और दुनिया को लूटकर फरार हो गई क्रिप्टोकरेंसी की महारानी

रुजा इग्नातोवा ख़ुद को क्रिप्टोकरेंसी की महारानी कहा करती थीं. रुजा ने लोगों को बताया था कि उन्होंने बिटकॉइन के मुक़ाबले एक नई क्रिप्टोकरेंसी ईजाद की है.
यही नहीं, उन्होंने लोगों को इस करेंसी में लाखों करोड़ों के निवेश करने के लिए भी राज़ी कर लिया. फिर अचानक दो साल पहले वो ग़ायब हो गईं. रुजा ने ये काम आख़िर कैसे किया? वो अचानक कहां ग़ायब हो गई? वो कहां छिपी है?
बीबीसी के जेमी बार्टलेट ने मिसिंग क्रिप्टोकॉइन नाम के पॉडकास्ट के लिए रुजा इग्नातोवा से जुड़े इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए कई महीनों तक छानबीन की ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि रुजा इग्नातोवा आख़िर कहां छुपी हैं.
ये बात जून 2016 के शुरुआती दिनों की है. 36 साल की एक कारोबारी डॉक्टर रुजा इग्नातोवा लंदन के मशहूर वेम्बली अरेना में अपने हज़ारों चाहने वालों के सामने स्टेज पर नमूदार होती है. हमेशा की तरह वो महंगा बॉलगाउन पहने हैं. कानों में हीरे के लंबे-लंबे झुमके हैं और होठों पर चटख़ सुर्ख़ लिपस्टिक लगी है.
जोश में झूमते हुए अपने चाहने वालों को रुजा बताती है कि वनकॉइन बहुत जल्द दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बनने वाली है. बहुत जल्द सारी दुनिया में हर कोई इसी के सहारे पैसे का भुगतान करेगा.
बिटकॉइन दुनिया की पहली क्रिप्टोकरेंसी थी औऱ आज भी सबसे ज़्यादा जानी और पहचानी जाती है. 2016 के मध्य तक इस करंसी की क़ीमत में बेपनाह इज़ाफ़ा हुआ. कारोबारी बाज़ार में पैसा कमाने का ये एक नया और नायाब तरीक़ा था. बहुत लोग इस नई करेंसी में अपने लिए नई संभावनाएं तलाश रहे थे.
वेम्बली अरेना में डॉक्टर रुजा ने अपने चाहने वालों को बताया कि वनकॉइन, बिटकॉइन को ख़त्म करने वाली डिजिटल करेंसी है. उन्होंने लोगों से कहा कि दो साल बाद कोई भी बिटकॉइन का ज़िक्र तक नहीं करेगा. वनकॉइन, बिटकॉइन को ख़त्म करने आया है. दुनिया भर में लोग वनकॉइन को एक नई क्रांति मान कर इसमें पैसा लगा रहे थे.
बीबीसी को मिले दस्तावेज़ों के मुताबिक़ 2016 के पहले छह महीने में ब्रिटेन के नागरिकों ने वनकॉइन में क़रीब 3 करोड़ यूरो का निवेश कर डाला था. इसमें से 20 लाख यूरो तो महज़ एक हफ़्ते में निवेश किए गए थे. वनकॉइन को लेकर वेम्बले में हुए भव्य कार्यक्रम के बाद तो निवेश का औसत और भी बढ़ने वाला था.
अगस्त 2014 से मार्च 2017 के बीच दुनिया भर के कई देशों से क़रीब चार अरब यूरो का निवेश वनकॉइन में हो चुका था. इसमें पाकिस्तान और ब्राज़ील से लेकर हॉन्गकॉन्ग, नॉर्वे, क्यूबा, यमन यहां तक कि फ़िलस्तीन जैसे देशों के नागरिक भी शामिल था लेकिन वनकॉइन में धड़ाधड़ निवेश कर रहे लोगों को एक बहुत ज़रूरी बात पता नहीं थी.
कुछ लोग काफ़ी समय से ऐसी मुद्रा विकिसत करने की कोशिश कर रहे थे, जो किसी सरकार की पाबंदी से परे हो. लेकिन ये कोशिश हमेशा नाकाम हो जाती थी क्योंकि लोग ऐसी करेंसी पर विश्वास नहीं कर सकते थे. इसमें जालसाज़ी की संभावना भी ख़ूब थी. बिटकॉइन ने लोगों के इस डर को ख़त्म कर दिया था.
