ADF ने ल‍िखा सीएम योगी को पत्र, वसीयत निबन्धन अन‍िवार्य हो

आगरा। उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि को छोड़कर शहरी अचल सम्पत्ति के सम्बन्ध में की जाने वाली वसीयत (विल) के निबन्धन की कोई अनिवार्यता रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 (उ0प्र0 में यथासंशोधित) के अन्तर्गत नहीं है। वसीयत के निबन्धन की अनिवार्यता के अभाव में हजारों मुकदमें उ0प्र0 के न्यायालयों में लम्बित हैं। ऐसे मुकदमों में यह प्रश्न निहित होता है कि क्या मृतक द्वारा की गयी अनिबन्धित (अनरजिस्टर्ड) वसीयत झूठा अभिलेख है या वास्तव में मृतक द्वारा वसीयत लिखी गयी थी। वसीयतों के अनिबन्धित होने के कारण परिवारों में भी उत्तराधिकारियों के मध्य तरह-तरह के विवाद उत्पन्न हो जाते हैं। इन सबसे बचने के लिए शहरी सम्पत्ति की वसीयत के लिए भी कृषि भूमि की तर्ज पर भी वसीयत के निबन्धन की अनिवार्यता होनी चाहिए। इस आशय का पत्र Agra Development Foundation (ADF) द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मेल द्वारा पत्र भेजा गया।

भेजे गये पत्र में एडीएफ की ओर से सचिव के0सी0 जैन ने यह उल्लेख किया कि कृषि भूमि के सम्बन्ध में उ0प्र0 में पहले वसीयत के निबन्धन की अनिवार्यता नहीं थी जिसके कारण कृषि भूमि के उत्तराधिकार को लेकर काफी विवाद उत्पन्न होते थे जिसका संज्ञान लेकर उ0प्र0 जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम 1950 के प्राविधानों में वर्ष 2004 में संशोधन कर कृषि भूमि से सम्बन्धित वसीयत के लिए निबन्धन की अनिवार्यता कर दी गयी। उसके परिणामस्वरूप राजस्व न्यायालयों में उत्तराधिकार के विवादों में काफी कमी आयी है। उ0प्र0 राजस्व संहिता 2006 की धारा 107(3) में भी भूमि की वसीयत के निबन्धन की अनिवार्यता का प्राविधान है ।

Agra Development Foundation के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि अभिलेखों के निबन्धन से सम्बन्धित कानून बनाने का अधिकार भारतीय संविधान की संवर्ती सूची (कोन्करेन्ट लिस्ट) में प्रविष्टि सं0 6 में है। अतः राज्य के विधान मण्डल द्वारा रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 में संशोधन किया जा सकता है। अचल सम्पत्ति की वसीयत का अनिवार्य निबन्धन उसके उत्तराधिकार सम्बन्धी विवादों में कमी लायेगा। उक्त के परिप्रेक्ष्य में एडीएफ द्वारा यह अनुरोध किया गया कि रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 17 में आवश्यक विधिक संशोधन इस प्रयोजन से कर दिया जाये कि अचल सम्पत्ति की जो भी वसीयत हांे, उनका निबन्धन अनिवार्य हो। ऐसा किये जाने से प्रदेश के न्यायालयों में भी अचल सम्पत्ति की वसीयतों को लेकर उत्तराधिकार सम्बन्धी विवादों की संख्या में भारी कमी आयेगी और आम आदमी के लिए अचल सम्पत्ति खरीदना सरल, सुगम व निर्विवाद हो सकेगा।

एडीएफ के अध्यक्ष पूरन डाबर (Puran Dawar ) द्वारा भी अचल सम्पत्ति की वसीयत के निबन्धन को अनिवार्य बनाया जाना एक आवश्यक कदम बताया है उन्होंने कहा कि यदि हमें उत्तराधिकार के मुकदमों में कमी लानी है तो हमें उत्तराधिकार सम्बन्धी कानूनों को सरल व अभेद्य बनाना होगा। इस सम्बन्ध में यह भी अच्छा कदम होगा कि वसीयतकर्ता अपने जीवनकाल में ही वसीयत को कानूनी कार्यवाही के माध्यम से सही घोषित करा दे ताकि उसकी मृत्योपरान्त वसीयत को लेकर कोई विवाद उत्पन्न न हो सके। वसीसत कानून के विशेषज्ञ इन्दर जैन द्वारा भी वसीयत के निबन्धन की अनिवार्यता के सुझाव को एक अच्छी पहल बताया।

-Legend News

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