अधिक मास में वर्जित माने गए हैं समस्त शुभ कार्य, देव कार्य तथा पितृ कार्य

प्रत्येक राशि, नक्षत्र, करण व चैत्रादि बारह मासों के सभी के स्वामी है, परंतु मलमास का कोई स्वामी नही है अत: अधिक मास में समस्त शुभ कार्य, देव कार्य तथा पितृ कार्य वर्जित माने गए हैं। अधिक मास यानी मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी ही रोचक कथा पुराणों में दी गई है।
इस कथा के अनुसार स्वामी विहीन होने के कारण अधिक मास को ‘मलमास’ कहने से उसकी बड़ी निंदा होने लगी। इस बात से दु:खी होकर मलमास श्रीहरि विष्णु के पास गया और उनसे दुखड़ा रोया।
भक्तवत्सल श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुंचे, वहां श्रीकृष्ण विराजमान थे। करुणासिंधु भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की व्यथा जानकर उसे वरदान दिया- अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूं। इससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाविष्ट हो जाएंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से विख्यात हूं और मैं तुम्हें अपना यही नाम दे रहा हूं। आज से तुम मलमास के बजाय पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे।
इसीलिए प्रति तीसरे वर्ष (संवत्सर) में तुम्हारे आगमन पर जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति के साथ कुछ अच्छे कार्य करेगा, उसे कई गुना पुण्य मिलेगा। इस प्रकार भगवान ने अनुपयोगी हो चुके अधिक मास/मलमास को धर्म और कर्म के लिए उपयोगी बना दिया।
अत: इस दुर्लभ पुरुषोत्तम मास में स्नान, पूजन, अनुष्ठान एवं दान करने वाले को कई पुण्य फल की प्राति होती है।
शादियों पर प्रतिबंध
अधिकमास के प्रारंभ होते ही विवाह पर प्रतिबंध लग जाएगा। अधिकमास की अवधि में विवाह आदि शुभ कर्म वर्जित रहते हैं। वर्ष 2018 में ‘अधिकमास’ 16 मई से 13 जून के मध्य रहेगा। इस वर्ष ज्येष्ठ मास की अधिकता रहेगी अर्थात् इस वर्ष दो ज्येष्ठ मास होंगे। वहीं ‘अधिकमास’ की समाप्ति के कुछ ही समय पश्चात् 23 जुलाई 2018 से देवशयन के चलते 4 माह के लिए विवाह मुहूर्त्त का निषेध रहेगा।
क्या होता है ‘अधिकमास’
जब हिन्दी कैलेंडर में पंचांग की गणनानुसार 1 मास अधिक होता है तब उसे ‘अधिकमास’ कहा जाता है। हिन्दू शास्त्रों में ‘अधिकमास’ को बड़ा ही पवित्र माना गया है इसलिए ‘अधिकमास’ को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है किन्तु यह विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए निषेधात्मक रहता है अर्थात् अधिकमास की अवधि में विवाह करना वर्जित माना गया है।
अधिक मास प्रत्येक तीसरे वर्ष होता है। अधिकमास फ़ाल्गुन से कार्तिक मास के मध्य होता है। जिस वर्ष अधिकमास होता है उस वर्ष में 12 के स्थान पर 13 महीने होते हैं। अधिकमास के माह का निर्णय सूर्य संक्रांति के आधार पर किया जाता है। जिस माह सूर्य संक्रांति
नहीं होती वह मास अधिकमास कहलाता है। वर्ष 2018 में अधिकमास के चलते ज्येष्ठ मास में सूर्य संक्रांति नहीं होने के कारण इस वर्ष दो ज्येष्ठ मास होंगे। अत: 16 मई से 13 जून तक विवाह मुहूर्त्त का अभाव रहेगा एवं विवाह नहीं होंगे।
-एजेंसी

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