WHO में फिर शामिल होने के लिए अमेरिका ने रखीं शर्तें

वॉशिंगटन। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO से बाहर निकल चुके अमेरिका ने फिर से शामिल होने के लिए नई शर्तें रखीं हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाहर निकलने के ऐलान के 2 दिन बाद अपने रुख में नरमी लाते हुए अमेरिका ने कहा कि वह WHO में फिर से शामिल होने पर विचार कर सकता है।
उधर अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ’ब्रायन ने रविवार को कहा कि अगर WHO भ्रष्टाचार और चीन के प्रति झुकाव को खत्म करे तो उनका देश फिर से इसमें शामिल हो सकता है।
शामिल होने के लिए अमेरिका ने रखीं शर्तें
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO से नाता तोड़ते हुए उस पर चीन के प्रति झुकाव रखने और कोरोना वायरस महामारी को लेकर जानकारियां छिपाने का आरोप लगाया था। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ’ब्रायन ने एबीसी न्यूज़ से कहा कि राष्ट्रपति ने कहा है कि WHO में सुधार की जरूरत है। अगर उसमें सुधार होता है और भ्रष्टाचार तथा चीन के झुकाव खत्म होता है तो अमेरिका बहुत गंभीरता से इसमें दोबारा शामिल होने पर विचार करेगा।
क्या कंगाल हो जाएगा WHO
अमेरिका के अलग होने के ऐलान के बाद से ही संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था के कंगाल होने की कयासबाजियां शुरू हो गई हैं। बता दें कि इस संस्था को सबसे ज्यादा फंड अमेरिका से ही मिलता था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार WHO को सार्वजनिक तौर पर खरी-खरी सुना चुके हैं। जानिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के बजट में अमेरिका का कितना हिस्सा होता है और इसका संगठन के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा?
चीन के प्रयासों से टैड्रोस बने WHO चीफ
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस ने 2017 में डब्लूएचओ की कमान संभाली थी। कहा जाता है कि उन्हें यह पद चीन के पैरवी करने के कारण मिला था इसलिए वह चीन परस्त फैसले ले रहे हैं। बता दें कि टैड्रोस पहले अफ्रीकी हैं जो WHO के चीफ बने हैं।
WHO को कैसे मिलता है फंड
विश्व स्वास्थ्य संगठन को फंड दो तरीकों से मिलता है, पहला- असेस्ड कंट्रीब्यूशन और दूसरा- वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन। इन दोनों तरीकों से मिले फंड से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन का खर्च चलता है।
असेस्ड कंट्रीब्यूशन
इस फंड को विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देश देते हैं। यह पहले से ही निश्चित होता है कि कौन सा देश कितना फंड देगा। इस फंड का निर्धारण उस देश की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के आंकड़ों के जरिए किया जाता है। असेस्ड कंट्रीब्यूशन के जरिए ही विश्व स्वास्थ्य संगठन को सबसे ज्यादा फंडिंग मिलती है। इससे WHO अपने खर्च और प्रोग्राम की फंडिंग करता है।
वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन
यह फंड एक निश्चित प्रोग्राम को लेकर दिए जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस फंड का इस्तेमाल केवल उन्हीं काम में करता है जिसके नाम पर यह फंड मिला होता है। जैसे कोरोना वायरस की दवा बनाने के लिए WHO को अगर किसी संस्था या देश से फंड मिला है तो वह केवल इस वैक्सीन को बनाने में ही इस फंड को खर्च कर सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी फंडिंग
विश्व स्वास्थ्य संगठन को दुनिया में सबसे ज्यादा फंडिंग अमेरिका से मिलती है। अमेरिका इस संगठन को असेस्ड और वॉलेंटरी दोनों प्रकार के फंड उपलब्ध करवाता है। रिपोर्ट के अनुसार, WHO के असेस्ड फंड का 22 फीसदी हिस्सा अकेले अमेरिका देता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अमेरिका के विश्व स्वास्थ्य संगठन से अपने संबंध तोड़ने पर यह संस्था आर्थिक रूप से मुश्किल में फंस सकती है।
-एजेंसियां

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