बिटकॉइन एक ख़ास तरह के डेटाबेस पर आधारित है जिसे ब्लॉकचेन कहते हैं. ये एक बड़ी सी डायरी की तरह होता है. एक ब्लॉकचेन उसके मालिक के पास होता है लेकिन इससे अलग इस ब्लॉकचेन की कई कॉपी होती हैं.
हर मर्तबा जब भी किसी और को एक भी बिटकॉइन भेजा जाता है तो इस का लेखा-जोखा सभी बिटकॉइन मालिकों के पास मौजूद बिटकॉइन रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो जाता है.
इस रिकॉर्ड में कोई भी किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर सकता. इस ब्लॉकचेन का मालिक भी नहीं. यहां तक कि इस रिकॉर्ड बुक को तैयार करने वाला भी इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकता.
इसके पीछे जटिल गणित काम करता है, जिसे समझना हर किसी के बस की बात नहीं लेकिन इसका ये मतलब हरगिज़ नहीं कि ब्लॉकचेन की कॉपी नहीं हो सकती, या इसे हैक नहीं किया जा सकता. या फिर इनका दो बार इस्तेमाल नहीं हो सकता.
बहरहाल, कारोबार की दुनिया में बिटकॉइन एक तरह की क्रांतिकारी डिजिटल करेंसी थी, जिसमें तमाम बैंकों और राष्ट्रीय मुद्रा को पीछे छोड़ने की क़ुव्वत थी.
ये ऐसी करेंसी थी जो निवेशकों को फ़ोन पर ही बैंकिंग की सुविधा देती थी. यानी बिटकॉइन की आमद से डिजिटल करेंसी का माहौल साज़गार था. लिहाज़ा डॉ. रुजा ने मौक़ा भुनाने का मन बना लिया और लोगों को सपने बेचने का काम शुरू कर दिया.
रुजा की कंपनी को तलाश थी तकनीक में माहिर एक ऐसे शख़्स की, जो उनके लिए ब्लॉकचेन तैयार कर सके. और उनकी ये तलाश ख़त्म हुई ब्योर्न बियर्क पर. अक्टूबर 2016 में ब्योर्न बियर्क के पास एक फ़ोन आया. फ़ोन करने वाले ने इन्हें नौकरी की पेशकश की.
इस ऑफ़र में बियर्क को रहने के लिए घर, कार और सालाना ढाई लाख पौंड की तनख्वाह का प्रस्ताव दिया गया. फ़ोन करने वाले ने अपनी कंपनी के बारे में बताया कि ये पूर्वी यूरोपीय देश बुल्गारिया की एक क्रिप्टोकरेंसी स्टार्ट-अप है और कंपनी को एक तजुर्बेकार टेक्निकल चीफ़ की ज़रूरत है.
ब्योर्न बियर्क उस नौकरी की पेशकश करने वाले से हुई गुफ़्तगू याद करते हुए कहते हैं कि, ‘मैं सोच में पड़ गया कि कंपनी में मेरा काम क्या होगा.’उन्होंने पूछा भी कि मुझे काम क्या करना होगा.जवाब मिला कि कंपनी के पास अभी कोई ब्लॉकचेन नहींहै . फ़िलहाल आप को कंपनी के लिएये ब्लॉकचेन तैयार करनी है.
बियर्क ने कहा कि मुझे तो बताया गया था कि ये एक क्रिप्टोकरेंसी कंपनी है, तो जवाब दिया गया कि बिल्कुल ये एक क्रिप्टोकरेंसी कंपनी है और पिछले कुछ ही वक़्त से काम कर रही है, लेकिन इनके पास ब्लॉकचेन नहीं है लिहाज़ा कंपनी के लिए एक ब्लॉकचेन तैयार करनी है. तब ब्योर्न बियर्क ने कंपनी का नाम पूछा. इस कंपनी का नाम था वनकॉइन. ब्योर्न बियर्क ने नौकरी की ये पेशकश ठुकरा दी.
