Rakhi बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त होता है अमृत मुहूर्त

नई दिल्‍ली। Rakhi का त्यौहार देशभर में 26 अगस्त को मनाया जाएगा, राखी बांधने के लिए सबसे शुभ मुहूर्त अमृत मुहूर्त होता है। आइए जानते हैं अमृत मुहूर्त के बारे में।

रक्षा बंधन 26 अगस्त को मनाया जाएगा। यह भाई-बहनों का महापर्व है जब बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र, संपन्‍नता और खुशहाली की कामना करती हैं। यूं तो राखी उस दिन किसी भी वक्त बांधी जा सकती है लेकिन ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक राखी को अमृत मुहूर्त में बांधना सबसे सर्वोत्तम होता है।क्या होता है अमृत मुहूर्त?अमृत मुहूर्त उस मुहूर्त को कहते हैं जिस काल में राखी बांधना सर्वोत्तम होता है यानी विशेष फल देने वाला होता है। इस मुहूर्त में राखी बांधने का लाभ भाई और उसके परिवार को अमृत जैसा प्राप्त होता है। जिस प्रकार अभिजीत काल में किसी भी कार्य को करने से निश्चित रूप से सफलता की प्राप्ति होती है उसी प्रकार इस अमृत मुहुर्त में राखी बांधने से अमृत जैसे फल की प्राप्ति होती है।

सबसे पहले राखी बांधने के लिए अमृत मुहूर्त फिर शुभ मुहूर्त और फिर चर मुहूर्त का चुनाव किया जाना चाहिए। अगर अमृत मुहूर्त में बहनें राखी नहीं बांध पाएं तो शुभ मुहूर्त में बांधें, अगर राखी इसमें भी नहीं बांध पाईं हो तो फिर लाभ और फिर चर मुहूर्त का चुनाव किया जाना चाहिए।ज्योतिष के मुताबिक इस बार रक्षा बंधन बांधने का शुभ मुहूर्त लगभग 12 घंटे का है। इस रक्षा बंधन पर बहनें सुबह 7:43 मिनट से रात 11: 03 मिनट तक राखी बांध सकती हैं।

राखी बांधने के मुहूर्त

सुबह 7:43 बजे से 9:18 बजे तक चर
सुबह 9:18 बजे से लेकर 10:53 बजे तक लाभ
सुबह 10:53 बजे से लेकर 12:28 बजे तक अमृत
दोपहर 2:03 बजे से लेकर 3:38 बजे तक शुभ
सायं 6:48 बजे से लेकर 8:13 बजे तक शुभ
रात्रि 8:13 बजे से लेकर 9:38 बजे तक अमृत
रात्रि 9:38 बजे से लेकर 11:03 बजे तक चर

चौघड़िया के अनुसार Rakhi बांधने का मुहूर्त

लाभ का चौघड़िया- सुबह 09.18 से 10.53 तक
अमृत का चौघड़िया- सुबह 10.53 से दोपहर 12.29 तक
शुभ का चौघड़िया- दोपहर 02.04 से 03.39 तक
शुभ का चौघड़िया- शाम 06.49 से 08.14 तक
अमृत का चौघड़िया- रात्रि 08.14 से 09.39 तक

Rakhi बांधने की पूजा विधि-

सबसे पहले बहनों का सुबह- सुबह पूजा की थाल तैयार कर लेनी चाहिए।

इस थाल में रोली, मिठाई, पान का पत्ता, कुमकुम,रक्षा सूत्र, अक्षत, पीला सरसों ,दीपक और राखी हो यह सुनिश्तिच कर लें।

सबसे पहले भाई को तिलक लगाएं।

फिर दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र बांधें उसके बाद राखी को बांधें।
फिर राखी और रक्षा सूत्र बांधने के बाद भाई की आरती उतारें।

इस दौरान दीप जरूर जला लें।

फिर भाई को मिठाई खिला दें।

भाई अगर आपसे बड़ा है तो उसका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

अगर छोटा है तो उसके सिर पर हाथ रखकर उसे आशीर्वाद दें।

-Legend News

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