क्या आप RERA में मिले अधिकारों से वाकिफ हैं?

नई दिल्‍ली। घर खरीदारों को बिल्डरों की बदमाशियों से बचाने के लिए 1 मई 2017 को रियल एस्टेट (रेग्युलेशन ऐंड डिवेलपमेंट) ऐक्ट RERA 2016 देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुका है लेकिन क्या ग्राहक रेरा में मिले अधिकारों से वाकिफ हैं?
यह सवाल इसलिए क्योंकि जब तक ग्राहक अपने अधिकारों को नहीं जानेंगे तब तक वह सही-गलत में फर्क ही नहीं कर पाएंगे और बिल्डरों की मनमर्जी यूं ही चलती रहेगी।
ANAROCK प्रॉपर्टी कंसल्टंट्स के चेरयमैन अनुज पुरी बेहद महत्वपूर्ण 14 जानकारियां दे रहे हैं, जिससे हर होम बायर को वाकिफ होना चाहिए…
डिलिवरी में देरी तो ये अधिकार
अगर प्रॉजेक्ट समय पर बनकर तैयार नहीं होता है और वादे के मुताबिक पजेशन नहीं मिलता है तो खरीदार को अधिकार है कि-
1. वह बुकिंग वापस ले ले। ऐसी स्थिति में रियल एस्टेट डिवेलपर को सूद समेत सारे पैसे 45 दिनों के अंदर वापस करने होंगे।
2. होम बायर इस शर्त पर उस प्रॉजेक्ट से नहीं हटे कि पजेशन मिलने तक बिल्डर उसे हर महीने उचित ब्याज देगा।
​रजिस्ट्रेशन नंबर जरूरी
सभी बिल्डरों के लिए सारे प्रॉजेक्ट्स का RERA में रजिस्ट्रेशन करवाकर हरके प्रॉजेक्ट का अलग-अलग रजिस्ट्रेशन नंबर लेना अनिवार्य है। बिना RERA रजिस्ट्रेशन के डिवेलपर्स को कोई प्रॉजेक्ट बेचने की अनुमति नहीं है।
RERA के पोर्टल पर प्रॉजेक्ट डीटेल्स, कंस्टक्रक्शन प्रोग्रेस, ऑक्युपेशन की शुरुआत समेत अन्य प्रमाणपत्रों एवं बिक्रियों की जानकारियां समय-समय पर अपडेट करना अनिवार्य है।
बिल्डर का ट्रैक रेकॉर्ड जानना आसान
बायर्स अब प्रतिष्ठित डिवेलपरों का पता आसानी से लगा सकेंगे और उन्हीं प्रॉजेक्ट्स में निवेश कर सकेंगे जिनके बिल्डर्स का ट्रैक रेकॉर्ड कानून पालन में बेहतरीन हो। बायर्स को RERA से यह भी जानकारी मिल जाती है कि किसी बिल्डर की फाइनैंशल कंडिशन कैसी है।
फंड की हेराफेरी पर लगाम
खरीदारों से जमा किए गए पैसे को सुरक्षित करने के मकसद से हरेक प्रॉजेक्ट के लिए जमा धन का कम-से-कम 70% एस्क्रो अकाउंट में डालना अनिवार्य किया गया है। डिवेलपर एक प्रॉजेक्ट के बायर्स का पैसा दूसरे प्रॉजेक्ट में नहीं लगा पाएगा। पहले इसी हेराफेरी की वजह से प्रॉजेक्ट लटकते थे।
कार्पेट एरिया की सही जानकारी
अब होम बायर्स से सुपर-बिल्ट एरिया के हिसाब से पैसे ऐंठने की परंपरागत ‘ठगी’ नहीं हो सकती। रेरा के तहत बिल्डरों के लिए अब प्रॉपर्टी के कार्पेट एरिया के आधार पर ही कीमत बताना अनिवार्य कर दिया गया है। यानी, अब आपसे धोखे से ज्यादा पैसे नहीं वसूला जा सकता।
कुछ नहीं बदल सकते बिल्डर
अगर बिल्डर बिल्डिंग, लेआउट प्लान, स्पेसिफिकेशन या प्रॉजेक्ट की लायबिटिज में बदलाव करना चाहता है तो यह तभी संभव है जब उस खास प्रॉजेक्ट के करीब दो तिहाई घर खरीदार की सहमति नहीं मिल जाए।
पेमेंट प्लांस की जानकारी
घर खरीदार अब पेमेंट प्लान के सारे विकल्पों की जानकारी लेकर उचित विकल्प का चयन कर सकता है। ध्यान रहे कि विभिन्न बिल्डर फ्लेक्सी पेमेंट, डाउन पेमेंट, पजेशन लिंक्ड और कंस्ट्रक्शन प्लान जैसे विकल्प देते हैं।
10% से ज्यादा बुकिंग अमाउंट नहीं
डिवेलपर्स प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 10% से ज्यादा रकम बुकिंग अमाउंट के रूप में नहीं ले सकता। RERA में इसकी सख्त मनाही है। अगर कोई बिल्डर 10% से ज्यादा बुकिंग अमाउंट वसूलता है तो उसे 3 साल तक की सला हो सकती है।
​एजेंट को भी RERA में रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी
खरीदारों के सेवा प्रदाता के रूप में प्रॉपर्टी ब्रोकर्स पर भी डिवेलपर्स के वादे के मुताबिक डिलिवरी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बनती है इसलिए उनके लिए संबंधित राज्य के रेरा अथॉरिटी में रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है।
झूठे प्रचार पर रोक
डिवेलपर अब उसी प्रॉजेक्ट का विज्ञापन दे सकता है जो RERA में रजिस्टर्ड हो चुका हो। हर विज्ञापन या प्रमोशन के अन्य माध्यमों में रेरा रजिस्ट्रेश नंबर बताना जरूरी है।
विश्वसनीय समाधान तंत्र
किसी तरह की धोखाधड़ी की स्थिति में डिवेलपरों एवं ब्रोकरों पर जुर्माना लगाने के प्रावधान के साथ RERA में खरीदारों को प्रभावी समाधान तंत्र बनाया गया है। डिवेलपरों के खिलाफ होम बायर्स की शिकायत का 60 दिनों के अंदर समाधान करना अनिवार्य है।
ढांचागत गड़बड़ियों का समाधान
पजेशन मिलने के 5 सालों के अंदर घर की दीवारों या फर्श में दरारें दिखने लगे या अन्य समस्याएं आएं तो बिल्डर को इसे 30 दिनों के अंदर ठीक करवाना होगा या उचित मुआवजा देना होगा।
जमीन के मालिकाना हक का दस्तावेज
RERA से पहले बेहत महत्वपूर्ण दस्तावेज अक्सर बायर्स की पहुंच से दूर ही होते थे लेकिन अब रेरा की वेबसाइट पर जाकर कोई भी ग्राहक प्रॉजेक्ट की जमीन के मालिकाना हक की जानकारी ले सकता है।
​​सॉफ्ट लॉन्च या प्री लॉन्च पर पूर्ण रोक
RERA ने सॉफ्ट लॉन्च, प्री लॉन्च और उस चीज की बिक्री के सारे प्रयासों पर पूरी तरह रोक लगा दी है जो वास्तव में है ही नहीं। ऐसे में अब सट्टेबाजी पर लगाम लग गई है और रियल एस्टेट मार्केट पूरी तरह बायर फ्रेंडली हो गया है।
-एजेंसी

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