‘सुपर कन्ज्यूमर्स’ बनकर उभर रहे हैं एकाकी जीवन जीने वाले शहरी दौलतमंद

मुंबई। डुअल इनकम, नो किड्स (DINKs) यानी दोहरी कमाई, लेकिन बच्चे के बिना शहरों में रहने वाले और वेल्दी, सिंगल अर्बनाइट्स (WSUs) यानी एकाकी जीवन जीने वाले शहरी दौलतमंद अब नए बड़े खरीदार बनकर उभर रहे हैं।
जीवनशैली में आम आबादी से अलहदा डीआईएनकेज और विशेष सुविधाओं की परिभाषा गढ़ रहे डब्ल्यूएसयूज की तादाद बढ़ रही है। 28 से 42 वर्ष की उम्र के एकाकी जीवन जीने वाले शहरी दौलतमंदों की तादाद अभी भारत की कुल आबादी की 1% यानी करीब 13 लाख है। श्रेष्ठ जीवनशैली और 50 हजार प्रति माह की सीमा से ज्यादा की कमाई के दम पर खर्च करने की अधिक क्षमता की वजह से बाजार इन्हें ‘सुपर कन्ज्यूमर्स’ कहता है।
इन सुपर कन्ज्यूमर्स के जीवन जीने के तौर-तरीकों में परिजनों से दूर रहना, किचन में खाने-पीने की चीजों का भरमार रखना, हाइटेक गैजट्स रखना आदि शामिल हैं जो डब्ल्यूएसयूज को बाजार के लिए महत्वपूर्ण कन्ज्यूमर बेस बनाते हैं। नील्सन के एक सर्वे में पाया गया है कि 2007 से 2017 के बीच एकाकी जीवन जीनेवाले लोगों की तादाद 35% बढ़ गई। ऐसा प्रमुख रूप से शहरी क्षेत्रों में देखा गया है।
नील्सन इंडिया के अर्जुन उर्स ने कहा, ‘ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मिलेनियल्स (नवयुवक) नौकरियों के लिए बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं। चूंकि उन पर कोई पारिवारिक दायित्व नहीं होता है इसलिए उन्हें अपनी कमाई की मनमर्जी रकम खर्च करने की छूट होती है। जोखिम उठाने की प्रवृति और गैर-पारंपरिक चीजें अपनाने की चाहत की वजह से वे दौलतमंदों जैसी जिंदगी जीते हैं।’ 25% डब्ल्यूएसयूज ने अपने घरों में हवा शुद्ध करने की व्यवस्था (एयर प्यूरिफायर्स) लगा रखे हैं। भारत में ऐसे लोगों की नई श्रेणी उभर रही है।
डब्ल्यूएसयूज ज्यादा समय तक काम करते हैं और करियर एवं पैसे को सबसे ऊपर रखते हैं जबकि शादी-ब्याह का मामला बहुत पीछे छूट जाता है। नील्सन के सर्वे में एक दिलचस्प बात यह सामने आई है कि पुरानी धारणाओं से अलग अब ये डब्ल्यूएसयूज खाना बनाने, लोगों से मिलने-जुलने और खेल-कूद जैसी गतिविधियों में दिलचस्पी ले रहे हैं। वे स्वास्थ्य के प्रति भी सचेत रहते हैं।
सर्वे बताता है कि डब्ल्यूएसयूज कमाते हुए अच्छे-खासे हैं, लेकिन अक्सर पैसे का अभाव भी झेलते हैं। वे बना-बनाया भोजन और पैकेट में बंद खाद्य सामग्री पसंद करते हैं। बाजार की इन पर कितनी गहरी नजर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कंपनियां इनकी आदतों के मुताबिक ही प्रॉडक्ट्स तैयार कर रही हैं। इसी क्रम में रिटेल चेन शॉपर्स स्टॉप ने अपने सारे स्टोर में ‘पर्सनल शॉपर’ के अलग काउंटर्स लॉन्च किए हैं।
-एजेंसियां

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