अनंत चतुर्दशी: अनंत सर्व नागा नामधिप: सर्वकामद:

अनंत सर्व नागा नामधिप: सर्वकामद:, सलदा भूयात प्रसन्नो मे यक्तानाम भयंकर:.. इस भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्दशी मंगलवार 5 सिंतबर को भगवान अनंत की पूजा होगी। श्रद्धालु सृष्टिकर्ता निगरुण ब्रह्म नारायण की भक्ति व पूजा करेंगे। नारायण भगवान की पूजा के बाद पंडितों से अनंत चतुर्दशी की कथा सुनी जाएगी। दूध-दही के क्षीरसागर में कुश के बने अनंत भगवान का मंथन किया जाएगा। पीले धागे के 14 गांठों से निर्मित बाजुबंद को धारण किया जाएगा।
मंगलाचरणी और सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजन: ज्योतिषाचार्य प्रियेन्दु प्रियदर्शी के अनुसार गणेश चतुर्दशी के दसवें दिन अनंत चतुर्दशी मनायी जाती है। मंगलवार को अनंत चतुर्दशी होने से मंगलाचरणी योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। मंगलवार 5 सितंबर को सुबह 11.25 बजे तक चतुर्दशी है। वहीं ज्योतिषाचार्य मार्कण्डेय शारदेय ने बनारसी पंचांगों के हवाले से बताया कि सुबह 11.1.57 बजे तक चतुर्दशी है।
बाल भगवान के मध्यान में ही पूजन करके पुआ, पकवान का भोग लगाया जाता है। आचार्य राजनाथ झा के अनुसार खास मनोकामना की पूर्ति के लिए भृंगराज के पत्ते, समी के पत्ते, तुलसी के पत्ते, बेलपत्र, धातृ के पत्ते अर्पित करनी चाहिए। पूजन में 14 तरह के फूल, फल, चढ़ाए जाते हैं। भगवान विष्णु की पूजा में अक्षत का इस्तेमाल नहीं होता है।
ज्योतिषी पीके युग के मुताबिक हर गांठ में भगवान विष्णु के विभिन्न नामों से पूजा की जाती है। पहले अनंत, फिर पुरुषोत्तम, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, बैकुंठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविंद की पूजा होती है।
-एजेंसी