Niharika Singh के आरोपों के बाद निर्माताओं ने नवाजुद्दीन की फिल्‍म धूमकेतु रोकी

पूर्व मिस इंडिया Niharika Singh ने नवाजुद्दीन और पत्नी के संबंधों की पोल भी खोली, मीटू के तहत यौन शोषण का भी लगा चुकी हैं आरोप

मुंबई। अगले हफ्ते नवाजुद्दीन सिद्दीकी की रुकी हुई फिल्म धूमकेतु रिलीज होनी थी परंतु मीटू मूवमेंट को हैशटैग करते हुए पूर्व मिस इंडिया अभिनेत्री Niharika Singh ने नवाज के बारे में ऐसी बातें खोल दीं कि निर्माताओं ने फिल्म रोक ली। नवाज की साधारण इंसान और बेहतरीन कलाकार वाली छवि पिछले कुछ समय में संकटग्रस्त हुई है। क्या 2019 में उनकी आने वाली ठाकरे इससे प्रभावित हुए बिना रहेगी क्‍योंकि साल 2019 में उनकी एक के बाद एक कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दस्तक देंगी। जिनमें ठाकरे, मोतीचूर-चकनाचूर, फोबिया-2, द म्यूजिक टीचर हैं। अब देखना होगा कि ठाकरे जैसी बड़ी फिल्मों पर कहीं मी टू मूवमेंट का असर पड़ेगा ना पड़ जाए।

शाहरुख स्टारर रईस के औसत परफॉर्मेंस को छोड़ें तो नवाज की हर फिल्म फ्लॉप है। ये हैं 2015 में मांझी: द माउंटेनमैन, 2016 में तीन रमन रावघ 2.0, फ्रीकी अली, 2017 में हरामखोर, मॉम, मुन्ना माइकल, बाबूमोशाय बंदूकबाज, मानसून शूटआउट और इस बरस जीनियस और मंटो।

किक, बदलापुर और बजरंगी भाईजान के साथ नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने स्टारडम की जो सीढ़ियां चढ़ीं उसमें उनकी बेजोड़ अभिनय प्रतिभा के साथ लोगों की सद्भवनाओं ने भी बड़ा योगदान दिया। बॉलीवुड में उनके संघर्ष की कहानियां हर तरफ छप रही थीं। रंगीन चिकने पन्नों वाली देसी-विदेशी अंग्रेजी पत्रिकाओं में तक उनके चेहरे कद काठी और रंग को लेकर बातें थीं। हर कोई कह रहा था कि उन्होंने बॉलीवुड में सफलता के लिए जरूरी गोरे-चिट्टेपन, अच्छी हाइट-हेल्थ के पैमानों को मेहनत और प्रतिभा से छिन्न-भिन्न कर दिया। वह अलग मिट्टी के बने हैं मगर बीते एक-डेढ़ साल में अचानक नवाजुद्दीन की सकारात्मक छवि पर संकट के बादल छाने लगे।

नवाज के आत्मकथा प्रकरण और हाल में अभिनेत्री निहारिका सिंह द्वारा सोशल मीडिया में खोली गई बातों के बाद लगने लगा है कि ये वो नवाज तो नहीं। अचानक नवाज की परिश्रमी उत्तर भारतीय छवि संकटग्रस्त हो गई और वह उन आम बिगड़ैल बॉलीवुड सितारों जैसे लगने लगे, जो शोहरत की डाल पर इतराते हैं। शराब,सिगरेट,सुंदरी और अहंकार जिनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

नवाज करिअर के ऐसे दोराहे पर हैं जहां एक गलत कदम लंबे सफर को छोटा बना सकता है। बॉलीवुड का इतिहास अर्श-फर्श के हादसों से भरा पड़ा है। असल में शुरुआत खुद नवाज ने की। वह शायद लालच के उस फंदे में फंस गए जहां कहा गया कि फिल्मी सफलता को किताब में ढालकर भुना लिया जाए। उनकी आत्मकथा एन ऑर्डनरी लाइफ बाजार में आते ही तूफान उठा। उन्होंने कुछ पन्ने जीवन में आई महिलाओं के साथ अंतरंग प्रसंगों पर लिखे तो पता चला कि नवाज उतने साधारण नहीं हैं, जितने लगते हैं। इन महिलाओं ने पलटवार किया। महिला आयोग, पुलिस और अदालत तक मामला पहुंचा तो नवाज ने किताब वापस ले ली, जो कभी वापस बाजार में आएगी इसमें संदेह है।

मामला ठंडा पड़ चुका था कि बॉलीवुड में शुरू हुए मीटू अभियान में पूर्व मिस इंडिया Niharika Singh ने नवाज का अध्याय खोल दिया। उन्होंने नवाज के मन में किसी जमाने में रही रंग-रूप की असुरक्षाओं को दुनिया के सामने ला दिया। यह भी बताया कि कैसे नवाज एक सुबह उनके घर पहुंचे। उन्हें दबोच लिया तो कैसे अनिच्छा से इस सुंदरी को समर्पण करना पड़ा। निहारिका ने नवाज के पत्नी के साथ संबंधों के उतार-चढ़ाव के बारे में भी अपनी पोस्ट में लिखा, जबकि इस मुद्दे को नवाज ने हमेशा मीडिया की कल्पना बताया।

Niharika Singh ने ऐसी बातें लिखीं, जो नवाज की सीधे-सरल लक्ष्य पर नजर रख कर काम से काम रखने इंसान की छवि को खंडित करती हैं। संभव है कि नवाज की खंडित छवि का असर आने वाले दिनों में दिखे। जब उनकी फिल्में रिलीज होगी। गौरतलब है कि उनकी सोलो फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कभी कमाई नहीं की। वेब सीरीज सेक्रेड गेम्स भी महानगरों और विदेश में सराही गई।

शाहरुख स्टारर रईस के औसत परफॉर्मेंस को छोड़ें तो नवाज की हर फिल्म फ्लॉप है। ये हैं 2015 में मांझी: द माउंटेनमैन, 2016 में तीन रमन रावघ 2.0, फ्रीकी अली, 2017 में हरामखोर, मॉम, मुन्ना माइकल, बाबूमोशाय बंदूकबाज, मानसून शूटआउट और इस बरस जीनियस और मंटो। साल 2019 में उनकी एक के बाद एक कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दस्तक देंगी। जिनमें ठाकरे, मोतीचूर-चकनाचूर, फोबिया-2, द म्यूजिक टीचर हैं। अब देखना होगा कि ठाकरे जैसी बड़ी फिल्मों पर कहीं मी टू मूवमेंट का असर पड़ेगा ना पड़ जाए।

-एजेंसी

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