Bhaagamathie Trailer में अनुष्का शेट्टी का नया अवतार रोंगटे खड़े कर देने वाला है

नई दिल्ली। Bhaagamathie Trailer रिलीज हो गया. इसमें अनुष्का शेट्टी का नया अवतार रोंगटे खड़े कर देने वाला है बाहुबली’ सीरीज से फिल्मी दुनिया में अपना खास पहचान कायम करने वाली अनुष्का शेट्टी की नई फिल्म ‘भागमती’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है.

बाहुबली’ सीरीज से फिल्मी दुनिया में अपना खास पहचान कायम करने वाली अनुष्का शेट्टी की नई फिल्म ‘भागमती’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है. बाहुबली के बाद अनुष्का की यह पहली फिल्म है. ‘भागमती’ तेलुगु फिल्म है और इसका ट्रेलर रिलीज हो गया है.

ट्रेलर वाकई जबरदस्त है और अनुष्का शेट्टी ने सिद्ध कर दिया है कि एक्टिंग के मामले में उनका कोई सानी नहीं है. वे फिल्म में आईएएस ऑफिसर के किरदार में हैं. उन्हें जेल में भी दिखाया गया है और उन पर प्रेतात्मा का साया भी दिखाया गया है. फिल्म को दिलचस्प बनाने वाला हर मसाला उसमें मौजूद है.

बाहुबली में देवसेना के किरदार में भी अनुष्का शेट्टी ने दमदार एक्टिंग की थी और उन्होंने बाहुबली के दूसरे पार्ट में जबरदस्त एक्शन को अंजाम भी दिया था.

यही नहीं, ‘बाहुबली-द कनक्लूजन’ की अपार सफलता के साथ प्रभास (37) और अनुष्का शेट्टी (35) की ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन केमिस्ट्री ने भी जमकर सुर्खियां बटोरी.

Bhaagamathie  को जी. अशोक ने डायरेक्ट किया है, फिल्म में उन्नी मुकुंदन और आदी पिनिसेट्टी लीड में हैं. मलयालम एक्टर जयराम भी हैं. फिल्म तेलुगु, तमिल और मलयालम में बनी है.

कौन थी Bhaagamathie, क्या था हैदराबाद से उसका रिश्ता ?

मूसी नदी के तट पर बसे निजामों के शहर पुराने हैदराबाद शहर की तंग गालियों मे आज तकरीबन 600 साल बाद भी एक अनूठी प्रेम कहानी की मिसालें लोगों की जुबान पर हैं। ये प्रेम कहानी जोधा-अकबर तथा शाहजहां और मुमताज़ महल की प्रेम कहानियों से भी पुरानी है। धर्म और इलाकों के बंधनों से अलग इस प्रेम कहानी का क्लाइमेक्स ही बाद मे चल कर एक विशाल नगर की स्थापना का कारण बनता है।

गोलकुंडा की कुतुबशाही

दरअसल, पंद्रहवीं-सोलहवीं शताब्दी के दौरान दक्कन का पठार और आन्ध्र की भूमि बहमनी सुल्तान अलाउद्दीन हसन बहमन शाह के अधीन थी, जो प्राचीन विजयनगरम साम्राज्य के समान ही वैभवशाली और ताकतवर सल्तनतों के रूप मे पहचानी जाती थी। हालांकि, 1518 ई० आते-आते बहमनी साम्राज्‍य पांच टुकड़ों मे विभाजित हो गया। ये पांचो हिस्से यानी – अहमदनगर की निजामशाही, गोलकुंडा की कुतुबशाही, बीदर की बारीदशाही, बेरार की ईमादशाही और बीजापुर की आदिलशाही के रूप मे चर्चित हुई। इन्हीं मे से एक गोलकुंडा की कुतुबशाही ने मूसी नदी के पश्चिमी तरफ स्थित प्राचीन काकतीय वंश के किले गोलकुंडा का पुनर्निर्माण कराया, जिसका नाम उसने मुहम्मदनगर रखा।

