एयर एशिया केस: की गई थी कई और अधिकारियों को जाल में फंसाने की कोशिश

नई दिल्‍ली। सिविल एविएशन के तत्कालीन 5/20 रूल को बदलवाने या हटवाने में सरकारी निर्णय को प्रभावित करने के इरादे से एयर एशिया के टॉप अधिकारियों ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के ही नहीं, बल्कि ‘कई’ अन्य मंत्रालयों के अधिकारियों को भी जाल में फंसाने की कोशिश की गई थी। यह दावा सीबीआई का है।
सीबीआई ने जो जानकारी जुटाई है, उसके मुताबिक एयर एशिया के ग्रुप सीईओ टोनी फर्नांडिस और उनके डिप्टी ग्रुप सीईओ बो लिंगम ने ‘लॉबीइंग करने वाले ऐसे लोगों’ की मदद ली, जिन्होंने सरकारी अधिकारियों तक अपनी पहुंच होने का दावा किया था।
लॉबीइंग करने वालों ने बड़े ‘प्रेजेंटेशंस’ तैयार किए थे, जिसमें सरकारी गलियारों में अहम हैसियत रखने वाले और 5/20 रूल को बदलवाने/हटवाने में सरकारी निर्णय पर असर डाल सकने वाले सीनियर सरकारी अधिकारियों को टारगेट करने की ‘रणनीति विस्तार से’ बताई गई थी।
सीबीआई के अनुसार, इसमें अहम भूमिका कथित तौर पर टाटा संस के वेंकटरमणन रामचंद्रन ने निभाई थी, जिन्होंने भारत में एयर एशिया के कामकाज के लिए जरूरी सभी ‘सरकारी मंजूरियां’ हासिल करने के लिए जमकर ‘लॉबीइंग’ की थी।
सीबीआई के मुताबिक कथित तौर पर वेंकटरमणन ने तत्कालीन फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से मंजूरियां हासिल करने के लिए भी लॉबीइंग की थी।
टोनी ने इस काम में जिन लोगों की मदद ली थी, उन्होंने एयर एशिया के अधिकारियों के लिए ‘कई’ सरकारी अधिकारियों के अप्वाइंटमेंट्स लेने और उनकी मुलाकात कराने में अहम भूमिका निभाई थी ताकि अप्रूवल्स हासिल किए जा सकें।
सीबीआई के अनुसार ऐसा ही एक प्रेजेंटेशन कॉरपोरेट लॉबीइंग करने वाले दीपक तलवार ने तैयार किया था। सीबीआई के मुताबिक, तलवार ने ‘कई मंत्रालयों’ के अधिकारियों से संपर्क साधने की रणनीति बताते हुए प्रेजेंटेशन दिया था।
तलवार और मेसर्स ट्रैवल/टाटा फूड सर्विसेज के चेयरमैन सुनील कपूर के खिलाफ सीबीआई ने एक क्रिमिनल केस दर्ज किया है। इसी मामले में एयर एशिया और अज्ञात सरकारी अधिकारियों पर भी आरोप लगाए गए हैं।
अब खत्म कर दिए गए एफआईपीबी की भूमिका भी सीबीआई की जांच के दायरे में आ गई है। तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम से जुड़े आईएनएक्स मीडिया केस में एफआईपीबी अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच सीबीआई और एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट पहले से कर रहे हैं।
ताजा मामले में सीबीआई के पास मौजूद जानकारी संकेत दे रही है कि 5/20 रूल को बदलने की साजिश के बीच यूपीए 2 शासन काल में पड़ गए थे।
इसके मुताबिक अपने ऐप्लिकेशन में बड़ी गड़बड़ियों के बावजूद एफआईपीबी से अप्रूवल्स मिल जाने से एयर एशिया का मन बढ़ गया था।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एयर एशिया ने फरवरी 2013 में एफआईपीबी को आवेदन दिए थे और अप्रैल 2013 में उसे एक औपचारिक मंजूरी मिल गई थी।
सीबीआई के अनुसार, एफडीआई नियम के एक बड़े उल्लंघन पर एफआईपीबी ने कथित तौर पर ध्यान नहीं दिया था।
सीबीआई के अनुसार एयर एशिया इंडिया लिमिटेड पर एयर एशिया ग्रुप और खासतौर से एयर एशिया, बेरहाद का अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण था और वही उसे चलाती थी और इस तरह तत्कालीन एफआईपीबी के कई नियमों का उल्लंघन हुआ।
-एजेंसी

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