अफगान शांति वार्ता के लिए भारत से दूरी बनाना अमेरिका की नासमझी: शीर्ष विशेषज्ञ

वॉशिंगटन। जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव व अफगान शांति वार्ता के बीच अमेरिका की विदेश नीति मामलों के एक शीर्ष विशेषज्ञ ने पाकिस्तान के प्रति किसी भी प्रकार के रणनीतिक झुकाव और भारत से दूरी बनाने से बचने के लिए ट्रंप प्रशासन को सचेत किया है।
विदेश संबंधों की परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड एन हास ने पिछले सप्ताह लिखे एक लेख में कहा कि पाकिस्तान को रणनीतिक साझेदार बनाना अमेरिका की नासमझी होगी।
उन्होंने इस लेख में कहा कि काबुल में पाकिस्तान एक दोस्ताना सरकार देख रही है, जो उसकी सुरक्षा के लिए अहम है और उसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत को टक्कर दे सके। उनका यह लेख पहले प्रोजेक्ट सिंडिकेट में प्रकाशित हुआ और इसके बाद सीएफआर की वेबसाइट पर भी इसे पोस्ट किया गया। इसमें रिचर्ड ने कहा- इस पर यकीन करने का कोई कारण नहीं है कि पाकिस्तान को चलाने वाली सेना और खुफिया एजेंसी तालिबान पर लगाम लगाएगी या आतंकवाद को उखाड़ फेकेंगी।
उन्होंने कहा कि इसी तरह से भारत से दूरी बनाना भी अमेरिका की नासमझी होगी। भारत में संरक्षणवादी व्यापार नीतियों की परंपरा रही है और अक्सर रणनीतिक मुद्दों पर पूरी तरह से सहयोग करने से मना कर देने से अमेरिकी नीति-निर्माताओं को निराशा होती है। मगर जल्द ही जनसंख्या के लिहाज से चीन को पछाड़कर भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। इसके साथ ही भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है लिहाजा भारत पर दांव लगाना अमेरिका के लिए दीर्घकालिक फायदा साबित होगा। भारत ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में भी शामिल होने से इंकार कर दिया, जबकि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने इसे स्वीकार कर लिया। रिचर्ड का मानना है कि चीन का मुकाबला करने में मदद के तौर पर भारत एक स्वाभाविक साझेदार है।
-एजेंसियां

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