Arms license रैकेट का भंडाफोड़, कुपवाड़ा के पूर्व डीसी राजीव रंजन व डीएम इतरित हुसैन गिरफ्तार

चंडीगढ़। सीबीआई ने Arms license रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए आज चंडीगढ़ से कुपवाड़ा के पूर्व डीसी रहे राजीव रंजन, कुपवाड़ा के डीएम रहे इतरित हुसैन को गिरफ्तार कर ल‍िया है। इन दोनों को फर्जी कागजात और बिना वेरिफिकेशन किए हजारों Arms license जारी करने के आरोप में गिरफ्तार क‍िया है। सीबीआई ने कश्मीर काडर के 2010 बैच के आईएएस राजीव रंजन को सोमवार को चंडीगढ़ में गिरफ्तार कर लिया। वे कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के डीसी रह चुके हैं। जबक‍ि रव‍िवार देर रात 2013 से 2015 तक कुपवाड़ा के डीएम रहे इतरित हुसैन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।

Arms license रैकेट में कई आईएएस अफसर सीबीआई के रडार पर हैं। जांच एजेंसी ने पिछले दिनों कुछ अफसरों के घरों व दफ्तरों पर भी छापेमारी की थी। इनमें उधमपुर की पूर्व डीएम यशा मुदगिल, किश्तवाड़ के पूर्व डीएम सलीम मोहम्मद, पुलवामा के पूर्व डीएम जहांगीर अहमद मीर और डोडा के पूर्व डीएम फारूक अहमद खान भी शामिल हैं।

सीबीआई के मुताबिक, 2016 से 2017 तक कुपवाड़ा में तैनाती के दौरान राजीव रंजन ने करीब 30,000 आर्म्स लाइसेंस जारी किए। उन्होंने प्रति लाइसेंस 8-10 लाख रुपए लिए। ये लाइसेंस कश्मीरियों को ही नहीं बल्कि चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान समेत अन्य राज्यों के लोगों को भी फर्जी कागजातों पर कश्मीरी बताकर दिए थे। अब सीबीआई पता लगा रही है कि ये लाइसेंस किन लोगों को बांटे गए। आशंका है कि ज्यादातर लाइसेंस आतंकियों व गैंगस्टरों ने बनवाए ताकि वे बिना रोक टोक कहीं भी हथियार लेकर आ जा सकें।

राजीव रंजन की गिरफ्तारी से पहले सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर सरकार से इजाजत ली, क्योंकि वे कश्मीर काडर के हैं। वे इन दिनों मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन जम्मू में तैनात हैं। अब सीबीआई उन्हें सोमवार को कश्मीर लेकर जाएगी और जेएंडके कोर्ट में पेश कर दोबारा रिमांड हासिल करेगी।

दो साल पहले राजस्थान से पकड़ा गया था रंजन का भाई
फर्जी Arms license मामले के तार राजस्थान से भी जुड़े हुए हैं। पुलिस ने रंजन के भाई ज्योति रंजन को 2017 में गिरफ्तार कर फर्जी हथियार लाइसेंस पकड़े थे। उस समय डीजीपी रहे ओपी गिल्होत्रा ने शक जताया था कि इसमें राजीव रंजन का भी हाथ हो सकता है। श्रीगंगानगर में 2007 में फर्जी हथियार लाइसेंस के मामले सामने आए थे। उस समय करीब आधा दर्जन केस दर्ज हुए। इसके साथ ही तत्कालीन दो-तीन आईएएस की सुपरविजन मामले में लापरवाही मानी गई थी। संबंधित शाखा के दो लिपिकों और एक सहायक कर्मचारी पर भी विभागीय कार्रवाई की गई थी।

इस पूरे मामले कई आर्मी अफसर भी लिप्त माने गए। जम्मू से यहां आकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस जारी करवा लिए थे। यहां शहर के कुछ हथियार विक्रेताओं की भूमिका भी जांच के दायरे में रही थी।

– एजेंसी

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