इलाहाबाद High Court ने जींस पहनकर आने वाले इंजीनियर को सिखाया सबक

इलाहाबाद। कोर्ट का सम्‍मान ना करने वाले सरकारी अधिकारियों को आज इलाहाबाद High Court ने बड़ा सबक दिया है, दरअसल सिंचाई विभाग के एक इंजिनियर को ”ड्रेस कोड” में न आने के कारण कोर्ट द्वारा फाइन लगा दिया गया।

उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता को हाई कोर्ट में हॉफ शर्ट और जींस पहनकर जाना मंहगा पड़ गया। इलाहाबाद High Court ने इंजिनियर को ड्रेस कोड में न आने पर न केवल फटकार लगाई बल्कि 5000 रुपये जुर्माना और उनकी चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि किये जाने का भी आदेश दिया है।

हाई कोर्ट ने यह कार्यवाही वाराणसी के अधिशासी अभियंता विजय कुमार कुशवाहा पर की है। कोर्ट ने महानिबंधक को हर्जाना राशि एक माह में जमा न होने पर वसूली कर विधिक सेवा समिति में जमा कराने का भी आदेश दिया है।

कोर्ट ने सिंचाई विभाग के सचिव को भी इंजिनियर विजय कुमार को प्रतिकूल प्रविष्टि देने की कार्रवाई करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने याची महिला के पति को सेवानिवृत्ति परिलाभों के भुगतान के लिए 2011 से 2014 तक दौड़ाने पर इस अवधि का छह फीसदी ब्याज तीन माह में भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह आदेश जस्टिस बी अमित स्थालेकर तथा जस्टिस जयन्त बनर्जी की खंडपीठ ने निर्मला देवी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। कोर्ट ने इसी मामले में इंजिनियर विजय कुमार को तलब किया था। वह गुलाबी रंग की हाफ शर्ट और जींस पहनकर कोर्ट में पेश हुए।

High Court ने आश्चर्य प्रकट करते हुए पूछा कि, क्या यही नॉर्मल ड्रेस है? क्या जींस पहनकर प्रथम श्रेणी का अधिकारी कार्यालय जा सकता है? कोर्ट ने कहा कि, यह ड्रेस कोड नहीं है। विजय कुमार वाराणसी में सिंचाई विभाग के बन्धी प्रखण्ड में तैनात हैं।

याची के पति चंद्रिका राम 2009 में सेवानिवृत्ति हुए। वह सेवा निवृत्ति परिलाभों के भुगतान के लिए कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। पहले कहा गया कि, 80,000 विभाग का देय है, जिसे बाद में 46560 बताया गया। 2014 में इतनी राशि काटकर 26,06031 रुपये का भुगतान कर दिया गया। लेकिन भुगतान में देरी का ब्याज नहीं दिया गया, जिसके बाद यह याचिका दाखिल की गयी थी।
-एजेंसी

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