चुनावी हार से बौखलाए Akhilesh ने सभी मीडिया पैनलिस्ट हटाए

लखनऊ। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh यादव ने लोकसभा चुनाव में करारी हार पर अपनी पार्टी के सभी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पैनलिस्ट को हटा दिया है साथ ही चैनल पर किसी भी प्रवक्ता के पार्टी का पक्ष रखने पर रोक लगा दी है।

आपको बता दें कि पिछली बार की तरह इस बार भी सपा यूपी में 5 सीटों पर ही सीमित रह गई। जबकि बसपा व रालोद के साथ उसका गठबंधन बेहद मजबूत माना जा रहा था।

यूपी की 80 सीटों में से भाजपा को सर्वाधिक 62 सीटों पर जीत मिली है। वहीं, गठबंधन सिर्फ 15 सीटों पर ही सीमित रह गया। वहीं, अपना दल (एस) को दो व कांग्रेस को एक सीट मिली है।

गौरतलब है कि  लोकसभा चुनाव के नतीजों से यह सवाल लाजिमी हो गया कि क्या अखिलेश यादव अपनी चमक और पिता की राजनीतिक विरासत लगातार खोते जा रहे हैं। राजनीति में ऐसा अक्सर कम ही होता है जब कोई अपनी पूरी राजनीतिक कमाई को दांव पर लगाकर भविष्य की राजनीति गढ़ता हो।

Akhilesh अपने पार्टी के सर्वेसर्वा हैं। अखिलेश के खिलाफ पार्टी में राय रखने वाले अब पार्टी से बाहर जा चुके हैं। भले ही अखिलेश यादव पर इस हार के बाद भी पार्टी के भीतर से कोई सवाल नहीं उठेंगे लेकिन यह हार समाजवादी पार्टी को अंदर तक हिला चुकी है। पूरे देश में एक ही राज्य में दो बड़ी क्षेत्रीय ताकतों ने मोदी के खिलाफ ऐसा गठबंधन कहीं नहीं किया था. पूरे देश में मोदी का विजय रथ रोकने की उम्मीद भी इसी गठबंधन पर टिकी थी। पूरे देश में उत्तर प्रदेश ही ऐसा था जहां वोटों का ट्रांसफर जमीन पर दिखाई भी दे रहा था। इतना होने के बावजूद अगर समाजवादी पार्टी अपने कद को  बढ़ाने में सफल नहीं रही तो सवाल अखिलेश यादव के गठबंधन के फैसले पर उठने लाजमी है।

सवाल इस बात पर भी उठेंगे कि गठबंधन करने के लिए खुद को कहां तक झुकाना सही था और कहां-कहां राजनीतिक समझौता सही था। इस गठबंधन के मूल में यह भावना काम कर रही थी कि इस गठबंधन के बाद मायावती दिल्ली का रुख करेंगी और अखिलेश यादव के लिए उत्तर प्रदेश में राह बनायेंगी लेकिन अब जबकि मायावती एक बार फिर  दुगनी ताकत से मजबूत होकर उभरी है, मुस्लिम दलितों का गठबंधन सबसे सफल रहा। ऐसे में अखिलेश यादव के लिए 2022 में गठबंधन की तरफ से दावेदारी करना आसान नहीं होगा।

-एजेंसी

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