एक और खुलासा: Facebook ने 60 मोबाइल कंपनियों से भी की थी डेटा शेयरिंग के लिए डील

वॉशिंगटन। डेटा लीक को लेकर विवादों में रहा Facebook एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल, दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनने की महत्वाकांक्षा के साथ फेसबुक ने फोन और अन्य डिवाइस बनाने वाली कंपनियों से यूजर्स की निजी जानकारियों तक पहुंच देने का बड़ा समझौता किया था।
चौंकाने वाली बात यह है कि डील कुछ इस तरह की थी जिसमें यूजर्स ही नहीं उनके दोस्तों की निजी जानकारियों तक इन कंपनियों की पहुंच हो गई थी।
न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक Facebook ने कम से कम 60 डिवाइस मेकर्स के साथ डेटा शेयरिंग का समझौता किया था। इनमें एप्पल, ऐमजॉन, ब्लैकबेरी, माइक्रोसॉफ्ट और सैमसंग भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन्स पर Facebook ऐप्स के इस्तेमाल की शुरुआत से ही इस तरह की डील हो गई थी। इस डील के तहत Facebook अपनी पहुंच बढ़ाता जाएगा और फोन निर्माता कंपनियों को सोशल नेटवर्क के लोकप्रिय फीचर्स जैसे मेसेजिंग, ‘लाइक’ बटन्स और अड्रेस बुक्स आदि की जानकारी मिलेगी। हालांकि कुछ समय बाद इस पार्टनरशिप्स से कंपनी की प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ने लगी। गौर करने वाली बात यह है कि फेसबुक ने बिना किसी अनुमति के यूजर्स के दोस्तों के डेटा तक पहुंच की अनुमति डिवाइस कंपनियों को दे दी थी। वह बाहरियों को डेटा शेयर नहीं करेगी, इस घोषणा के बाद भी ऐसा होता रहा।
न्यू यॉर्क टाइम्स को पता चला है कि फोन बनाने वाली कुछ कंपनियों को यूजर्स के दोस्तों की ऐसी सूचनाएं भी मिल गईं, जिसको शेयर करने की उन्होंने अनुमति नहीं दी थी। बताया जा रहा है कि पिछले अप्रैल तक इस तरह की साझेदारी जारी रही। कैम्ब्रिज एनालिटिका से डेटा शेयर करने के मामले का खुलासा होने के बाद Facebook और इसकी गतिविधियां जांच के दायरे में आ गई।
Facebook पर आरोप लगा कि करीब 5 करोड़ यूजर्स की निजी जानकारियां लीक हुईं जिसका फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के लिए काम कर रही फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका ने उठाया। आरोप हैं कि फर्म ने वोटर्स की राय को मैनिप्युलेट करने के लिए Facebook यूजर्स डेटा में सेंध लगाई।
-एजेंसी

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