#MeToo Campaign के बाद महिला उत्पीड़न कानून में खामियों को दूर करेगी सरकार

सरकार जल्द ही #MeToo Campaign के संबंध में मंत्रियों का एक समूह बनाने पर विचार कर रही है, मंत्रियों के समूह की अध्यक्षता कैबिनेट मंत्री करेंगे

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि #MeToo Campaign में उठे सवालों और कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न पर मौजूदा कानून को परखा जाएगा। साथ ही उसकी खामियों को दूर कर नए कानून बनाया जाएगा। इसके पहले महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने #MeToo Campaign में सामने आये यौन उत्पीड़न के आरोपों और मुद्दों को देखने के लिए शुक्रवार को रिटायर्ड जज की अगुवाई में विधि विशेषज्ञों की एक कमिटी बनाने का ऐलान किया था।

सूत्रों के अनुसार सरकार जल्द ही इस संबंध में मंत्रियों का एक समूह बनाने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों के समूह की अध्यक्षता मंत्रिमंडल के किसी वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को सौंपी जाएगी।

सूत्रों का मानना है कि अगर #MeToo मामले को लेकर अगर मंत्रियों का समूह बनाया जाता है तो यह केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की कोशिशों को झटका माना जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार #Metoo के आरोपों से निपटने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की तरफ से बनाई जा रही कमिटी को सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है।

सूत्रों के अनुसार सरकार का मानना है कि कमेटी बनाकर आरोपों की जांच करने और नए सुझाव देने की जगह पहले मंत्रियों का समूह उसपर गंभीरता से विचार करे। इसके पहले महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने #MeToo Campaign में सामने आये यौन उत्पीड़न के आरोपों और मुद्दों को देखने के लिए शुक्रवार को रिटायर्ड जज की अगुवाई में विधि विशेषज्ञों की एक कमिटी बनाने का ऐलान किया था।

मालूम हो कि #MeToo कैंपेन के तहत केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर पर कई लड़कियों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। मी टू अभियान के जोर पकड़ने के साथ अखबार में काम कर चुकीं 19 महिला पत्रकार अपनी सहकर्मी प्रिया रमानी के समर्थन में आईं जिन्होंने केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इन महिला पत्रकारों ने एक संयुक्त बयान में रमानी का समर्थन करने की बात कही और अदालत से आग्रह किया कि अकबर के खिलाफ उन्हें सुना जाए। उन्होंने दावा किया कि उनमें से कुछ का अकबर ने यौन उत्पीड़न किया तथा अन्य इसकी गवाह हैं।

महिला पत्रकारों ने अपने हस्ताक्षर वाले संयुक्त बयान में कहा, ‘रमानी अपनी लड़ाई में अकेली नहीं है। हम मानहानि के मामले में सुनवाई कर रही माननीय अदालत से आग्रह करते हैं कि याचिकाकर्ता के हाथों हममें से कुछ के यौन उत्पीड़न को लेकर तथा अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं की गवाही पर विचार किया जाए जो इस उत्पीड़न की गवाह थीं।’

एमजे अकबर के खिलाफ बयान पर दस्तखत करने वालों में मीनल बघेल, मनीषा पांडेय, तुषिता पटेल, कणिका गहलोत, सुपर्णा शर्मा, रमोला तलवार बादाम, होइहनु हौजेल, आयशा खान, कुशलरानी गुलाब, कनीजा गजारी, मालविका बनर्जी, ए टी जयंती, हामिदा पार्कर, जोनाली बुरागोहैन, मीनाक्षी कुमार, सुजाता दत्ता सचदेवा, रेशमी चक्रवाती, किरण मनराल और संजरी चटर्जी शामिल हैं।
-एजेंसी

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