एयरटेल ने 10,000 करोड़ रुपये का AGR चुकाया, अब 25,000 करोड़ बकाया

नई दिल्‍ली। दिग्गज टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने पिछले दिनों किए गए अपने वादे के अनुसार 10,000 करोड़ रुपये के AGR बकाये का भुगतान दूरसंचार विभाग को कर दिया है और अब कंपनी पर 25,000 करोड़ रुपये का बकाया रह गया है।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक एयरटेल को AGR के मद में 35,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है और उसने विभाग के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि वह कुल बकाये में से 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान 20 फरवरी तक और बाकी बची राशि 17 मार्च तक कर देगी।
कोर्ट की फटकार और दूरसंचार विभाग के बकाया भुगतान में कोई ढील नहीं देने पर कंपनी का यह कदम सामने आया है।
बाकी भुगतान सेल्फ असेसमेंट के बाद
कंपनी ने एक बयान में कहा कि वह बाकी की राशि का भुगतान भी स्वआंंकलन (सेल्फ असेसमेंट) के बाद कर देगी। बयान में कहा गया है, ‘भारती एयरटेल, भारती हेक्साकॉम और टेलिनॉर की तरफ से कुल 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।’ कंपनी ने कहा, ‘हम शीघ्रता के साथ स्वआंकलन की प्रक्रिया में हैं और उच्चतम न्यायालय की अगली सुनवाई से पहले हम इस प्रक्रिया को पूरा करके बचे बकाया का भी भुगतान करेंगे।’ एयरटेल ने कहा कि बचे हुए बकाया का भुगतान करने के वक्त वह इससे जुड़ी और जानकारी भी देगी।
उधेड़बुन में वोडाफोन-आइडिया
वहीं, भारी-भरकम कर्ज तथा लगातार हो रहे घाटे से घोर वित्तीय संकट में फंसी टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया AGR सरकार को वैधानिक बकाया चुकाने के लिए तैयार है, लेकिन उसका कहना है कि वह अपना कारोबार तभी जारी रख सकती है जब सुप्रीम कोर्ट दूरसंचार विभाग को 53,000 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने के लिए दी गई समय-सीमा में उदारता बरतने पर विचार करेगा।
1.1 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज
वोडाफोन-आइडिया पर 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और सुप्रीम कोर्ट के AGR पर फैसले का सबसे ज्यादा असर उसी पर पड़ा है।
कंपनी ने कहा, ‘वह इस बात का आंकलन कर रही है कि वह सरकार को कितने पैसे दे सकती है।’ दूरसंचार विभाग को वह एजीआर बकाये का भुगतान कर पाएगी या नहीं। इस आशंका के बीच कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘कंपनी ने इस तरह से आंकलन की गई राशि का अगले कुछ दिनों में भुगतान का प्रस्ताव दिया है।’ हालांकि, उसने यह बात भी स्पष्ट किया है कि भुगतान की समय-सीमा के संदर्भ में उसे राहत की जरूरत है।
पूंजी निवेश न करने पर अडिग कंपनी
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 24 अक्टूबर को दिए गए अपने आदेश में तीन महीने (23 जनवरी तक) के भीतर कंपनियों को बकाया चुकता करने को कहा था। इसके बाद कंपनियों ने कोर्ट से बकाया चुकाने की समय-सीमा फिर से विचार करने की मांग को लेकर एक याचिका दायर की थी, लेकिन उसे शुक्रवार को खारिज कर दिया गया। वोडाफोन आइडिया और इसके प्रमोटर्स ब्रिटेन के वोडाफोन ग्रुप तथा भारत के आदित्य बिड़ला ग्रुप पहले ही कह चुके हैं कि अगर सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कंपनी को राहत नहीं मिली तो कंपनी बंद हो जाएगी।
गैर टेलिकॉम कंपनियों पर भी मुसीबत
एक तरफ टेलिकॉम कंपनियां जहां AGR बकाये का भुगतान करने को लेकर रकम का बंदोबस्त करने के तरीके तलाश रही है, वहीं सुप्रीम कोर्ट का आदेश सार्वजनिक क्षेत्र के कई उपक्रमों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है। इन गैर टेलिकॉम कंपनियों-गेल, ऑइल इंडिया, पावरग्रिड तथा दिल्ली मेट्रो को भी AGR की रकम का भुगतान करने के लिए कहा गया है।
-एजेंसियां

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