जेन मैकएडम का टाइकून पैकेज
ये कुछ महीने पहले की बात है, जब जेन मेकएडम के एक दोस्त ने उन्हें एक ऐसे मौक़े के बारे में बताया जिसे गंवाया नहीं जा सकता था. ग्लास्गो की रहने वाली जेन ने अपना कंप्यूटर ऑन किया और एक लिंक पर क्लिक करके वनकॉइन के वेबिनार में शरीक़ हो गईं.
अगले एक घंटे या उससे थोड़ा ज्यादा समय तक वो इस क्रिप्टोकरेंसी के बारे में लोगों के पुरजोश अनुभव सुनती रहीं. सभी लोग बहुत ख़ुश थे. बता रहे थे कि कैसे उनकी क़िस्मत बदल सकती है. वो जिस ऑनलाइन सेमिनार को सुन रही थीं, उसमें उन्हें बताया गया कि वो बहुत ख़ुशक़िस्मत हैं कि इस वक़्त वो इस वेबिनार से जुड़ी हैं.
ऑनलाइन सेमिनार में डॉक्टर रुजा के बारे में ज़बरदस्त तरीक़े से बताया जा रहा था. रुजा ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी. उन्होंने कोन्सतान्ज़ से पीएचडी की डिग्री हासिल की.
इस में रुजा के मैकिन्से एंड कंपनी में मैनेजमेंट सलाहकार के तौर पर काम करने का हवाला भी दिया गया. सबसे ज़बरदस्त था जानी-मानीप त्रिका दी इकॉनोमिस्ट द्वारा आयोजित कॉन्फ़्रेंस में डॉ. रुजा की तक़रीर. इस तक़रीर को ऑनलाइन सेमिनार में दिखाया गया था.
जेन को डॉ रुजा के सशक्त महिला के किरदार ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया. यहां तक कि ऑनलाइन सेमिनार ख़त्म होने तक जेन ने वनकॉइन में एक हज़ार यूरो निवेश करने का फ़ैसला कर लिया. ये बहुत ही आसान था. आप एक वनकॉइन टोकन ख़रीदिए और फिर ये आगे और वनकॉइन सिक्के तैयार करेगा जो आपके अकाउंट में आ जाएंगे.
उन्हें बताया गया कि एक दिन ऐसा आएगा जब जेन अपने ख़रीदे गए वनकॉइन को यूरो और पाउंड में तब्दील कर सकती हैं. जेन को लगा कि ये तो पैसे कमाने का शानदार और आसान तरीक़ा है. जेन मैकएडम को लगा कि इस शानदार क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए शायद एक हज़ार यूरो कम हैं. ये तो ज़िंदगी में इंक़लाब लाने वाला मौक़ा है.
उनके उत्साह को देख कर प्रमोटर ने बताया कि सबसे छोटा पैकेज 140 यूरो का था. लेकिन, उन के पास तो एक लाख 18 हज़ार यूरो तक के पैकेज भी हैं. यानी छप्परफाड़ मुनाफ़ा. एक हफ़्ते बाद ही जेन मैकएडम ने पांच हज़ार यूरो का टाइकून पैकेज ख़रीद लिया. जल्द ही ऐसा समय भी आया जब जेन ने अपने दस हज़ार यूरो तो वनकॉइन में लगा ही दिए. बल्कि अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के भी क़रीब ढाई लाख यूरो का निवेश इस नई क्रिप्टोकरेंसी में कर दिया था.
वो बार-बार वनकॉइन की वेबसाइट देखा करती थीं और जब उन के सिक्कों की क़ीमत बढ़े तो ज़बरदस्त ख़ुशी महसूस होती थी. जल्द ही जेन के वनकॉइन की क़ीमत एक लाख पाउंड पहुंच चुकी थी. यानी उन के निवेश से दस गुना ज़्यादा रिटर्न. इस रक़म को देख कर जेन छुट्टियों पर जाने और ख़ूब शॉपिंग करने की योजनाएं बनाने लगीं लेकिन उसी साल के आख़िर में एक अजनबी ने इंटरनेट के माध्यम से जेन मैकएडम से संपर्क किया. उस ने कहा कि वो लोगों की मदद करना चाहता है. उस ने जेन से ये भी कहा कि उस ने वनकॉइन के बारे में गहराई से पड़ताल की है और अब उन लोगों से बात करना चाहता है, जिन्होंने वनकॉइन में निवेश किया है.
