आंध्र प्रदेश: केमिकल प्लांट में गैस लीक होने से 8 लोगों की मौत, 200 बीमार

आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम के एक केमिकल प्लांट में स्टाइरिन गैस लीक होने से अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है. चारों तरफ़ अफरातफरी का माहौल है.
ज़िला अधिकारी विनय चांद ने मीडिया से कहा है कि 200 लोग इस हादसे से बीमार हुए हैं. जब गैस लीक हुई तो लोग सोए हुए थे. सभी को इलाज के लिए भेजा रहा है. 86 लोगों को वेंटिलेटर्स पर रखा गया है.
विभाग के पुलिस कमिश्नर आरके मीना ने बताया है कि तीन लोगों की मौत प्लांट के पास हुई और पाँच की मौत किंग जॉर्ज अस्पताल में इलाज के दौरान हुई. अब तक गैस रिसाव शुरू होने की वजह पता नहीं चली है. प्लांट के मैनेजमेंट के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है.
पुलिस ने आसपास के पाँच गाँवों को ख़ाली करा दिया है और उन्हें मेघाद्री गेड्डा और दूसरे सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया है. कइयों ने आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ़ होने की शिकायत की है. ख़ासकर बुज़ुर्गों और छोटे बच्चों को सांस लेने में परेशानी हो रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुर्घटना पर ट्वीट किया है, उनकी “एमएचए और एनडीएमए के अधिकारियों से बात हुई है जो इस दुर्घटना पर नज़र बनाए हुए हैं.
पीएम ने कहा है कि मैं विशाखापटनम में सभी के सुरक्षित रहने और उनकी बेहतरी की कामना करता हूँ.”
यह केमिकल प्लांट एलजी पॉलिमर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का है. 1961 में बना यह प्लांट हिंदुस्तान पॉलिमर्स का था जिसका 1997 में दक्षिण कोरियाई कंपनी एलजी ने अधिग्रहण कर लिया था.
आंध्र प्रदेश के उद्योग मंत्री गौतम रेड़्डी ने कहा है कि यह साढ़े तीन बजे सुबह की घटना है. उन्होंने कहा, “फैक्ट्री लॉकडाउन के बाद खुला था. कामगार फैक्ट्री खोलने की तैयारी कर रहे थे जब यह दुर्घटना हुई. वाक़ई में क्या हुआ था, यह हम समझने की कोशिश में लगे हुए हैं. पहली नज़र में तो यह लग रहा है कि कंपनी के मैनेजमेंट नियमों का पालन नहीं किया है.”
उन्होंने आगे कहा, “सरकार ने लॉकडाउन के बाद फैक्ट्रियों ख़ासकर हानिकारक उत्पादों वालों को खोलने को लेकर गाइडलाइन्स जारी किए हुए हैं. अगर कंपनी इन गाइडलाइन्स का पालन नहीं करने की दोषी पाई जाती है तो उसके ख़िलाफ़ सख्त क़दम उठाए जाएंगे. अभी हम दूसरे पॉलिमर का इस्तेमाल इस पर नियंत्रण पाने के लिए कर रहे हैं. अब तक 90-95 प्रतिशत रिसाव को नियंत्रित कर लिया गया है. अगले एक घंटे में इस पर पूरी तरह से काबू पा लिया जाएगा. गैस का रिसाव एक किलोमीटर तक हुआ है. जब यह दुर्घटना हुई थी तब उस वक़्त फैक्ट्री के अंदर कर्मचारी मौजूद थे. उनसे जुड़ी कोई जानकारी अभी हमें नहीं मिली है. हम इन बातों को जानने का प्रयास कर रहे हैं कि जिन लोगों ने सांस के साथ गैस अंदर ले लिया है, उसका लंबे वक़्त के बाद क्या असर पड़ने वाला है.”
राज्य के गृह मंत्री जी किशन रेड्डी ने मृतकों के परिवार वालों प्रति अपनी संवेदना प्रकट की है. उन्होंने कहा, मैंने मुख्य सचिव और प्रदेश के डीजीपी से वहाँ के हालात के बारे में बात की है. एनडीआरएफ की टीम को हर ज़रूरी राहत पहुँचाने को कहा है. मैं लगातार स्थिति पर नज़र रखे हुए हूँ. सैकड़ों लोग इस अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना की वजह से प्रभावित हुए हैं.
ज़िलाधिकारी ने बताया है कि यह दुर्घटना तब हुई जब लॉकडाउन के बाद फिर से प्लांट में काम शुरू किया गया. उन्होंने बताया, “गैस के रिसाव को रोकने के शुरुआती प्रयासों में कोई सफलता नहीं मिली है. अभी इसे नियंत्रित करने में दो घंटे और लगेंगे.”
घटना स्थल पर पुलिस और दमकल की गाड़ियां पहुँच चुकी हैं.
पीड़ितों को अस्पताल ले जाने के लिए 50 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं. अब तक किंग जॉर्ज अस्पताल में 15 लोगों को भर्ती कराया गया है.
मुख्यमंत्री वाईएस जगमोहन रेड्डी ने ज़िला अधिकारी कोप्रभावित क्षेत्र में पर्याप्त क़दम उठाने का आदेश दिया है.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के दफ्तर ने सूचना दी है कि मुख्यमंत्री जगमोहन रेड्डी वीजाग पहुँच कर किंग जॉर्ज अस्पताल में पीड़ितों को देखने वाले हैं. मुख्यमंत्री पूरे मामले पर खुद नज़र रखे हुए हैं और जिला में मौजूद सभी अधिकारियों को लोगों की जान बचाने के लिए तत्काल सभी संभव कदम उठाने को कहा है.
शुरू में किसी को कुछ पता नहीं चला लेकिन धीरे-धीरे गैस का असर तेज़ होना शुरू हुआ. गैस के तीन से पांच किलोमीटर तक फैलने का अनुमान है.
-BBC

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