हाथरस केस का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्‍वत: संज्ञान लिया, योगी सरकार को नोटिस

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाथरस में दलित लड़की से कथित गैंगरेप और मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश की सरकार को नोटिस जारी किया है.
इस मामले पर 12 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी कोर्ट ने गृह सचिव, डीजीपी, एडिशनल डीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) और हाथरस के डीएम को सुनवाई में मौजूद होने के निर्देश दिए हैं और साथ ही पीड़िता के परिवार को भी मौजूद रहने को कहा है.
इससे पहले उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने कहा था कि फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में ये साफ़ कहा गया है कि महिला के साथ रेप नहीं हुआ. उनके अनुसार मौत का कारण गर्दन में आई गंभीर चोटें हैं.
उन्होंने कहा, ”दिल्ली की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लड़की की मृत्यु का कारण गले में चोट होने के कारण जो ट्रॉमा हुआ उससे बताई गयी है. फ़ोरेंसिक लैब की रिपोर्ट भी आ गई है, जिसमें ये स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि जो सैंपल इक्कट्ठे किए गए उसमें शुक्राणु/स्पर्म नहीं पाया गया है. इससे स्पष्ट होता है कि ग़लत तरीक़े से जातीय तनाव पैदा करने के लिए इस तरह की चीज़ें कराई गईं. पुलिस ने शुरू से इस मामले में त्वरित कार्यवाही की है और आगे की विधिक कार्यवाही की जाएगी.”
कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसका जवाब देते हुए कहा है, ”एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) ने निहायत ही घिनौनी बात कही है. वो कहते हैं रेप नहीं हुआ क्योंकि सिमन नहीं मिला. थोड़ा सा क़ानून बता दूं. धारा 375 का 2013 में संशोधन किया गया. सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश बनाम बाबूनाथ 1994 केस में साफ़ तौर से कहा है कि सिमन का ना मिलना या लिंग का पेनेट्रेशन ना होना ही रेप नहीं है, उसकी कोशिश करना भी रेप है. शर्म कीजिए.”
दूसरी ओर दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ”20 वर्ष की महिला को 28 सितंबर को सफ़दरजंग अस्पताल में लाया गया और उनकी हालत काफ़ी गंभीर थी. जब उन्हें भर्ती किया गया तो वह सर्वाइकल स्पाइन इंजरी, क्वेड्रिफ़्लेजिया (ट्रॉमा से लकवा मारना) और सेप्टिकेमिया (गंभीर संक्रमण) से पीड़ित थीं.”
उधर पीड़िता के भाई ने कहा है, “पुलिस ने हमें पूरे काग़ज़ नहीं दिए हैं. हमारी बहन की मेडिकल रिपोर्ट भी अभी हमें नहीं दी गई है.”
हाथरस के एसपी विक्रांत वीर का इस बारे में कहना है कि “ये जानकारी गोपनीय है. जाँच का हिस्सा है. हम घटना से जुड़े हर सबूत जुटा रहे हैं. फ़ोरेंसिक सबूत भी इकट्ठे किए गए हैं.”
एसपी बार-बार इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पीड़िता के साथ उस तरह की दरिंदगी नहीं हुई, जिस तरह मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है.
एसपी कहते हैं, “उनकी जीभ नहीं काटी गई थी. रीढ़ की हड्डी भी नहीं टूटी थी. गले पर दबाव बढ़ने की वजह से उनकी गले की हड्डी टूटी थी जिससे नर्वस सिस्टम प्रभावित हुआ था.”
यूपी पुलिस चाहे जो भी कहे लेकिन यह ज़रूर है कि यूपी में महिलाओं के ख़िलाफ़ रेप और अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रहीं हैं और पिछले 24 घंटों में तो कई जगहों से इस तरह की ख़बरें आ रहीं हैं.
-BBC

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