Digital currency : 2025 के बाद भारत होगा न्यायशील राष्ट्र

जो जादू की छड़ी( Digital-currency ) मनमोहनसिंह जी ने नहीं घुमाई उसका अवसर अब मोदी जी के पास
आगरा। जैसा कि सभी जान रहे हैं, भ्रष्टाचार रूपी भयंकर दैत्य राष्ट्र के सामने अपने जबड़े फैलाए राष्ट्र की भोली-भाली जनता को निरन्तर निगल रहा है। सन् 2012 में जब श्री अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार एवं कालेधन के विरुद्ध बड़े एवं देशव्यापी जनान्दोलन को अंजाम दिया गया तब केन्द्र में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार थी। उस समय भ्रष्टाचार समाप्त करने हेतु अनेक लोग अनेक प्रकार के तर्क एवं उपाय प्रस्तुत कर रहे थे। कोई कह रहा था कि भ्रष्टाचार समाप्ति के लिए सख्त जनलोकपाल लाना पड़ेगा, तो कोई कह रहा था कि सरकार को बड़े नोट बन्द कर देने चाहिए। स्पष्ट है कि ये सभी उपाय भ्रष्टाचार एवं कालेधन के निर्माण पर रोक लगाने हेतु पर्याप्त और उपयुक्त नहीं हैं। ऐसे में तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्री मनमोहनसिंह जी द्वारा लाचारी भरा यह वक्तव्य दिया गया कि ‘उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, कि वे घुमाएँ और भ्रष्टाचार अगले ही पल समाप्त हो जाए।’ 
2025 के बाद भारत होगा न्यायशील राष्ट्र- अरविंद अंकुर
2025 के बाद भारत होगा न्यायशील राष्ट्र- अरविंद अंकुर

प्रधानमन्त्री के रूप में देश के सबसे बड़े अधिकारी की विवशता को देखते हुए न्यायधर्मसभा द्वारा 15 अगस्त 2012 को प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह जी को एक पत्र भेजकर उनसे राष्ट्र में ‘आंकिक मुद्रा प्रणाली’ लागू करने का निवेदन एवं अपील करी गयी, जो न सिर्फ भ्रष्टाचार को तत्काल समाप्त करती है, साथ ही कालेधन के निर्माण, नकली मुद्रा के चलन, टैक्सचोरी एवं अन्य सभी मौद्रिक अपराधों पर पूर्ण एवं तत्काल नियन्त्रण स्थापित करती है। न्यायधर्मसभा द्वारा उपरोक्त पत्र की प्रतिलिपि माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी, तत्कालीन वित्तमन्त्री श्री पी चिदम्बरम, तत्कालीन रिजर्वबैंक गवर्नर श्री डी.सुब्बाराव, मोंटेक सिंह अहलूवालिया, श्रीमती सोनियागाँधी, तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी, श्री अन्ना हजारे, श्री अरविन्द केजरीवाल, सुश्री किरनबेदी, श्री मनीष सिसोदिया, बाबा रामदेव आदि गणमान्य व्यक्तियों को भी भेजी गयी थी। श्री मनमोहनसिंह जी के प्रधानमन्त्री रहते हुए ही ‘आंकिक मुद्रा प्रणाली’ लागू करने हेतु अनेक स्मरणपत्रों द्वारा पुनर्निवेदन सरकार से किया जाता रहा जिसकी जानकारी अनेक राजनैतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, प्रमुख मीडिया हाउसों को भी दी जाती रही।