जेन ने बड़ी अनिच्छा से उस व्यक्ति से स्काइप के ज़रिए बात करने के लिए हामी भर दी. ये बातचीत एक दूसरे पर चिल्लाने के मुक़ाबले में तब्दील हो गई लेकिन उस अजनबी से बातचीत ने जेन की ज़िंदगी को एक नई दिशा में मोड़ दिया.
उस अजनबी का नाम था टिमोथी करी. वो बिटकॉइन में दिलचस्पी रखने वाला शख़्स था, जो क्रिप्टोकरेंसी की जम कर वक़ालत करता था. उस ने सोचा कि वनकॉइन की वजह से क्रिप्टोकरेंसी बदनाम हो जाएंगी इसीलिए उस ने जेन मैकएडम को दो टूक शब्दों में बता दिया कि वनकॉइन असल में एक घोटाला है. उस के शब्दों में कहें तो ‘ये दुनिया (गाली) का सब से बड़ा घोटाला है.’ उस ने ये भी कहा कि वो ये बात साबित भी कर सकता है. तो, जेन ने तुर्शी से जवाब दिया कि, ‘ठीक है, फिर तुम मुझे साबित कर के दिखाओ.’
अगले कुछ हफ़्तों तक टिमोथी करी ने जेन को डिजिटल करेंसी के बारे में ढेर सारी जानकारियां भेजी. उन्हें बताया कि क्रिप्टोकरेंसी कैसे काम करती है. टिमोथी ने इस संबंध में जेन को कई लिंक, लेख, यू-ट्यूब वीडियो और दूसरी सामग्री भेजी. टिमोथी ने जेन का संपर्क क्रिप्टोकरेंसी के एक्सपर्ट ब्योर्न बियर्क से कराया. ब्योर्न, ब्लॉकचेन के डेवेलपर हैं. उन्होंने ही कहा था कि वनकॉइन के पास कोई ब्लॉकचेन नहीं है.
जेन मैकएडम को टिमोथी की भेजी सारी जानकारी पढ़ने-सुनने और समझने में क़रीब तीन महीने का समय लग गया. लेकिन, अब उस के ज़हन में सवाल उठने लगे थे. उस ने अपने वनकॉइन ग्रुप के लीडर से पूछना शुरू कर दिया था कि क्या कोई ब्लॉकचेन है, या फिर नहीं है. शुरू में तो उसे ये बताया गया कि उसे इस बारे में जानने की ज़रूरत ही नहीं है. लेकिन, जब जेन ने ज़ोर देकर ये बात जाननी चाही, तो उसे आख़िर में हक़ीक़त का पता चल ही गया. उसे ये सच अप्रैल 2017 में एक वॉयसमेल के ज़रिए पता चली.
‘ठीक है…जेन. वो ये जानकारी लोगों को नहीं देना चाहते क्योंकि इस बात का डर है कि जहां पर ब्लॉकचेन को रखा गया है, उसे कोई ख़तरा न हो. इस के अलावा, एक एप्लिकेशन के तौर पर इसे किसी सर्वर की ज़रूरत नहीं है. तो, हमारी ब्लॉकचेन तकनीक असल में एक एसक्यूएल सर्वर है, जिसका अपना डेटाबेस है.’
लेकिन इस पड़ाव तक पहुंचते-पहुंचते टिमोथी और ब्योर्न बियर्क की मदद से, जेन को ये बात मालूम थी कि कोई मानक एसक्यूएल सर्वर डेटाबेस के आधार पर असल में कोई क्रिप्टोकरेंसी विकसित नहीं की जा सकती. क्योंकि इस डेटाबेस का मैनेजर कभी भी इस के भीतर जा कर बदलाव कर सकता है.
जेन बताती हैं कि ‘मैंने सोचा कि ये क्या? और मेरे पांव सुन्न हो गए. मैं ज़मीन पर गिर पड़ी.’
इन सभी बातों का एक ही मतलब था और वो ये कि वनकॉइन की वेबसाइट पर बढ़ रहे नंबरों का कोई मतलब नहीं था. वो केवल आंकड़े भर थे जिन्हें वनकॉइन का कोई कर्मचारी कहीं दूर बैठ कर कंप्यूटर पर टाइप कर रहा था. जेन और उन के दोस्तों, परिजनों ने अपनी पैसे की फिक्र को दूर करने के बजाय, अपनी सारी रक़म, यानी क़रीब ढाई लाख यूरो वनकॉइन में झोंक दिए थे.
