Amarnath जी की छड़ी मुबारक का पूजन आज

आस्था की प्रतीक छड़ी मुबारक

नई दिल्‍ली। अषाढ़ पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा अथवा व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं, इसी अवसर पर आज Amarnath यात्रा 2018 के लिए छड़ी मुबारक स्वामी Amarnath जी की पूजा प्रक्रिया शुरू होगी। पहलगाम में भूमि पूजन, नवग्रह पूजन और ध्वजारोहण की रस्म अदा की जाएगी।
साधु महात्माओं के साथ श्रीनगर के विभिन्न मंदिरों में रुकने के बाद छड़ी मुबारक श्रावण पूर्णिमा (26 अगस्त) रक्षाबंधन पर पवित्र गुफा के दर्शन करेगी।

Amarnath यात्रा में पवित्र हिमलिंग के दर्शनों के अतिरिक्त सर्वाधिक महत्व की चीज छड़ी मुबारक है। सरकारी तौर पर भले ही यात्रा की तिथियां कुछ भी हो लेकिन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यात्रा की अवधि छड़ी मुबारक से जुड़ी है है। अर्थात व्यास पूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा यानि रक्षा बंधन तक।

छड़ी मुबारक की रस्म चांदी की एक छड़ी से जुड़ी है

ऐसा विश्वास किया जाता है कि इस छड़ी में भगवान शिव की अलौकिक शक्तियां निहित हैं। जनश्रुति है कि महर्षि कश्यप ने यह छड़ी भगवान शिव को इस आदेश के साथ सौंपी थी कि इसे प्रति वर्ष अमरनाथ लाया जाए। अमरनाथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत के लिए व्यास पूर्णिमा के दिन छड़ी मुबारक भूमि पूजन व ध्वजारोहण हेतु श्रीनगर से पहलगाम के लिए रवाना की जाती है। इसके बाद रक्षा बंधन से एक पखवाड़ा पूर्व सोमवती अमावस्या के दिन इसे एक अन्य पूजा के लिए श्रीनगर स्थित शंकराचार्य मंदिर ले जाया जाता है। यहां से यह शरीका भवानी मंदिर और फिर आगे छड़ी स्थापना व ध्वजारोहण समारोह के लिए दशनामी अखाड़ा ले जाई जाती है। तदुपरांत नाग पंचमी के दिन छड़ी पूजन किया जाता है और इसके ठीक पांच दिन बाद इसे अमरनाथ के लिए रवाना किया जाता है। पहलगाम से अमरनाथ के मार्ग पर छड़ी मुबारक का शेषनाग, पंजतरणी आदि पड़ावों पर ठहराव होता है और अंतत: रक्षाबंधन वाले दिन यह अमरनाथ गुफा पहुंचती है। वहां छड़ी मुबारक की पूजा-अर्चना के साथ ही अमरनाथ यात्रा संपन्न हो जाती है। वापसी में इसे पहलगाम लाकर लिद्दर नदी के जल में प्रवाहित कर दिया जाता है।

महादेव गीर दशनामी अखाड़ा ट्रस्ट, श्रीनगर की ओर से निकाली जाने वाली छड़ी मुबारक स्वामी अमरनाथ जी के महंत दीपेंद्र गिरि के नेतृत्व में 11 अगस्त को प्रस्थान करेगी। इसमें ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर के बाद 12 अगस्त को डाउन टाउन श्रीनगर स्थित हरि पर्वत पर शारिका भवानी मंदिर में छड़ी मुबारक पहुंचेगी।

इसके अगले दिन 13 अगस्त को श्री आर्मेश्वर मंदिर दशनामी अखाड़ा श्रीनगर में रुकने के साथ 15 अगस्त को दशनामी अखाड़ा में नाग पंचमी पर छड़ी पूजन किया जाएगा। छड़ी मुबारक 20 और 21 अगस्त को पहलगाम, 22 अगस्त को चंदनबाड़ी, 23 अगस्त को शेषनाग, 24 व 25 अगस्त को पंजतरणी पड़ाव से होते हुए 26 अगस्त को पवित्र गुफा में पहुंचेगी।

साधु संतों के अलावा छड़ी मुबारक में आखिरी जत्थे में जाने वाले श्रद्धालु शामिल होंगे। Amarnath यात्रा में अब तक करीब ढाई लाख श्रद्धालु पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दरबार में हाजिरी दे चुके हैं। Amarnath यात्रा में छड़ी मुबारक का पारंपरिक महात्म्य है।
-एजेंसी

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