निजी टॉइलेट के बिना काम नहीं चलता तो किसी का निजी टोंटी के बिना।
मुझे तो लगता है कि बुद्धि के मामले में टीपू और पप्‍पू कम्‍पटीशन करते रहते हैं। देश को टास्‍क देते रहते हैं कि बताओ हम दोनों में बड़ा ”कालिदास” कौन।
कालिदास से याद आया कि टीपू और पप्‍पू मिलकर अब संयुक्‍त रूप से 2019 के लिए नया आविष्‍कार करने जा रहे हैं। ये आविष्‍कार होगा, मूली के परांठों से परमाणु विस्‍फोट करने का।
तय जानिए कि इसके बाद किम जोंग-उन भारत आकर टीपू और पप्‍पू की चिलम भरेगा और उत्तर कोरिया के लिए खालिस ईको फ्रेंडली परमाणु बम ईजाद करके अमेरिका को मिसाइल सप्‍लाई करेगा।
मिसाइल पर मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा होगा- मेड BY टीपू एंड पप्‍पू। मुझे अब एक बाबा के हर्बल प्रोडक्‍ट की चिंता होने लगी है। कहीं पप्‍पू की नजर उनके ब्रांड्स पर न टिक जाए। सुना है कि बाबा भी तो कभी हरियाणे में भजिया तला करता था।
-लीजेंड न्‍यूज़

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