डॉक्टर रुजा लापता हो गईं
हालांकि जेन मैकएडम ने अब हक़ीक़त को जान लिया था, लेकिन, अभी भी वनकॉइन के ज़्यादातर निवेशकों को ये कड़वा सच नहीं मालूम था. अभी भी वनकॉइन की मार्केटिंग के लिए डॉक्टर रुजा पूरी दुनिया की सैर कर रही थीं और अपने ख़्वाब को पूरी दुनिया को बेच रही थीं. मकाऊ से लेकर दुबई और सिंगापुर तक. उन्हें देखने के लिए बड़े-बड़े स्टेडियम भर जाते थे. और उन का आकर्षण ऐसा था कि नए-नए निवेशक वनकॉइन में पैसे लगाने को राज़ी हो जाते थे.
अभी भी वनकॉइन का तेज़ी से विस्तार हो रहा था. और, डॉक्टर रुजा अपनी इस कमाई को नई नई संपत्तियां ख़रीदने में लगा रही थीं. उन्होंने बुल्गारिया की राजधानी सोफ़िया और काला सागर के किनारे स्थित शहर सोज़ोपोल में लाखों डॉलर की संपत्ति ख़रीदी. अपने ख़ाली वक़्त में डॉक्टर रुजा अपनी महंगी और आलीशान याट, द डेविना में बड़ी-बड़ी दावतें देती थीं. जुलाई 2017 में हुई ऐसी ही एक पार्टी में अमरीकी पॉप स्टार बेब रेक्चा ने भी एक निजी कार्यक्रम पेश किया था.
बेहद कामयाब आवरण होने के बावजूद, डॉक्टर रुजा के वनकॉइन के साम्राज्य में मुश्किलों का तूफ़ान उमड़ने लगा था. वनकॉइन के सिक्कों को असली नक़दी में बदलने के लिए एक एक्सचेंज खोलने का वादा किया गया था. लेकिन, उस में बार-बार देर हो रही थी. और अब निवेशकों की चिंताएं बढ़ती ही जा रही थीं.
यूरोपीय वनकॉइन निवेशकों की इन चिंताओं को पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में दूर किया जाना था. जहां डॉक्टर रुजा को अक्टूबर 2017 में एक कार्यक्रम में आना था.
लेकिन, जब वो दिन आया, तो वक़्त की बेहद पाबंद डॉक्टर रुजा आईं ही नहीं.
इस सम्मेलन में शामिल हुए एक प्रतिनिधि ने बताया कि, ‘वो रास्ते में हैं. किसी को नहीं पता था कि वो वहां नहीं है.’ बार-बार की जा रही फ़ोन कॉल और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया जा रहा था. सोफ़िया स्थित वनकॉइन के मुख्यालय, जहां पर उन की मौजूदगी लोगों में एक ख़ौफ़ पैदा करती थी, उन्हें भी नहीं पता था कि रुजा कहां हैं. डॉक्टर रुजा ग़ायब हो गई थीं. कुछ लोगों को ये डर था कि या तो उन्हें बैंकों ने अगवा कर लिया है या फिर रुजा को मार दिया गया है. उन्हें बताया गया था कि क्रिप्टोकरेंसी की इस क्रांति से बैंकों को ही सब से ज़्यादा ख़तरा है.
जब कि हक़ीक़त ये थी कि डॉक्टर रुजा अंडरग्राउंड हो गई थीं. पिछले साल की शुरुआत में अदालत में पेश एफ़बीआई के दस्तावेज़ों के मुताबिक़, लिस्बन के सम्मेलन से दूर रहने के महज़ दो हफ़्तों बाद ही डॉक्टर रुजा ने रियान एयर की एक फ्लाइट पकड़ी थी और वो सोफ़िया से एथेंस के लिए रवाना हुई थी. इस के बाद से उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. वो आख़िरी बार था जब किसी ने रुजा को देखा था या फिर उन के बारे में सुना था.
मल्टीलेवल मार्केटिंग का सब से कामयाब उत्पाद
इगोर अल्बर्ट्स ने सब कुछ काला और सुनहरा पहना हुआ है. काले और सुनहरे जूते, काले और सोने के रंग वाला सूट, काली सुनहरी कमीज़, काला और सुनहरा चश्मा और उन की उंगली में एक मोटी काली और सुनहरे रंग की अंगूठी भी है. इगोर के बदन पर जो कुछ भी है, वो डोल्चे और गबाना का ही है.
