7 दशक बाद भी हिंदुस्‍तान में मौजूद है पाकिस्‍तानी वाली गली

नोएडा। हिंदुस्तान में पाकिस्तानी वाली गली होने की बात सुनकर आप चौंक जाएंगे, लेकिन यह सच है। ग्रेटर नोएडा के दादरी नगर पालिका क्षेत्र के एक मोहल्ले के लोग 7 दशक से रह रहे हैं। 4 पीढ़ियों से न चाहते हुए पाकिस्तानी होने का दंश झेलने के लिए इस इलाके के लोग मजबूर हैं। निवासियों के सरकारी डॉक्युमेंट तक में पते के तौर पर पाकिस्तानी वाली गली आज भी दर्ज होता है। पाकिस्तानी गली में रह रहे कुछ हिंदू परिवारों के पुरखे देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान के कराची शहर से आकर यहां बसे थे।
बंटवारे के बाद आज के ग्रेटर नोएडा के इस इलाके में आकर बस गए थे। इसके बावजूद आज तक उनके परिवारों को लोगों की नजरों में हिंदुस्तानी होने का इंतजार है। पाकिस्तानी वाली गली के चक्कर में लोग उन्हें शक की नजर से देखते हैं। शादी के लिए रिश्ते तय करने और स्कूलों में ऐडमिशन तक को लेकर परेशानी होती है।
कराची से आकर हिंदुस्तान में बस गए थे
दादरी नगर पालिका परिषद के वॉर्ड-2 में गौतमपुरी मोहल्ला है। मोहल्ले के लोगों की मानें तो देश के बंटवारे के समय चुन्नीलाल नाम के उनके बुजुर्ग अपने कुछ भाइयों के साथ कराची से आकर यहां बस गए थे। गौतमपुरी मोहल्ले की जिस गली में पाकिस्तान से आकर वे लोग बसे थे, उसी समय से उस क्षेत्र की पहचान पाकिस्तानी वाली गली के रूप में हो रही है। पाकिस्तानी वाली गली गौतमपुरी मोहल्ले का एक छोटा सा हिस्सा है। इसकी एक गली में आज करीब 70 परिवार रहते हैं। सभी के सरकारी डॉक्युमेंट से लेकर आधार कार्ड तक में एड्रेस के रूप में पाकिस्तानी वाली गली लिखा हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर पाकिस्तानी कहलवाना ही पसंद होता तो उनके पुरखे पाकिस्तान को छोड़कर हिंदुस्तान क्यों आते।
स्थानीय निवासी कहते हैं, ‘हम पूरी तरह से हिंदुस्तानी हैं’
इलाके के निवासी राजेंद्र सिंह ने कहा, ‘हमारी आस्था और निष्ठा पूरी तरह हिंदुस्तान में है। हमारे पुरखे पाकिस्तान के कराची शहर छोड़कर यहां आकर बसे थे। लेकिन 4 पीढ़ियों के बाद भी हमें पाकिस्तानी होने का अहसास कराया जा रहा है, जो गलत है।’
जिंदगी में भारत में बिताने के बाद भी पाकिस्तानी गली का दर्द जय सिंह की बातों में भी छलक गया। उन्होंने कहा, ‘7 दशक बाद भी पाकिस्तान का भूत हमारा पीछा नहीं छोड़ रहा है। आज सरकार ने भी आधार कार्ड तक में हमारी पहचान पाकिस्तानी कर दी है। अगर हम कहीं बाहर जाते हैं तो डॉक्युमेंट में पाकिस्तानी वाली गली लिखा देख लोग हमें अलग नजर से देखते हैं।’
गजेंद्र सिंह की भी ऐसी ही पीड़ा है। सिंह कहते हैं, ‘हमारे बच्चे पढ़ाई के लिए कहीं जाते हैं तो उनके डॉक्युमेंट में पाकिस्तानी वाली गली लिखा देखकर कई स्थानों पर उन्हें एडमिशन तक नहीं दिया जाता। अगर ट्रेन से या फ्लाइट से आप कहीं जा रहे हैं तो विशेष चेकिंग का सामना करना पड़ता है।’
संजयवती ने कहा, हमारे परिवारों के लोग अगर बच्चों के रिश्ते करने के लिए जाते हैं तो अपना पता बताने में शर्म महसूस होती है। पते में पाकिस्तानी वाली गली को बताते हैं तो लोग मजाक बनाते हैं। कई बार रिश्ता होने में दिक्कत होती है।
राजीव राय, एसडीएम दादरी ने कहा, ‘मेरे संज्ञान में अभी तक ऐसा मामला नहीं आया है। मैं नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी से बात करूंगा और कानूनन जो भी हल निकल सकता है हल निकाला जाएगा।’
-एजेंसियां

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