अमेरिका ने कहा, भारत और चीन के डिसइंगेजमेंट पर हमारी करीबी नजर

वॉशिंगटन। अमेरिका ने कहा है कि वो भारतीय और चीनी सैनिकों के डिसइंगेजमेंट की रिपोर्टों पर करीबी नज़र रख रहा है और स्थिति को लगातार मॉनिटर कर रहा है.
अमेरिका के विदेश मंत्रालय का ये बयान ऐसे वक़्त में आया है जब भारत और चीन की सेना ने पूर्वी लद्दाख में आठ महीने से चले तनाव के बाद पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू की है.
दोनों देश आपसी सहमति से उत्तर और दक्षिण पैंगोंग झील के सबसे विवादास्पद क्षेत्र में अपनी-अपनी सेनाओं को पीछे लेने के समझौते पर पहुंचे हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने रोज़ाना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में संवाददाताओं से कहा, “हम सेना के डिसइंगेजमेंट की रिपोर्टों पर क़रीबी नज़र बनाए हुए हैं. तनाव कम करने की कोशिशों का हम स्वागत करते हैं.”
लद्दाख के पैंगोंंग झील क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के पीछे हटने की रिपोर्टों से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष शांतिपूर्ण समाधान की ओर काम कर रहे हैं, हम निश्चित रूप से स्थिति को मॉनिटर करना जारी रखेंगे.”
बीते साल 5 मई को पैंगोंग झील के इलाक़ों में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया था और दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे वहां अपने हज़ारों सैनिकों और भारी हथियारों की मौजूदगी बढ़ा दी थी, इस बीच दोनों पक्ष सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत भी कर रहे थे.
दोनों सेनाओं के सैन्य कमांडरों के बीच 20 फरवरी को चीन की तरफ चुशुल-मोल्डो सीमा चौकी पर 10वें दौर की वार्ता हुई थी.
लंबी चली इस बैठक के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया था कि दोनों पक्षों ने पैंगोग झील क्षेत्र में फ्रंटलाइन सैनिकों के डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया अच्छे से पूरी होने की सकारात्मक तौर पर प्रशंसा की. साथ ही ये भी कहा गया कि ये पश्चिमी सेक्टर में एलएसी पर अन्य मसलों के समाधान की दिशा में एक अहम कदम है.
भारत और चीन के बीच 3,488 किमी लंबी एलएसी को लेकर विवाद है. चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताकर उसपर दावा करता है, जबकि भारत इस दावे को ख़ारिज करता है.
-BBC

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