ज़िम्बाब्वे में सेना ने सत्ता का नियंत्रण अपने हाथ में लिया, राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे हिरासत में

ज़िम्बाब्वे में सत्तारूढ़ पार्टी ने ट्विटर पर दावा किया है कि एक रक्तहीन कार्यवाही के बाद सेना ने सत्ता का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है और राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे को हिरासत में ले लिया गया है.
सरकारी टेलीविज़न ज़ेडबीएमसी पर कब्ज़े के बाद सेना के एक प्रवक्ता ने घोषणा की कि सेना मुगाबे के उन करीबी लोगों के खिलाफ़ कार्यवाही कर रही है जो ‘सामाजिक और आर्थिक’ समस्याओं के लिए ज़िम्मेदार हैं. मुगाबे 1980 से ज़िम्बाब्वे की सत्ता पर काबिज थे.
सेना की ये कार्यवाही राष्ट्रपति मुगाबे के अपने डिप्टी इमरसन मनंगावा को अपनी पत्नी ग्रेस का पक्ष लेने के लिए बर्खास्त किए जाने के बाद की गई है.
राजधानी हरारे में गोलीबारी और धमाकों की आवाज़ें सुनी गई हैं और संसद और सरकारी इमारतों के आसपास हथियारों से लैस गाड़ियां गश्त लगा रही हैं. सैनिक यूनिफ़ॉर्म में एक जनरल ने टेलीविज़न पर पढ़े गए एक बयान में इस बात से इंकार किया है कि ये तख़्तापलट की कार्यवाही है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुगाबे और उनके परिवार के सदस्य सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है.
हालांकि वो कहां हैं और किस हाल में हैं इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है और राष्ट्रपति मुगाबे की तरफ़ से अभी तक कुछ भी नहीं सुना गया है.
देश के उपराष्ट्रपति इमरसन मनंगावा की बर्खास्तगी के बाद सेना ने राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे को चुनौती दी थी.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ज़िम्बॉब्वे में जो कुछ हो रहा है उसमें एक तख़्तापलट के सभी गुण हैं.
बीबीसी अफ़्रीका की एडिटर का कहना है कि रॉबर्ट मुगाबे की पत्नी ग्रेस के साथ क्या होता है, ये देखना दिलचस्प होगा. ग्रेस मुगाबे को पूर्व उपराष्ट्रपति इमरसन मनंगावा का धड़ा अपना ‘असली दुश्मन’ मानता है.
ज़िम्बॉब्वे संकट: जो बातें अभी तक पता हैं
सैनिकों ने ज़िम्बॉब्वे के नेशनल ब्रॉडकास्टर के मुख्यालय पर कब्ज़ा कर लिया है. राजधानी हरारे में तनाव के माहौल के बीच धमाके और गोलीबारी की आवाज़ें सुनी गई हैं.
टीवी पर सेना के एक जनरल ने आकर जोर देते हुए कहा कि ज़िम्बॉब्वे में कोई सैनिक तख़्तापलट नहीं हुआ है और राष्ट्रपति मुगाबे और उनका परिवार सुरक्षित है लेकिन ज़िम्बॉब्वे की सत्तारूढ़ पार्टी के ट्विटर हैंडल पर एक ताज़ा पोस्ट में कहा गया है कि मुगाबे के परिवार को हिरासत में ले लिया गया है.
हरारे से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक़ संसद और सत्तारूढ़ ज़नू-पीएफ़ पार्टी के मुख्यालय की ओर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया है.
इससे पहले राजधानी हरारे में राष्ट्रपति मुगाबे के निजी आवास के पास भी गोलियां सुनी गई हैं. सेना की तरफ़ से मुगाबे और उनके परिवार को सुरक्षा की गारंटी दी गई है.
सेना ने तख़्तापलट की बात से इंक़ार करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति के इर्द-गिर्द मौजूद अपराधियों पर कार्यवाही की जा रही है.
क्या ये तख्तापलट है?
बीबीसी अफ़्रीका के संवाददाता एंड्रयू हार्डिंग ने ज़िम्बॉब्वे के घटनाक्रम को एक बड़ा दांव करार दिया है.
उनका कहना है, “ये याद रखना ज़रूरी है कि मुगाबे को पश्चिमी देशों से कोई चुनौती नहीं मिल रही थी जिन्हें वो दशकों से चुनौती दे रहे थे. न तो ज़िम्बॉब्वे का राजनीतिक विपक्ष और न ही आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे लोगों ने उन्हें कोई चुनौती दी थी.”
बीबीसी संवाददाता के अनुसार, “ये बुनियादी रूप से ज़िम्बॉब्वे की सत्तारूढ़ ज़नू-पीएफ़ पार्टी का अंदरूनी सत्ता संघर्ष है. इस संघर्ष में जो भी विजेता बनकर उभरेगा पार्टी उसके सामने नतमस्तक हो जाएगी.”
-BBC