आउटलुक समूह से आलोक मेहता की विदाई, हरवीर सिंह नए संपादक

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आउटलुक समूह से आलोक मेहता की विदाई, हरवीर सिंह नए संपादक

आलोक मेहता को आउटलुक समूह ने टाटा बाय बाय बोल दिया है. वे आउटलुक (हिंदी) के प्रधान संपादक थे. वे डिजिटल विंग भी देख रहे थे. मेहता ने आउटलुक के साथ बीते साल जनवरी में दूसरी पारी शुरू की थी. खबर है कि हरवीर सिंह को आउटलुक (हिंदी) का नया एडिटर बनाया गया है. वे डिजिटल विंग की कमान भी संभालेंगे. हरवीर सिंह अभी तक भास्कर ग्रुप में ‘मनीभास्कर डॉट कॉम’ के एडिटर थे. वे ‘बिजनेस भास्कर’ में भी बतौर आर्थिक संपादक काम कर चुके हैं. हरवीर सिंह की हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ है.

बताया जाता है  कि  वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता को आउटलुक का संपादक पद संभाले महज एक साल से कुछ ज्यादा समय हुआ था कि प्रबंधन ने उन्हें एक दिन में अपना बोरिया बिस्तर समेट लेने को कह दिया. श्री मेहता ने जनवरी 2016 में ज्वाइन करने के साथ ही नीलाभ मिश्र की पुरानी टीम के सदस्यों को बेवजह निकालना शुरू कर दिया था. कुछेक पत्रकारों और कर्मचारियों ने उनकी कार्यशैली से तंग आकर इस्तीफा दे दिया.

 

आलोक मेहता के बारे में

नईदुनिया के स्ट्रींगर के रूप में पत्रकारिता शुरू करने वाले आलोक मेहता भले ही कई अखबारों में सम्पादक रहे हों, आज भी लोग उन्हें उनकी पुरानी रिपोा\टग के लिए याद करते हैं। नवभारत टाइम्स में उन्होंने चन्द्रा स्वामी, राष्ट्रपति ज्ञानी जेलसिंह, प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह, आतंकवाद और विश्व हिन्दी परिषद को फायनेंस करने जैसे मुद्दों पर रिपोर्टिंग के लिए याद करते हैं। ऐसे मौके भी आए, जब उन्हें कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई। कई बार यह कह कर धमकाया गया कि उन्हें ट्रक से कुचलकर मार दिया जाएगा। अटलबिहारी वाजपेयी को भारतीय जनता पार्टी का मुखौटा बताने वाली गोविंदाचार्य की डायरी उन्होंने ही उजागर की थी, जिससे भारतीय जनता पार्टी के सामने परेशानियां खड़ी हुर्इं।

सम्पादक के रूप में आउटलुक पत्रिका में उन्हें बाबा रामदेव की दवाओं और कारोबार से जुड़े कई खुलासे किए। ताज कॉरिडोर और मायावती सरकार के कई घोटाले सामने लाने का श्रेय भी उन्हें ही है। बाबरी ढांचे को ढहाने में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका का खुलासा भी उन्होंने ही किया था। जब उन्होंने बाबा रामदेव की दवाइयों में मानव हड्डी के इस्तेमाल की खबर छापी थी, तब उन्हें ५०० करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति का लीगल नोटिस दिया था। नईदुनिया के सम्पादक होते हुए उन्होंने पूर्व मंत्री शांतिभूषण की इलाहबाद की करोड़ों की सम्पत्ति के बारे में खुलासे किए थे। एडिटर्स गिल्ट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद पर ५० साल से अंग्रेजी सम्पादकों के वर्चस्व को उन्होंने तोड़ा और वे उसके अध्यक्ष बने। दो साल तक अध्यक्ष पर रहने वाले आलोक मेहता एडिटर्स गिल्ड के सचिव के रूप में भी चार साल तक सेवाएं दे चुके हैं।

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