NRC पर प्रेस वार्ता करके अमित शाह ने कहा, जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं वह घुसपैठिए हैं

नई दिल्ली। असम में NRC ( नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन ) के फाइनल ड्राफ्ट को लेकर मंगलवार को संसद में हुए जोरदार हंगामे के बाद बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अमित शाह ने विपक्ष पर हमला बोला।

प्रेस वार्ता के दौरान शाह ने आरोप लगाया कि NRC पर संसद में उन्हें बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि NRC से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, प्राथमिक जांच में पाया गया कि वे भारतीय नहीं बल्कि घुसपैठिए हैं। हालांकि शाह ने यह भी कहा कि जिनके नाम लिस्ट में नहीं हैं, वे आपत्ति जता सकते हैं।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष कई तरह के भ्रम फैला रहा है जबकि वास्तविकता अलग है। इससे पहले शाह के बयान पर राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने जबर्दस्त हंगामा किया था, जिससे सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। आपको बता दें कि NRC लिस्ट में 40 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं किया गया है, जिससे इन लोगों का भविष्य संकट में पड़ गया है।
‘साबित नहीं कर पाए भारतीय नागरिक’
ऐसे में शाह ने कहा कि जो लोग साबित नहीं कर पाए कि वे भारतीय नागरिक हैं, उनके नाम को ही ड्राफ्ट से अलग किया गया है। उन्होंने कहा, ‘सदन में मैंने सभी पार्टियों के लोगों को सुना पर किसी भी पार्टी ने स्पष्ट नहीं किया कि यह अंतिम सूची नहीं है। किसी ने यह नहीं कहा कि NRC कहां से आया। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐसा कहा रहा है कि बीजेपी जनता के साथ धोखा कर रही है।’
कांग्रेस पर सीधा अटैक
उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि घुसपैठ के कारण असम के विद्यार्थियों ने आंदोलन किया था। कई लोगों की जान चली गई और फिर 14 अगस्त 1985 को असम अकॉर्ड साइन किया गया। उस समय देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। अकॉर्ड के मुताबिक यह तय किया गया कि एनआरसी बनाते समय एक-एक घुसपैठिए को चुनकर बाहर किया जाएगा।
शाह का आरोप, कांग्रेस के लिए वोट बैंक अहम
उन्होंने कहा, ‘2005 में भी कांग्रेस ने एनआरसी बनाने की कोशिश की पर उनके लिए वोट बैंक महत्वपूर्ण था। उनमें साहस नहीं था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और फिर मोदी सरकार ने एनआरसी बनाने का काम शुरू किया।’ बीजेपी अध्यक्ष ने दोहराया कि लोगों को समझने की जरूरत है कि यह प्राथमिक ड्राफ्ट है। सुनवाई, आपत्ति के बाद फाइनल लिस्ट आएगी।
मानवाधिकार पर भी दिया जवाब
विपक्ष पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा कि असम के लोगों के रोजगार छिन रहे हैं, स्वास्थ्य और शिक्षा के अवसर छिन रहे हैं। क्या उनका मानवाधिकार नहीं है? उन्होंने कहा कि भारत के लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ही NRC बना। उन्होंने मांग की कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस को अपना स्टैंड क्लीयर करना चाहिए। मौजूदा सरकार के लिए सीमाओं और देशवासियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राज्यों के बीच विवाद पर कहा, विपक्ष की चाल
शाह ने कहा कि इस मसले पर सभी पार्टियों को देश की जनता के समक्ष अपना रुख साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पर निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई गई है और सब कुछ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किया गया है। शाह ने कहा कि भारत के दूसरे राज्यों से आए किसी भी लोगों के नाम काटे नहीं गए हैं और न काटे जा सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘जो मैं संसद में नहीं कह सका, अब कह रहा हूं। भ्रांति फैलाई जा रही है कि राज्य-राज्य में विवाद होगा। यह विपक्ष की चाल है। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं। ऐसा कर कांग्रेस ने जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है।’
‘राहुल गांधी साफ करें रुख’
उन्होंने कहा, ‘1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि एक भी घुसपैठिए के लिए देश में कोई जगह नहीं है। तत्कालीन गृह मंत्री चिदंबरम ने भी कहा था कि घुसपैठियों के लिए देश में जगह है। ऐसे में अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना रुख साफ करना चाहिए।’ अमित शाह ने वोट बैंक की राजनीति करने के आरोपों पर कहा कि हम जब विपक्ष में थे तब भी और आज सत्ता में हैं, तब भी हमारा रुख बिल्कुल क्लियर है। उन्होंने कहा कि शरणार्थी और घुसपैठिए दोनों अलग बात है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘ममता बनर्जी चुनाव जीतने के लिए भ्रांति फैला रही हैं। ममता कह रही हैं कि गृह युद्ध होगा, वे क्या समझाना चाहती हैं।

बांग्लादेशी घुसपैठियों के मसले पर ममता को अपना रुख साफ करना चाहिए। इस देश के मानवाधिकारों की भी कोई बात करेगा कि नहीं। ऐसे देश की सुरक्षा और देश के लोगों की रक्षा कैसे कर सकेंगे? उन्होंने साफ कहा कि NRC देश की सुरक्षा के लिए हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत इसे लागू किया जाएगा।
-एजेंसी

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