ब्रज के कलाकार भुखमरी के कगार पर: मोहनस्‍वरूप भाटिया

मथुरा। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष और सांस्कृतिक संस्था स्वास्तिक रंगमंडल के अध्यक्ष पद्श्री मोहन स्वरूप भाटिया ने जन-प्रतिनिधियों का ध्यान कलाकारों की दयनीय स्थितियों की ओर आकृष्‍ट करते हुए पीड़ा के साथ कहा है कि ब्रज क्षेत्र के सैकड़ों नहीं, हजारों कलाकार केवल आर्थिक संकट से ही नहीं मानसिक मंत्रणा से भी जूझ रहे हैं। वे स्वाभिमान के कारण किसी परिचित से आर्थिक सहायता माँगना और उसके द्वारा असमर्थता व्यक्त करने पर अपमान तथा हार्दिक वेदना की कल्पना मात्र से विचलित हैं। कोरोना से उत्पन्न राष्‍ट्रीय संकट के कारण कलाकार भुखमरी के कगार पर आ गये हैं।

उन्होंने कहा है कि कोरोना का प्रकोप प्रारम्भ होने के साथ ही उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि प्रदेशों के सांस्कृतिक केन्द्रों तथा सार्वजनिक संस्थानों द्वारा आयोजित होने वाले मंचीय कार्यक्रम स्थगित हो जाने के कारण कलाकार कुछ समय तक तो कार्यक्रम की आशा में रहे किन्तु अभी तक उनके हाथ निराशा ही लगी है।

वृन्दावन में रासलीला की 25 – 30 मंडलियाँ है। श्री बांके बिहारी आदि मन्दिरों के दर्शनार्थ आने वाले भक्तों तथा होली एवं सावन के दिनों में आने वाले पर्यटकों के कारण वृन्दावन के पण्डाल रासलीला मंचन से भरे रहते हैं किन्तु इस बार ऐसा नहीं हुआ।

कुम्भ कार्यक्रमों का भुगतान अभी तक नहीं
रासलीला में कृष्‍ण बनने वाले कलाकार ने जिसके हजारों भक्त चरण छूते हैं, बताया कि किराया न मिलने पर मकान मालिक ने सामान बाहर फेंकने की धमकी दी। उसने मकान मालिक को आश्‍वस्त किया था कि कुम्भ में कार्यक्रम है। कल वह पूरा किराया दे देगा किन्तु कुम्भ में होने वाले कार्यक्रमों के किसी भी कलाकार को आज तक भुगतान नहीं मिला है।

नौटंकी के कलाकारों को तो वर्ष में नौ महीने खाली बैठना पड़ता है। एक समय था जबकि राजे – महाराजे और बड़े जमींदार कार्यक्रम कराया करते थे। विवाह में वर पक्ष की कन्या पक्ष से यह शर्त होती थी कि वह स्वागत में नौटंकी करायेगा। वर्तमान में न राजे-महाराजे हैं और न बड़े जमींदार और न ही डीजे के सामने नौटंकी की मांग। इन स्थितियों में नौटंकी संस्कृति विभाग के आयोजनों तथा मेले तमाशों तक सीमित रह गई है किन्तु संस्कृति विभाग के आयोजन भी स्थगित हैं।

गायन-वादन-नृत्य से जु़ड़ी कुछ महिलाओं ने अभिनय-नृत्य से जुड़ी युवतियों के साथ अपनी पार्टी बना रखी है जो संस्कृति विभाग पर कार्यक्रमों के लिए आश्रित रहती हैं और उन्हें ‘कमीशन बेसिस’ पर कार्यक्रम मिल पाते हैं। ये कलाकार भी इस समय मंचीय कार्यक्रम बन्द होने के कारण आर्थिक संकट में है।

मोहन स्वरूप भाटिया ने सांसद एवं विधायकगण से अनुरोध किया है कि वे कलाकारों से सम्पर्क कर उनकी समस्या को समझें और जब मंचीय कार्यक्रम संभव न हों तब तक उन्हें संस्कृति विभाग से आर्थिक अनुदान दिलायें अथवा स्टूडियो में विभिन्न विधाओं के कार्यक्रम तथा कलाकारों के अनुभव – संस्मरण रि‍कॉर्ड कर ‘ आर्काइव ’ का भण्डार समृद्ध कर उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान करें।

ब्रज क्षेत्र में गायन – वादन – नृत्य – अभिनय से जुड़ी अनेकानेक कलाएँ हैं, इन्हें जीवित रखना है तो कलाकारों को जीवित रखना आवश्‍यक होगा।

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