TTZ में आने वाले गैर प्रदूषणकारी उद्योगों के लिए गणमान्‍य आगे आए

एम.सी. मेहता के प्रकरण में निर्णय दिनांक 30-12-1996 के आदेश के अनुरूप ताज ट्रिपेजियम जोन TTZ में कोल व कोक से चलने वाली इकाइयों को ही रोका गया था और उन्हें गैस से चलाने के निर्देश दिये गये थे

आगरा। एम.सी. मेहता के प्रकरण को सुनने और उद्योगों के पक्ष को समझने के लिए आगरा से एक प्रतिनिधि मण्डल आज सुप्रीम कोर्ट गया जिसमें आगरा डवलपमेण्ट फाउण्डेशन के सचिव के.सी. जैन, पूर्व विधायक केशो मेहरा एवं पर्यावरण विशेषज्ञ इं. उमेश शर्मा सम्मिलित थे। न्यायालय की सुनवाई के समय प्रतिनिधिमण्डल उपस्थित रहा जिसके उपरान्त सभी का यह मत था कि एम.सी. मेहता के प्रकरण में निर्णय दिनांक 30-12-1996 के आदेश के अनुरूप ताज ट्रिपेजियम जोन TTZ में कोल व कोक से चलने वाली इकाइयों को ही रोका गया था और उन्हें गैस से चलाने के निर्देश दिये गये थे। उक्त निर्णय के द्वारा गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना एवं विस्तार पर कोई रोक नहीं लगाई थी अपितु न्यायालय ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट उल्लेख किया था कि इस रिट याचिका का उद्देश्य उद्योगों को रोकना नहीं है अपितु उद्योगों का विकास है जो कि पर्यावरण और उद्योगों के सामन्जस्य से ही सम्भव होगा।
प्रतिनिधि मण्डल का यह भी कहना है कि आगरा को केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 1983 में ‘‘वायु प्रदूषण संरक्षण क्षेत्र’’ घोषित किया गया था जिससे क्रम में टी.टी.जैड प्राधिकरण का भी गठन हुआ। ऐसी स्थिति में ताज व अन्य स्मारकों को बचाने के लिए कोल एवं कोक से चलने वाले वायुपदूषणकारी उद्योगों को ही रोका जाना है अन्य को नहीं। सोशल सैक्टर के अन्तर्गत आने वाले अस्पताल व होटल पर रोक लगाया जाना अनुचित है।
केशो मेहरा एवं के.सी. जैन द्वारा यह भी कहा गया कि TTZ की व्हाइट कैटैगरी के अतिरिक्त अन्य कैटेगरी के उद्योगों पर लगाई गयी तदर्थ रोक सुप्रीम कोर्ट के निर्णय दिनांक 30-12-1996 एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्ष 2013 के निर्णय के विरुद्ध है। गैर प्रदूषण कारी उद्योगों पर रोक लगने से बेरोजगारी और असन्तोष व्याप्त होगा और आगरा के उद्यमी अन्य स्थानों पर पलायन कर जायेंगे जिससे आगरा को स्थायी क्षति होगी। इं0 उमेश शर्मा के अनुसार भी पांच सितारा होटल रैड कैटेगरी में आते हैं किन्तु वे वायुप्रदूषणकारी नहीं है और वे सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट के द्वारा सीवेज का शोधन करते हैं, अतः उन पर रोक लगाया जाना उचित नहीं है।
प्रतिनिधिमण्डल के द्वारा शीघ्र ही सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष को रखने के लिए याचिका प्रस्तुत की जायेगी ताकि गैर प्रदूषणकारी उद्योगों पर गिरने वाली गाज को बचाया जा सके जो रोजगार व उद्यम के नये रास्ते सृजित कर सकें। प्रतिनिधि मण्डल द्वारा उन कारणों को भी न्यायालय के समक्ष रखा जायेगा जो पी.एम.-10 एवं पी.एम.-2.5 को आगरा में बढा रहे हैं।

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