अनिल शर्मा की ‘Genius’: फिल्म की स्क्रिप्ट बेहद कमज़ोर लेकिन उत्कर्ष शर्मा सफल

मुंबई। कहानी: यह कहानी एक ऐसे युवा आईआईटी ‘Genius’ की है, जो रॉ (रिसर्च ऐंड अनैलेसिस विंग) के मिशन को अपने हाथ में लेता है, लेकिन उसका दिल अपनी प्रेमिका के लिए उतना ही धड़कता है जितना देश के लिए। इसलिए उसे कुछ ऐसा करना है जिससे वह अपने देश के साथ-साथ अपनी प्रेमिका को भी बचा सके।
रिव्यू: फिल्म का हीरो वासुदेव शास्त्री (उत्कर्ष शर्मा) कभी कॉलेज का सबसे बेवकूफ लड़का बन जाता है तो कभी एक हैंडसम और चार्मिंग हीरो, जिसपर सभी फिदा हैं। वासुदेव जितनी सरलता से मंत्रोच्चारण करता है, उतनी ही सरलता से गोलियां भी दागता है। तेज रफ्तार से बढ़ते सिपाहियों के दल का वह लंगड़ाते हुए साइकिल से पीछा कर लेता है। यहां तक कि कई लोगों की जान बचाने के लिए वह रयूबिक क्यूब को मिनटों में सुलझा देता है। कहने का मतलब है कि इस फिल्म का हीरो हर काम बड़ी ही आसानी और चुटकियों में कर सकता है।
एक धमाकेदार फिल्म बनाने के लिए चक्कर में इतनी सारी चीजों को एक साथ मिक्स करके डाल दिया गया है कि उनमें से आधी चीजें अपना असर भी नहीं दिखा पातीं। कॉलेज कैंपस का रोमांस देखने में अच्छा है, लेकिन ऐसा लगता है कि जैसे उस रोमांस की आत्मा ही निकाल ली गई हो। इस फिल्म के ज़रिए इशिता चौहान ने भी डेब्यू किया है और वह फिल्म में महज ग्लैमर का तड़का लगा रही हैं। एक्प्रेशन तो नाम मात्र ही दिखते हैं।
एक सीक्रेट मिशन के इर्द-गिर्द फिल्म है और पूरा प्लॉट देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत दिखता है। रॉ एजेंट्स की टीम ऐसी है कि जब कोई मुसीबत सामने आती है, तो उसमें वह बच्चों की तरह रिऐक्ट करती है।
नेशनल सिक्योरिटी एडवाइज़र के रोल में मिथुन चक्रवर्ती जंचे हैं। फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी की धमाकेदार एंट्री है, लेकिन ‘Genius’ के तौर पर उनकी ऐक्ट कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ता।
फिल्म के फर्स्ट हाफ में कुछ बेहतरीन गाने हैं, जिन्हें खूबसूरत अंदाज़ में फिल्माया गया है और उनका म्यूजिक भी अच्छा है, लेकिन दूसरे हाफ की बात न ही की जाए तो अच्छा है।
कुल मिलाकर, ‘Genius’ कुछ खास नहीं है। न तो डायलॉग और न ही कहानी।
इस फिल्म के ज़रिए डायरेक्टर अनिल शर्मा के बेटे उत्कर्ष शर्मा ने ऐक्टिंग की दुनिया में कदम रखे हैं और अनिल शर्मा ने भी अपने बेटे के नाजुक कंधों पर ढेर सारा भार डाल दिया है। फिल्म में उसे सबको गच्चा देते हुए हीरो बनकर उभरना है। यहां तक कि विलेन बने नवाजुद्दीन सिद्दीकी से भी लड़कर जीतना है।
फिल्म की स्क्रिप्ट बेहद कमज़ोर है लेकिन न्यूकमर होने के बाद भी उत्कर्ष शर्मा कुछ हद तक अपना चार्म बिखरने में कामयाब हुए हैं।
-एजेंसियां

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