आख़िर ये Cabinet Committee होती क्या है?

आख़िर ये Cabinet Committee होती क्या है? भारत सरकार की अधिकांश कैबिनेट समितियों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का नाम पहले नदारद था लेकिन इस पर मीडिया की सुर्खियों के बाद नाम शामिल कर लिए जाने की ख़ासी चर्चा है.
भारत सरकार ने साल 1961 से Cabinet Committee गठन की शुरुआत की थी और इसके लिए क़ानून की भी व्यवस्था की गई थी. इस क़ानून का नाम है ‘गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया ट्रांज़ैक्शन ऑफ़ बिज़नेस रूल्स, 1961 यानी ‘टीबीआर’.
कैबिनेट के मुखिया प्रधानमंत्री होते हैं जो विभिन्न कैबिनेट कमेटियों का गठन करते हैं ताकि सरकार का संचालन सुचारू ढंग से चल पाए और नीतिगत फैसले लेने में आसानी हो. इन कमेटियों में केवल और केवल कैबिनेट के सदस्य होते हैं. दो तरह की कमिटियां होती हैं- एक Cabinet Committee और दूसरी संसदीय कमेटी.
संसदीय कमेटी में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाता है जबकि Cabinet Committee में सिर्फ़ कैबिनेट मंत्री ही शामिल किए जाते हैं.
कभी कभी सत्तारूढ़ दल के सांसदों को भी इसमें विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की परंपरा रही है. आज़ादी के बाद सिर्फ़ रक्षा और वित्तीय मामलों पर कैबिनेट कमेटियां बनाई गई थीं.
पहले की सरकारों में संसदीय समितियां
इन समितियों की संख्या का कोई निर्धारण कभी नहीं किया गया और अलग-अलग सरकारों ने अपने तौर पर इनका गठन किया.
मिसाल के तौर पर जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं तो उन्होंने इन कमेटियों की संख्या को बढ़ाया.
उनके बाद जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इसकी संख्या 13 कर दी जबकि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में इनकी संख्या 12 हो गई और विपक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया.
इन सभी कैबिनेट कमेटियों के मुखिया प्रधानमंत्री ही रहते हैं और समितियों की अनुशंसा पर ही मंत्री परिषद नीतिगत फैसले लेता है.
सिर्फ़ दो कमेटियों ऐसी होती हैं जिनमें प्रधानमंत्री नहीं रहते, ये हैं संसदीय कार्य और आवास. ये प्रधानमंत्री के ही विवेक और ज़रूरत पर निर्भर करता है कि वो कितनी कमेटियों रखें. इस बार ‘निवेश-विकास’ और ‘रोज़गार-कौशल विकास’ नाम से दो नई कमेटियों भी बनाई गई हैं.
सदस्य संख्या
प्रधानमंत्री के तौर पर उनके दूसरे कार्यकाल में कुल 8 ऐसी कमेटियों का गठन किया गया है, इनमें छह ऐसी कमेटियों थीं जिनसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का नाम शुरू में नदारद था.
मीडिया में हुई भारी चर्चा के बाद उनका नाम इन कमेटियों में जोड़ दिया गया. कैबिनेट कमेटी में कितने सदस्य होंगे इनकी संख्या भी निर्धारित नहीं है.
किसी कमेटी में ज़्यादा सदस्य हो सकते हैं तो किसी में कम. ये उस मंत्रालय से संबंधित समितियों की अहमियत पर निर्भर करता है.
ऐसा भी हो सकता है कि किसी कमेटी में सिर्फ दो सदस्य हों तो किसी में इनकी संख्या 12 हो. इन सभी समितियों में गृह मंत्री अमित शाह को जगह मिली है लेकिन गठन के वक्त राजनाथ सिंह को छह कमेटियों से बाहर रखा गया था.
यहाँ ग़ौर करने की बात है कि राजनाथ सिंह को पहले अहम मानी जाने वाली राजनीतिक मामलों और संसदीय मामलों की कमेटी में शामिल नहीं किया गया था जबकि, 2014 में राजनीतिक और आवास से जुड़ी समिति में राजनाथ सिंह थे.
संसदीय राजनीति को क़रीब से जानने वाले कहते हैं कि भारत के गृह मंत्री ही आवास और संसदीय मामलों की समिति में रहते आए हैं. ऐसी परंपरा रही है. चूँकि राजनाथ सिंह अब रक्षा मंत्री हैं इसलिए उन्हें इन समितियों में नहीं रखा गया था.
मोदी छह कमेटियों में
राजनीतिक मामलों की कमेटी में पहले मोदी और शाह के अलावा नितिन गडकरी, निर्मला सीतारामन रामविलास पासवान, नरेंद्र सिंह तोमर, रवि शंकर प्रसाद, हरसिमरत कौर, हर्षवर्धन और पीयूष गोयल को शामिल किया गया था.
अब राजनाथ सिंह का नाम भी इसमें शामिल कर लिया गया है.
इसके अलावा संसदीय मामलों की कमेटी में पहले अमित शाह, निर्मला सीतारामन, रामविलास पासवान, नरेंद्र सिंह तोमर, रविशंकर प्रसाद, थावरचंद गहलोत, प्रकाश जावड़ेकर और प्रह्लाद जोशी शामिल थे. अब राजनाथ सिंह को भी इस कमेटी में भी जगह मिल गई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इन आठ में से छह कमेटियों में शामिल हैं. मोदी संसदीय और आवास कमेटी में शामिल नहीं हैं.
-BBC

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