वो कहते हैं कि, ‘जब आप मेरे कपड़ों को देखते हैं, तो उन में आप को अनुशासन दिखता है.’ उन की पत्नी एंड्रिया सिम्बाला सहमति में सिर हिलाती हैं. वो ये भी बताती हैं कि जब इगोर सो कर उठते हैं, तो अगर उन्होंने गुलाबी अंडरवियर पहना, तो फिर वो सब कुछ गुलाबी ही पहनते हैं. फिर चाहे वो कमीज़ हो, पतलून हो या फिर जैकेट
वो, नीदरलैंड के एम्सटर्डम के बाहरी हिस्से में स्थित बेहद पॉश इलाक़े में एक विशाल मकान में रहते हैं. उन की कोठी के सामने 10 फुट ऊंचा लोहे का फाटक लगा है. इस पर इगोर और उनकी पत्नी एंड्रिया का नाम खुदा हुआ है. साथ ही में लिखा है, ‘पता नहीं कौन सा ख़्वाब पूरा हो.’ कोठी के बाहर महंगी कारें मासेराती और एस्टन मार्टिन खड़ी हुई हैं.
इगोर अल्बर्ट्स की परवरिश एक ग़रीब मुहल्ले में हुई थी. उस के बाद वो नेटवर्क मार्केटिंग या मल्टीलेवल मार्केटिंग (MLM) के कारोबार से जुड़ गए. इस की मदद से वो ख़ूब कमाई करने लगे. ढेर सारे पैसे कमाए. इगोर का दावा है कि उन्होंने पिछले तीस बरस में मल्टी लेवल मार्केटिंग से क़रीब 10 करोड़ यूरो कमाए हैं.
मल्टीलेवल मार्केटिंग ऐसे काम करती है. मैं लोगों को विटामिन की गोलियां सीधे लोगों को बेचने के लिए 100 पाउंड की रक़म अदा करता हूं. मैं गोलियों का एक डिब्बा अपने दोस्तों जॉर्जिया और फिल को बेचता हूं. इस बिक्री से मुझे थोड़े पैसे मिलते हैं. फिर मैं जॉर्जिया और फिल को भी इस मार्केटिंग की चेनमें शामिल कर लेता हूं. फिर वो जो भी बेचते हैं, उस का एक हिस्सा मुझे मिलता है. उन्हें मेरी टीम की डाउनलाइन कहते हैं. फिल और जॉर्जिया भी दो-दो और लोगों को अपने साथ जोड़ते हैं. फिर ये चारों भी अपने साथ दो-दो और लोगों को जोड़ लेते हैं. और ये कड़ी बढ़ती जाती है. बहुत जल्द ये सिलसिला इतना बड़ा हो जाता है कि 25 कड़ियों बाद ब्रिटेन का कमोबेश हर नागरिक विटामिन की गोलियां बेचता नज़र आएगा. और, चूंकि ये सिलसिला या डाउनलाइन मैंने शुरू किया था, तो इन सभी की बिक्री में से एक हिस्सा मुझे मिलेगा.
मल्टीलेवल मार्केटिंग अवैध नहीं है. एमवे और हर्बालाइफ जैसी बड़ी कंपनियां इसी कारोबारी नुस्खे से अपने कारोबार का विस्तार करती हैं. लेकिन मल्टीलेवल मार्केटिंग विवादास्पद है. क्योंकि, आम-तौर पर बहुत कम लोग ही सारा मुनाफ़ा उड़ा ले जाते हैं. मल्टीलेवल मार्केटिंग मुनाफ़े के बड़े-बड़े वादे और ख़ूब बिक्री के दबाव के लिए भी बदनाम है. जब बेचने के लिए कोई क़ीमती चीज़ नहीं होती, और सारा पैसा केवल दूसरे लोगों को इस कड़ी से जोड़ कर ही कमाया जाता है, तो ये अवैध हो जाता है. तब इसे लोग पिरामिड योजना के नाम से बुलाते हैं.
