अस्पतालों में बेड की कमी देख रईसों ने घर में ही बना डाले मिनी हॉस्‍पिटल

अस्पताल में बेड नहीं मिल रहा तो अपने घर पर ही बना लीजिए मिनी अस्पताल। देश के रईस लोग होम हेल्थकेयर को अगले लेवल पर ले गए हैं। भले ही वह कोरोना से संक्रमित हों या फिर उन्हें संक्रमण का डर है, वह अस्पताल के आईसीयू की चीजें खरीद कर घर पर ही आईसीयू सेटअप करवा रहे हैं। इसके लिए वह वेंटिलेटर जैसे उपकरण भी खरीद रहे हैं। वहीं बात अगर ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर की आती है तो वह इसका भी स्टॉक रख रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर काम आ सके। साथ ही मेडिकल प्रोफेशनल्स से पहले से ही बात तय की जा रही है।
अचानक बढ़ गई डिमांड
होम हेल्थकेयर कंपनियों के पास अचानक से इन चीजों की इतनी डिमांड आ गई है कि वह इसे पूरा करने में भी असमर्थ हैं। 5 होम हेल्थकेयर कंपनियों के सीईओ ने बताया है कि इन उपकरणों और सेवाओं की मांग पिछले 5-7 दिनों में करीब 100 फीसदी बढ़ गई है। अब मेडिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों को ये डर लग रहा है कि इन उपकरणों की सप्लाई देने में उन्हें दिक्कत हो सकती है।
कितना आता है खर्च?
अलग-अलग ब्रांड के हिसाब से एक नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर की लागत करीब 50 हजार रुपये से 2.5 लाख रुपये तक होती है। वहीं घर में एक आईसीयू चलाने की लागत करीब 15 से 25 हजार रुपये प्रतिदिन के करीब आती है। ऑक्सीजन और उससे जुड़ी हर चीज की मांग इस वक्त काफी बढ़ गई है।
कितनी भी पैसा खर्च करने को तैयार हैं लोग
डाबर के बर्मन की कंपनी हेल्थकेयर एट होम को हेल्थकेयर सुविधाएं सेटअप करने के लिए मिलने वाली मांग करीब 20 गुना हो गई है। कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर डॉक्टर गौरव ठुकराल कहते हैं कि दिल्ली-एनसीआर में डिमांड सबसे अधिक। उन्होंने कहा कि होम आईसीयू अस्पताल के आईसीयू जैसा कभी नहीं हो सकता है जबकि लोग कितना भी पैसा खर्च करने के लिए तैयार हैं।
-एजेंसियां

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