कुली शाह और भागमती

तकरीबन 80 सालों तक गोलकुंडा से मुहम्मदनगर का शासन संभालने वाले कुतुबशाही वंश का अगला वारिस 14 वर्षीय सुल्तान मोहम्मद कुतुब कुली शाह बना, जिसे मूसी नदी के दूसरी तरफ चिचलम नामक गांव (वर्तमान मे चारमीनार के समीप) में रहने वाली एक बला की खूबसूरत हिन्दू नर्तकी भागमती से इश्क़ हो गया। इसके बाद शुरू हुई आज के आधुनिक हैदराबाद की सबसे पहली प्रेम गाथा। सुल्तान और भागमती का प्यार वक्त के साथ परवान चढ़ने लगा। फिर क्या था, सुल्तान अब हर शाम चिचलम में अपनी प्रेयसी भागमती से मिलने पहुंचने लगा।

तेज बारिश वाली वो शाम…

कहते हैं एक बार सुल्तान भागमती से मिलने चिचलम के लिए गोलकुंडा किले से रवाना हुआ, लेकिन उस शाम शुरू हुई मूसलाधार बारिश से मूसी नदी पूरे उफान पर थी। नदी में वेग इतना था की उसके किनारों पर बसे कई मकान नदी की धारा में बह गए। बावजूद इसके, सुल्तान अपनी खूबसूरत प्रेयसी से मिलने को बेकरार था। अंगरक्षकों और सलाहकारों की तमाम आपत्तियों के बावजूद नाव के बिना भी सुल्तान नदी पार करने की जिद पर अड़ गया।

हद तो तब हो गयी जब वह मूसी की तेज धार में बगैर नाव के और अपनी जान की परवाह किए बगैर ही घोड़े के साथ कूद पड़ा, जिसे देख कर उसके अंगरक्षक और सलाहकारों मे चीख-पुकार मच गयी। मगर उस शाम जैसे सच्चे प्रेम की हिफाजत करने आसमान से फरिश्ते उतर आए थे और बिना किसी नुकसान के सुल्तान और उसका घोडा नदी के दूसरे किनारे पर पहुंच चुके थे।

बताते हैं की, अपने बेटे के दिल में किसी लड़की के लिए बेशुमार मोहब्बत देख कर कुली शाह के पिता इब्राहिम कुली कुतुब शाह ने मूसी नदी पर एक पुल का निर्माण कराया, जिसे आज भी पुराने पुल के नाम से जाना जाता है।

भागनगरम और हैदराबाद

कुछ समय बाद ही कुलीशाह ने शहर का नाम बादल कर अपनी प्रेयसी भागमती के नाम पर भागनगरम रखा। हालांकि, सन 1589 ई. में कुली शाह से निकाह के बाद भागमती ने इस्लाम कबूल कर लिया और तब उसका नाम हैदरमहल रखा गया। जिसके बाद कुतुब कुली शाह ने शहर का नाम दुबारा से बदल कर अपनी प्रिय रानी हैदर महल के नाम पर हैदराबाद रखा।

गुम हो गयी भागमती

सन 1612 ई. में सुल्तान कुतुब कुली शाह के इंतकाल के चार साल बाद ही भागमती भी दुनियां से रुखसत हो गयी। कहते हैं सल्तनत का पेशवा मीर मोमिन कभी भी इस हिन्दू-मुस्लिम प्रेम गाथा को स्वीकारा नहीं कर सका। यही कारण था की उसने भागमती से जुड़े सभी ऐतिहासिक साक्ष्यों को मिटा दिया, साथ ही उसने अपने जीवन काल में भागमती का मकबरा भी बनाने नहीं दिया।

क्या कहते हैं जानकार 

भारतीय इस्लामिक कलाओं के जानकार जियाउद्दीन अहमद शाकिब के अनुसार तत्कालीन मुग़ल स्रोतों जैसे, अबुल फजल, फरिश्ता और बदायुनी ने भी दक्कन में किसी भागमती के नाम का उल्लेख किया है। बक़ौल शाकिब, अभिलेखीय स्रोतों के अनुसार तत्कालीन चिचलम (जो की आज के याकूतपुरा मुहल्ले के आस-पास का इलाका था) का नाम परिवर्तित कर के भागनगर रखा गया था।

इतिहासकार सलमा अहमद फारुकी के अनुसार, बर्नियर, तवर्नियर सहित कई विदेशी यात्रियों ने भागमती और मोहम्मद कुली की प्रेम कहानी की चर्चा की है।

‘Bhaagamathie का जिक्र विदेशी यात्रियों ने भी अपने-अपने यात्रावृतांत में किया है।’

– एजेंसी