लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को भी अपनी डिजिटल संप्रभुता के संरक्षण का उतना ही हक, जितना अमेरिका को: कानून मंत्री

नई दिल्‍ली। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर द्वारा भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून का पालन नहीं करने पर उसका इंटरमीडियरी दर्जा खत्म करने को लेकर कानून, इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बृहस्पतिवार को खरी-खरी बातें कहीं।
प्रसाद ने कहा कि यदि कैपिटल हिल अमेरिका के लिए गौरव की बात है तो लाल किला भारत के लिए, जहां प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं। ट्विटर ने लद्दाख को चीन का हिस्सा बताया और हमें उसे इसे हटाने के लिए तीन माह तक जद्दोजहद करना पड़ी, यह ठीक नहीं है। लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को भी अपनी डिजिटल संप्रभुता का संरक्षण करने का उतना ही हक है।

आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि हमने ट्विटर को तीन माह का वक्त दिया। दूसरी कंपनियों ने नियम का पालन किया, लेकिन ट्विटर ने नहीं किया। आईटी गाइडलाइंस का नियम 7 कहता है कि यदि आप नियमों का पालन नहीं करते हैं तो सेक्शन 79 के तहत आप इंटरमीडियरी दर्जा खो सकते हैं। इसके बाद बाद आप देश के दंडात्मक कानूनों समेत अन्य कानूनों के पालन के लिए जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि ट्विटर का इंटरमीडियरी दर्जा खत्म करने का मैंने नहीं कहा है, कानून ने किया है। यदि दूसरों ने नियम का पालन किया तो इन्होंने क्यों नहीं? हमने उन्हें तीन अधिकारी नियुक्त करने को कहा। तीन माह का वक्त दिया, वह 26 मई को खत्म हो गया। अंत में हमने सौजन्यवश अंतिम अवसर भी दिया।

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रसाद ने कहा कि यदि भारतीय कंपनियां या फार्मा कंपनियां अमेरिका में उत्पादन करती हैं तो उन्हें वहां के नियमों का पालन करना होता है या नहीं? यदि आपको यहां व्यवसाय करना है तो आपके भारत के संविधान व नियमों का पालन करना होगा। आप भारत के पीएम की आलोचना कर सकते हो, लेकिन नियम तो मानना होंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब कुछ लोग ट्विटर के जरिए राजनीति करते हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, अब वे ट्विटर की राजनीति करते हैं तो भी कोई समस्या नहीं है, लेकिन यह मामला ट्विटर या सरकार या भाजपा का नहीं है। यह मामला ट्विटर व उसके यूजर्स के बीच का है, जिन्हें दुरुपयोग की दशा में शिकायत करने का मंच मिलना चाहिए। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। निष्पक्ष चुनाव होते हैं। हम असम में जीते तो बंगाल में हारे। स्वतंत्र न्यायपालिका कठोर सवाल पूछती है। मीडिया वरिष्ठ मंत्रियों से सवाल करता है। यह लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की आजादी है। इसके बावजूद आप नियमों का पालन नहीं करोगे तो यह गलत तर्क हैं।
-एजेंसियां

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