मई 2015 में जब इगोर अल्बर्ट्स एक कामयाब एमएलएम विक्रेता के तौर पर स्थापित हो चुके थे, तब उन्हें दुबई में वनकॉइन के एक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया. दुबई में इगोर की मुलाक़ात बहुत से लोगों से हुई. ज़ाहिर है ये सभी लोग इस नई डिजिटल करेंसी से ख़ूब धन कमाने के इरादे से आए थे. वहां पर, डॉक्टर रुजा ने भी इगोर पर गहरा असर छोड़ा. वो राजकुमारी के लिबास में कार्यक्रम में शामिल हुई थीं. उन्होंने लोगों को एक वित्तीय क्रांति के सपने को बेचा.
दुबई से इगोर एक नए मिशन के इरादे के साथ लौटे. उन्होंने अपनी सेल्स टीम को निर्देश दिया कि वो अभी जो भी कर रहे हैं उसे रोक दें और अब केवल वनकॉइन बेचना शुरू कर दें. इगोर बताते हैं कि, ‘हमने टीमों को इकट्ठा किया और दीवानों की तरह काम करने लगे. पहले महीने में हम ने शून्य से 90 हज़ार यूरो की रक़म बनाई. ज़बरदस्त!’
डॉक्टर रुजा की काबिलियत इस बात में थी कि उन्होंने बड़ी-बड़ी डाउनलाइन या टीमों वाले मल्टीलेवल मार्केटिंग के कारोबारियों को पकड़ा. क्योंकि उन के ज़रिए रुजा के इस फ़र्ज़ी सिक्के की मार्केटिंग करना और उस को बेच पाना बहुत आसान था. ये एक ऐसी योजना थी, जिसके बारे में एफबीआई का दावा है कि रुजा इसे कुछ ख़ास लोगों के बीच में, ‘वॉल स्ट्रीट की चुड़ैल का एमएलएम से गठजोड़’ कहती थीं. वनकॉइन की कामयाबी का यही राज था. ये केवल एक फ़र्ज़ी क्रिप्टोकरेंसी भर नहीं थी. ये पुराने तौर-तरीक़े वाली पिरामिड योजना थी. इस का उत्पाद था वनकॉइन का फ़र्ज़ी डिजिटल सिक्का. अब इस में कोई चौंकाने वाली बात नहीं कि इस की शोहरत जंगल की आग की तरह फैली.
बहुत जल्द ही इगोर अल्बर्ट्स वनकॉइन बेच कर हर महीने दस लाख यूरो से भी ज़्यादा कमाई कर रहे थे. जल्द ही ये नेटवर्क मार्केटिंग का सब से बड़ा उत्पाद बन गया. इगोर अल्बर्ट्स कहते हैं कि, ‘कोई और कंपनी तो इस के आस-पास भी नहीं पहुंच सकी.’
इगोर अल्बर्ट्स और एंड्रिया सिम्बाला ने वनकॉइन बेच कर जो कमाई की, इस का 60 फ़ीसद हिस्सा नक़द में भुगतान किया गया. (आख़िरी दिनों में ये रक़म हर महीने क़रीब बीस लाख यूरो के आस-पास थी.) और बाक़ी का भुगतान उन्हें वनकॉइन के तौर पर किया जा रहा था. इस धंधे में शामिल बाक़ी लोगों की तरह इगोर और एंड्रिया को भी इस बात का यक़ीन था कि वो ख़ूब कमाई कर रहे हैं.
इगोर बताते हैं कि, ‘मैं ने हिसाब लगाया कि इस धरती का सब से अमीर इंसान बनने के लिए मुझे कितने सिक्के चाहिए. मैं ने एंड्रिया से कहा कि हमें 10 करोड़ सिक्के जुटाने होंगे. क्योंकि जब ये 10 करोड़ सिक्के, 10 करोड़ यूरो में तब्दील होंगे, तो ये हमें बिल गेट्स से भी धनी बना देंगे. यही गणित है. ये बहुत आसान है.’
मल्टीलेवल मार्केटिंग के नेटवर्क का मिज़ाज ऐसा होता है कि जब लोग ऐसे इंसानों को इस नेटवर्क के साथ जोड़ते हैं, तो उनके प्रति एक जवाबदेही का एहसास होता है. किसी पर भी आरोप लगाना आसान नहीं होता. और अगर विक्रेताओं ने किसी योजना में ख़ुद का पैसा लगाया हो, तो वो भी इस के शिकार हो जाते हैं.
