अर्थव्यवस्था पर पुत्र का पिता को लेख के बदले लेख से जवाब

अटल बिहारी सरकार में वित्त मंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा ने बुधवार को मौजूदा अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली के ख़िलाफ़ हमला बोला था.
उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था की ‘खस्ता हालत’ के लिए मोदी सरकार की नीतियों को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया था.
गुरुवार को सिन्हा के पुत्र और मोदी सरकार में नागर विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने इसका जवाब दिया.
बेटे जयंत ने लिखा लेख
उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया में New Economy For New India (नए भारत के लिए नई अर्थव्यवस्था) शीर्षक से एक लेख लिखा है.
इसमें जयंत ने लिखा है, ”खुली, पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और इनोवेशन आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बुनियादी बदलाव किए जा चुके हैं.”
बुधवार को अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में लिखे लेख में यशवंत ने लिखा था कि देश की अर्थव्यवस्था गर्त की ओर जा रही है. भाजपा में कई लोग ये बात जानते हैं लेकिन डर की वजह से कुछ कहेंगे नहीं.
‘I need to speak up now’ (मुझे अब बोलना ही होगा) लेख में उन्होंने लिखा था, ”देश के वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था की हालत जो बिगाड़ दी है, ऐसे में अगर मैं अब भी चुप रहूं तो ये राष्ट्रीय कर्तव्य के साथ अन्याय होगा.”
बाप-बेटे की तकरार
सिन्हा ने लिखा था, ”आज अर्थव्यवस्था की क्या हालत है? निजी निवेश गिर रहा है. इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन सिकुड़ रहा है. कृषि संकट में है, कंस्ट्रक्शन और दूसरे सर्विस सेक्टर धीमे पड़ रहे हैं, निर्यात मुश्किल में है, नोटबंदी नाकाम साबित हुई और गफ़लत में लागू किए गए जीएसटी ने कइयों को डुबो दिया, रोज़गार छीन लिए. नए मौके नहीं दिख रहे. ”तिमाही दर तिमाही ग्रोथ रेट धीमी पड़ रही है.”
ज़ाहिर है इस लेख को कांग्रेस ने हाथों-हाथ लिया. राहुल गांधी से लेकर पी चिदंबरम तक, सभी ने सिन्हा को सही ठहराते हुए भाजपानीत सरकार पर निशाना साधा.
जयंत ने दिया जवाब
अब जयंत की तरफ़ से इसका जवाब आया है. उन्होंने लिखा है, ”हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों पर काफ़ी लेख लिखे गए हैं. दुर्भाग्य से इनमें बहुत संकुचित तथ्यों से निष्कर्ष निकाले गए हैं, जबकि उन बुनियादी ढांचागत सुधारों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया है, जो अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं.”
उन्होंने लिखा है, ”साथ ही जीडीपी ग्रोथ की एक या दो तिमाही और मैक्रो डेटा से उन ढांचागत बदलावों के दूरगामी फ़ायदे नज़र नहीं आ सकते हैं जो अभी चल रहे हैं. ये सुधार ज़रूरी हैं ताकि नए भारत का निर्माण किया जा सके और अरब से ज़्यादा वर्कफ़ोर्स को रोज़गार मुहैया कराए जा सकें.”
यशवंत सिन्हा ने नोटबंदी के फ़ैसले और जीएसटी को लागू करने के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए थे. जयंत ने इस मुद्दों पर भी बोला है. उन्होंने लिखा है, ”जीएसटी, नोटबंदी और डिजिटल भुगतान वो कोशिशें हैं जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था आधिकारिक रूप लेगी.”
जयंत के मुताबिक टैक्स के दायरे से बाहर और अनाधिकारिक तौर पर होने वाला भुगतान अब औपचारिक दायरे में आ गए हैं. उन्होंने कहा है कि सभी मंत्रालयों में नीति-निर्माण अब नियम आधारित हो गया है. प्राकृतिक संसाधन और लाइसेंस पारदर्शी नीलामी के ज़रिए सौंपे जा रहे हैं.
मोदी सरकार की तारीफ़
मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ़ करते हुए जयंत ने जन धन-आधार-मोबाइल योजना का ब्योरा दिया और डायरेक्ट बेनेफ़िट ट्रांसफ़र की प्रशंसा भी की. ये भी बताया कि किस तरह भारत के गांव साल 2018 तक पूरी तरह बिजली पा जाएंगे.
अंत में उन्होंने लिखा है, ”लगभग हर भारतीय के पास अब बेसिक सेफ़्टी नेट होगा जिसमें खाने, बिजली, रोज़गार, हाउसिंग, बैंक खाते, टॉयलेट, गैस, बीमा कवर, माइक्रो लोन और सड़क की गारंटी होगी.”
सोशल मीडिया पर बुधवार को यशवंत ट्रेंड कर रहे थे, आज जयंत कर रहे हैं.
हालांकि जयंत के लेख पर कांग्रेस ने पलटवार करने में ज़रा देर नहीं लगाई. यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने कई ट्वीट किए. उन्होंने लिखा, ”टीओआई में जयंत सिन्हा का लेख पीआईबी की प्रेस रिलीज़ जैसा लग रहा है. उन्हें ये पता होना चाहिए कि प्रशासनिक बदलाव ढांचागत सुधार नहीं होते.”
उन्होंने लिखा, ”अगर जयंत सिन्हा की बात सही है तो पांच तिमाही से जीडीपी ग्रोथ धीमी क्यों है. अगर जयंत सही हैं तो निजी निवेश में इज़ाफ़ा क्यों नहीं हो रहा. अगर वो सही हैं तो क्रेडिट ग्रोथ नेगेटिव क्यों है?”
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने इसे पिता बनाम पुत्र की लड़ाई बनाने पर चुटकी ली है. उमर ने ट्वीट किया, ”डायनेस्टी इज़ नेस्टी (वंश, दंश है) लेकिन ये क्या बकवास है. पिता के लिखे लेख पर पलटवार के लिए बेटे को उतार दिया गया.”
सोशल मीडिया में चर्चा
दूसरे लोग भी जयंत के लेख पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. निहाल ने लिखा है, ”भारतीय राजनीति में वंशवाद की ख़ूबसूरती देख लीजिए. आर्थिक मुद्दे पर बेटा, बाप पर पलटवार कर रहा है.”
सुहेल सेठ ने लिखा है, ”दिलचस्प वक़्त है. पिता एक दिन लिखता है, फिर बेटा अगले दिन. बेटे ने सीधे पिता से बात कर कुछ बातें क्यों नहीं समझा दीं. हमें ये पूरा क्यों पढ़ना पड़ता.”
-BBC