आगरा सिटी रेडिको एवं क्रेडाई ने किया RERA कार्यशाला का आयोजन

आगरा। RERA अधिनियम 2016 एवं उसकी नियमावली में अनेक विसंगतिया हैं, जो दूर होनी चाहिए और विवादास्पद प्रावधानों पर RERA अथोरिटी को स्पष्टीकरण देना चाहिए ताकि रेरा का कार्यान्वयन सुगम हो सके। यह बात आज पी.एल. पैलेस में रेरा पर आयोजित कार्यशाला में लखनऊ से आये रेरा विशेषज्ञ व चार्टड एकांउटेन्ट ध्रुव सेठ ने कहा। कार्यशाला का आयोजन आगरा सिटी रेडिको एवं क्रेडाई (आगरा चैप्टर) के संयुक्त तत्वाधान में हुआ, जिसमें विचार मंथन के लिए बिल्डर्स के अतिरिक्त आर्किटैक्ट एवं चार्टड एकाउटेन्ट भी उपस्थिति थे।
सी.ए. धु्रव सेठ द्वारा बताया गया कि उन्होंने 30 बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण हेतु एक प्रतिवेदन रेरा अथोरिटी को दिया है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हुआ है। रेरा अधिनियम के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए सेठ ने बताया कि रीयल स्टेट सेक्टर के नियमन एवं विकास के लिए यह कानून बनाया गया, जिसके अन्तर्गत पारदर्शिता, उपभोक्ता के अधिकारों के संरक्षण एवं विवादों के समाधान अपेक्षित है, लेकिन रेरा की वेवसाइट में भी अनेकों कमियाँ हैं और अनेक अपेक्षित कदम भी अभी नहीं उठाये गये हैं।
रेडिको अध्यक्ष के.सी. जैन द्वारा यह बात रखी गयी कि किसी परियोजना के बाह्य विकास शुल्क RERA अधिनियम की धारा 13 (2) के अनुसार प्रोमोटर को ब्यौरा देना होता है किन्तु वर्तमान में प्रदेश में बाह्य विकास शुल्क प्राधिकरण केे कोष में जमा किया जाता है जिसके द्वारा ड्रेनेज, सीवर, मास्टर प्लान सड़क व विद्युत लाइनें आदि बाह्य विकास सुविधायें विकसित करनी होती हैं जो समय से नहीं हो पातीं हैं। अधिनियम के अन्तर्गत बाह्य विकास शुल्क के सापेक्ष में कार्य करने की जिम्मदारी प्राधिकरण को नहीं दी गयी है, जो विसंगतिपूर्ण है और जिसके कारण आन्तरिक विकास कार्यों को करने के उपरान्त भी स्थल पर सभी सुविधायें उपलब्ध नहीं हो पातीं हैं।
कार्यशाला में यह बात भी आयी कि रेरा अधिनियम केवल नियमन हेतु नहीं, अपितु रीयल स्टेट सेक्टर के विकास के लिए भी है, जिसके लिए अधिनियम की धारा 32 के अन्तर्गत सिंगल विन्ड़ो, भूमि अभिलेखों का डिजिटेलाइजेशन व टाइटल इन्श्योरेन्स भी सम्मिलित है जिस पर अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है। निजी सेक्टर की अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका है जिसे राष्ट्रीय आवास नीति-2007 एवं प्रदेश की आवास नीति-2014 में स्वीकार किया गया है, जिसको देखते हुए अच्छे व साफ सुथरा कार्य करने वाले निजी क्षेत्र के विकासकत्र्ताओं को आवश्यक सुविधायें प्रदान किया जाना जरूरी है। मानचित्र व अन्य अनापत्तियां भी समयबद्ध रूप से मिलनी चाहिये। सभी ने यह भी कहा कि रेरा के बाद पारदर्शिता बढ़ी है और अच्छे बिल्डरों के अपार्टमेण्ट की मांग भी बढ़ी है।
उपस्थिति चार्टड एकाउटेन्ट व आर्किटैक्ट द्वारा भी सी.ए. सेठ से जिज्ञासायें रखी गयीं, क्योंकि रेरा अधिनियम के अन्तर्गत चार्टड एकाउटेन्ट व आर्किटैक्ट द्वारा प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने के प्रावधान हैं।
मुख्य वक्ता का स्वागत क्रेडाई अध्यक्ष सुमित गुप्ता विभव एवं रेडिको अध्यक्ष के.सी. जैन द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन हेमन्त जैन द्वारा किया गया।
RERA कार्यक्रम में सुशील गुप्ता, इन्दर जैन, रविशंकर अग्रवाल, मनीष बंसल, छोटेलाल बंसल, गौतम रावत, नीतेश गर्ग, विकास फौजदार, सी.ए. दीपेन्द्र मोहन, सी.ए. सर्वेश वाजपेई, सी.ए. संजय मेहरा, सी.ए. गौरव गोयल, आर्किटेक्ट समीर गुप्ता, बिल्डर पी.एल. शर्मा आदि अनेक उपस्थित थे।

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