पाक के Snipers अटैक पर सेना की चेतावनी, बहुत जल्‍द बदला लेकर रहेंगे, अब समय व जगह का चुनाव हम करेंगे

Snipers अटैक पर भारतीय सेना ने कहा कि हमने इस तरह के स्निपिंग ऑपरेशन को अतीत में पहले भी अंजाम दिए हैं

नई दिल्‍ली। सीमा पर Snipers की मदद से भारतीय जवानों को निशाना बनाने की घटना के बाद भारतीय सेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘लाइन ऑफ कंट्रोल पर इस्तेमाल होने वाले भारी हथियारों जैसे कि मोर्टार, लाइट आर्टिलरी और एंटी टैंक मिसाइल की तुलना में स्निपिंग सबसे ज्यादा प्रभाव डालती है। इससे कमांडरों और जवानों के बीच एक तरह का भय बना रहता है।’ इसलिए भारतीय सेना अपने दो जेसीओ की शुक्रवार को हुई हत्या का बदला लेगी। एक दूसरे अधिकारी ने कहा, ‘हम समय और जगह का चुनाव करेंगे। हमने इस तरह के स्निपिंग ऑपरेशन को अतीत में पहले भी अंजाम दिए हैं।’

सेना ने Snipers अभियान की तुलना जवानों का मनोबल गिराने के लिए सिर काटने जैसी घटना को अंजाम देने से की है। साथ ही यह साफ कर दिया है कि पाकिस्‍तान ने इसका बदला लिया जाएगा। शुक्रवार को पाकिस्तानी स्नाइपर्स द्वारा कुपवाड़ा जिले में किए हमले में सेना के दो जेसीओ शहीद हो गए थे।

जम्मू-कश्मीर में राजोरी जिले के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया। यह चौथा दिन है जब पाक ने जम्मू-कश्मीर में सीमा पर बनी पोस्ट पर गोलीबारी की है। भारी गोलीबारी होने के चलते डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर राजोरी ने सीमा से सटे पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी स्कूल आज के लिए बंद कर दिए हैं। सेना पाकिस्तान को लगातार सीमा पर मुंहतोड़ जवाब दे रही है।

राइफल के अधिग्रहण की परियोजना को रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा फरवरी में स्वीकार किया गया

एक अहम तथ्य यह भी है कि भारतीय सेना के पास अभी भी रूस की पुरानी 7.62एमएम ड्रैगनोव सेमी-ऑटोमेटिक स्नाइपर राइफल्स हैं। जिनकी एक सीमित रेंज (800 मीटर) है। 1960 के दशक में इन्हें डिजायन किया गया था। कई सालों से सेना 5719 8.6एमएम स्नाइपर राइफल को खरीदना चाह रही है। इस राइफल की मारक क्षमता 1200 मीटर है। इन राइफल के अधिग्रहण की परियोजना को रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा फरवरी में स्वीकार किया गया था।

इन स्नाइपर राइफलों की अनुमानित लागत 982 करोड़ रुपये है। प्रक्रिया फिलहाल शुरुआती चरण यानी टेंडर स्टेज पर है। इसका मतलब यह है कि कॉन्ट्रैक्ट को पूरा होने में अभी तीन से चार सालों का वक्त लगेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ड्रैगनोव राइफल को कई आधुनिक चीजों से लैस किया गया है मगर इनकी गोलियां काफी महंगी होती हैं। उन्होंने कहा कि स्नाइपिंग को मजबूत बनाने के लिए नई मॉड्युलर राइफल और इसके गोला-बारूद के घरेलू उत्पादन की व्यवस्था को शुरू करने की तत्काल जरूरत है।

-एजेंसी

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