लिस्बन के कार्यक्रम से डॉक्टर रुजा के ग़ैरहाज़िर रहने के बाद, एक समय ऐसा आया जब जेन मैकएडम की ही तरह इगोर ने भी कंपनी से ब्लॉकचेन की मौजूदगी का सबूत मांगा. उन्हें भी कोई सबूत मुहैया नहीं कराया गया. और दिसंबर 2017 में उन्होंने वनकॉइन का साथ छोड़ दिया.
मैंने इगोर से पूछा कि क्या वो ख़ुद को मुजरिम समझते हैं. क्योंकि उन्होंने इतने सारे लोगों को ऐसे सिक्के में निवेश करने के लिए राज़ी किया, जो असल में था ही नहीं. और इस के ज़रिए उन्होंने ख़ूब पैसा भी कमाया.
इगोर इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि, ‘मैं ने ख़ुद को दोषी तो नहीं माना. मगर मुझे एक ज़िम्मेदारी का एहसास ज़रूर होता है. आप किसी को इस बात के लिए दोषी नहीं ठहरा सकते कि उस ने किसी बात पर यक़ीन किया. मुझे इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि ये झूठ हो सकता है. मुझे तो ये भी नहीं पता था कि ब्लॉकचेन क्या होती है…मेरे ज़हन में क्या शक पैदा हो सकता था?’
इगोर इशारा करते हैं कि उन्होंने ख़ुद भी वनकॉइन ख़रीदने में लाखों ख़र्च किए. ये शायद उनके जानने वालों से में सब से ज़्यादा रक़म थी.
इस के उलट, जेन मैकएडम कहती हैं कि उनके दिल पर बहुत बड़ा बोझ है. मैं ने उन से पूछा कि उन्होंने वनकॉइन बेच कर कितने कमाए, तो वो कहती हैं कि तीन हज़ार यूरो ही थे. इन में से 1800 यूरो उन्हें नक़द मिले. इस रक़म को भी उन्होंने वनकॉइन ख़रीदने में ख़र्च कर दिया.
जेन को उन लोगों के लिए पछतावा है, जिन्हें उन्होंने वनकॉइन से रूबरू कराया. वो कहती हैं कि उन्हें सब से ज़्यादा अफ़सोस अपने मरहूम पिता के लिए है. उन्होंने सारी उम्र बड़े मुश्किल हालात में मेहनत से काम किया और उन्हें पैसे दिए. लेकिन, जेन ने ये पैसे यूं ही बर्बाद कर दिए.
पैसे का पीछा करना
इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि वनकॉइन में लोगों ने कितनी रक़म लगाई थी. बीबीसी को लीक हुए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि अगस्त 2014 से मार्च 2017 के बीच इस में 4 अरब यूरो का निवेश किया गया था. मुझे एक से ज़्यादा लोगों ने ये भी बताया कि वनकॉइन में 15 अरब यूरो से ज़्यादा का निवेश भी हो सकता है.
पत्रकारिता में एक कहावत मशहूर है-पैसे का पीछा करो. तो मैं द मिसिंग क्रिप्टोक्वीन पॉडकास्ट की प्रोड्यूसर जॉर्जिया कैट के साथ ओलिवर बुलो से मिलने गया. ओलिवर ख़ुद को मनीलैंड का विशेषज्ञ कहते हैं. मनीलैंड यानी वो काली दुनिया जहां अपराधी और बेहद अमीर लोग अपनी संपत्ति छुपाते हैं. ओलिवर कहते हैं कि समस्या ये है कि पैसे का पीछा करना जितना सुनने में आसान लगता है, उतना असल में है नहीं. क्योंकि अपराधी अपनी कंपनियों और बैंक खातों की ऐसी संरचना बनाते हैं कि कि उन का धन इस मकड़जाल में गुम हो जाता है. ब्रिटेन में हे-ऑन-वाय के पास अपने घर के बागीचे में बैठ कर ओलिवर हमें बताते हैं कि ‘वो रक़म मौजूद तो होती है. आप उन्हें आलीशान मकान और शानदार याट ख़रीदने में ख़र्च कर सकते हैं लेकिन अगर कोई उस पैसे को तलाशने की कोशिश करता है तो वो अदृश्य हो जाती है. फिर चाहे वो कोई पत्रकार हो या फिर पुलिस.’

-BBC

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »