अरुण जेटली ने GST से जुड़े चार बिल लोकसभा में पेश किए, 29 मार्च को होगी चर्चा

Arun Jaitley Presented four bills related to GST in Lok Sabha, discussions will be held on March 29
अरुण जेटली ने GST से जुड़े चार बिल लोकसभा में पेश किए, 29 मार्च को होगी चर्चा

नई दिल्‍ली। अरुण जेटली ने गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स GST से जुड़े 4 बिलों को आज लोकसभा में पेश किया। सेंट्रल जीएसटी (सी-जीएसटी), इंटिग्रेटेड जीएसटी (आई-जीएसटी), यूनियन जीएसटी (यूटी-जीएसटी) और मुआवजा कानून बिल को सोमवार को लोकसभा में पेश किया गया। इन पर 29 मार्च को चर्चा होगी। कहा जा रहा है कि अगर संसद ने समय पर इन बिलों को मंजूरी नहीं दी तो जुलाई में जीएसटी लागू करना मुश्किल होगा।
स्टडी के मुताबिक जीएसटी से देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 2% तक बढ़ सकती है। संसद का सेशन 12 अप्रैल तक चलना है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में मोदी ने कैबिनेट की मीटिंग में लोगों को जीएसटी के लाभों को बताने के लिए कहा था।
मोदी चाहते हैं कि पार्टी ऑर्गनाइजेशन और सांसद अपने क्षेत्रों में लोगों को जीएसटी के बारे में बताएं।
इससे पहले रविवार को स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सांसदों की मीटिंग बुलाई थी, जिसमें आगामी दिनों में पेश होने वाले बिलों की चर्चा की गई।
एक जुलाई से जीएसटी लागू करना चाहती है सरकार
सरकार इस इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम को 1 जुलाई से लागू करने का टारगेट लेकर चल रही है।
इससे इंडियन प्रोडक्ट न सिर्फ घरेलू बाजार में, बल्कि इंटरनेशनल मार्केट में भी कॉम्पिटीटर हो जाएंगे।
स्टडी के मुताबिक इससे देश की जीडीपी ग्रोथ रेट एक से दो फीसदी तक बढ़ सकती है। इसके न केवल नई नौकरियां पैदा होंगी, बल्कि प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी।
अरुण जेटली की अगुआई वाली जीएसटी काउंसिल पिछली दो बैठकों में स्टेट जीएसटी के साथ चारों विधेयकों के मसौदों को मंजूरी दे चुकी है।
एसजीएसटी को सभी राज्यों विधानसभा में पारित किया जाना है, जबकि अन्य चार कानूनों के बिल के लिए संसद से मंजूरी ली जानी है।
जेटली ने कहा है कि जीएसटी काउंसिल की बैठक 31 मार्च को होगी। इसमें नियमों को मंजूरी दी जाएगी। फिर अलग-अलग प्रोडक्ट और सर्विसेस पर कितना जीएसटी लगेगा, यह तय किया जाएगा।
जीएसटी के लिए 5, 12, 18 और 28% की चार दरों की स्लैब का प्रपोजल है।
जीएसटी में खत्म होंगे मौजूदा सेस और सरचार्ज
कैबिनेट ने प्रोडक्ट्स और सर्विसेस पर सेस और सरचार्ज खत्म करने को मंजूरी दी थी। इसके लिए कस्टम एंड एक्साइज एक्ट में बदलाव किया गया है। यह फैसला जीएसटी को आसान बनाने के लिए है।
अभी कस्टम एक्ट, कस्टम टैरिफ एक्ट, सेंट्रल एक्साइज एक्ट, सेंट्रल एक्साइज एक्ट के तहत कई सेस और सरचार्ज लिए जाते हैं। जीएसटी के साथ ये सब खत्म हो जाएंगे।
सेंट्रल जीएसटी, इंटिग्रेटेड जीएसटी, यूटी जीएसटी और मुआवजा से जुड़े जीएसटी बिल को भी कैबिनेट ने पास कर दिया था। कस्टम एक्ट में भी हुए बदलाव के बाद इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट से जुड़ी कोई भी जानकारी मांगी जा सकेगी। इसका मकसद कम या ज्यादा वैल्युएशन को रोकना है।
वहीं नाबार्ड के कैपिटल बढ़ाने के लिए नाबार्ड एक्ट में भी बदलाव किया गया है। इसकी पूंजी 5,000 करोड़ से 30,000 करोड़ हो जाएगी। इससे इरिगेशन फंड और को-ऑपरेटिव बैंकों को ज्यादा कर्ज देने में मदद मिलेगी।
-एजेंसी

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