इसके उपरान्त मई 2014 में माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्रमोदी जी की सरकार आने के बाद उनको प्रधानमन्त्री के रूप में भी समय-समय पर भेजे गए पत्रों के माध्यम से ‘डिजिटल करेंसी’ लागू करने का निवेदन केन्द्रसरकार से किया जाता रहा है तथा विभिन्न राजनैतिक दलों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बाबा रामदेव, केजरीवाल, अनेक सामाजिक संगठनों, विभिन्न राज्य सरकारों को भी न्यायधर्मसभा के इस प्रस्ताव से अवगत कराया गया। साथ ही उनसे ‘आंकिक मुद्रा प्रणाली’ या ‘डिजिटल करेंसी’ को लागू करवाने की अपील भी न्यायधर्मसभा द्वारा समय-समय पर करी जाती रही है। इसके अतिरिक्त न्यायधर्मसभा द्वारा ‘आंकिक मुद्रा प्रणाली’ सम्बन्धी जनजागरण अभियान भी विभिन्न संचारमाध्यमों द्वारा निरन्तर चलाया जा रहा है। अभी हाल ही में केन्द्रसरकार के रुपये 500 और 1000 मूल्य के बड़े नोट बदलने के निर्णय के बाद भी न्यायधर्मसभा ने पत्र भेजकर ‘डिजिटल करेंसी’ राष्ट्र में तत्काल लागू करने का निवेदन किया है, जिससे जनता को हो रही भीषण परेशानी से बचाया जा सके तथा कालाधन उजागर करने पर उन्हें अपराध के आरोपण से भी छुटकारा प्राप्त हो सके।
आंकिक मुद्रा प्रणाली के प्रभाव:- 
1) भ्रष्टाचार से मुक्ति
2) कालेधन से मुक्ति
3) नकलीमुद्रा से मुक्ति
4) टैक्सचोरी से मुक्ति
5) अन्य मौद्रिक अपराधों से मुक्ति
आंकिक मुद्रा प्रणाली अपनाए जाने के लाभ:- 
1) चोर नहीं चोरी पर नियन्त्रण.
2) सरकारी लोकपाल विधेयक अथवा जनलोकपाल विधेयक पारित करने/कराने की आवष्यकता नहीं.
3) सी.बी.आई. अथवा अन्य किसी भी जाँच एजेन्सी की आवष्यकता नहीं.
4) मौद्रिक अपराधों की जाँच, मुकदमेबाजी एवं जेल या दण्डप्रक्रिया पर होनेवाले अपव्ययों की समाप्ति.
5) मुद्रा की छपाई, ढलाई, ढुलाई, गिनाई, भण्डारण, सुरक्षा आदि पर होने वाले व्ययों की समाप्ति.
6) अनपढ़ों, अल्पषिक्षितों आदि को होने वाली मौद्रिक हानियों से सुरक्षा.
7) समस्त मौद्रिक अपराधों पर नियन्त्रण के कारण समाज का नैतिक उत्थान.
आंकिक मुद्रा प्रणाली अपनाने की प्रक्रिया:- 
वर्तमान परिस्थितियों में ‘आंकिक मुद्रा प्रणाली’ लागू करने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:-
1) सरकार द्वारा इसके लिए प्रतिक्षेत्र एक राष्ट्रीय अधिकोष की स्थापना की जाए, अथवा वर्तमान बैंकों आदि को मौद्रिक प्रचालन का अधिकार दिया जाए। डाकखानों, स्थानीय प्रषासनिक केन्द्रों तथा सभी संस्थाओं, कम्पनियों, दुकानों, कार्यालयों आदि के माध्यम से यह ‘अंकमुद्रा’ प्रचालित हो सकती है। इसके लिए ऐसे विषिष्ट केन्द्रों में मौद्रिक लेन-देन के इलेक्ट्रानिक उपकरण स्थापित किए जा सकते हैं। अतः अनपढ़ों, गरीबों आदि को अपने लिए विषेष इलेक्ट्रानिक उपकरण खरीदना आवष्यक नहीं रह जाएगा। प्रत्येक मौद्रिक लेन-देन का लिखित प्रमाण ही इसकी आवष्यकता है। इससे भ्रष्टाचार, कालाधन, नकलीमुद्रा, टैक्सचोरी एवं अन्य मौद्रिक अपराध पूर्णतः समाप्त हो जाएँगे।
2) इलेक्ट्रानिक लेखांकन पद्धति अपनाने के लिए सरकार को सभी आवासीय क्षेत्रों में एक दूरसंचार सेवा व्यवस्थित करनी होगी, जिससे कि टेलीफोन एवं इण्टरनेट के माध्यम से यह अंकमुद्रा संचालित करी जा सके। वर्तमान इलेक्ट्रानिक युग में जबकि दूरसंचार सेवा सार्वजनिक होती जा रही है, आंकिक मुद्रा प्रणाली अपनाना बिल्कुल सरल है।
3) सामान्यतः इसे बैंकचेक/बैंकड्राफ्ट/बैंकट्रांसफर आदि के द्वारा मौद्रिक लेन-देन किए जा सकते हैं। उद्देष्य है लेखांकित लेन-देन, चाहे वह हस्तलिखित हो अथवा इलेक्ट्रानिक लिखित। इलेक्ट्रानिक डिवाइस के माध्यम से भी डिजिटल प्रणाली अपनाकर लेखांकित लेन-देन आदि सभी प्रकार के मौद्रिक व्यवहार सहज ढंग से किए जा सकते हैं। लेखांकन के दोनों ही माध्यम अपनाए जाने संभव हैं।
4) दो में से कोई भी लेखांकन पद्धति अपनायी जा सकती है। इससे धात्विक या कागजी मुद्रा को ढालने, छापने, ढोने, रखने, सँभालने आदि के व्यय भी समाप्त हो जाते हैं, जिससे आर्थिक बचत होती है। सामान्य लेखांकन पद्धति में छोटे-मोटे लेन-देन के लिए अत्यल्प मूल्यवाली मुद्रा आवष्यकतानुसार छापी भी जा सकती है। उससे भ्रष्टाचार या कालेधन आदि कोई भी मौद्रिक अपराध विकट रूप धारण नहीं करते, तथापि यह स्थूल मुद्रा निष्चित रूप से सब प्रकार के मौद्रिक अपराधों को जन्म देती है। जिस स्तर की स्थूल मुद्रा होगा, उसी स्तर के मौद्रिक अपराध होते रहेंगे।
5) वर्तमान परिस्थितियों में बहुत से नागरिकों के पास ष्वेत या कालेधन के रूप में नगदी विद्यमान है। उसके लिए सरकार सभी नागरिकों को एक निर्धारित समयावधि, जैसे एक माह, के भीतर अपने नगदधन को बैंकों मंे जमाकर उसे डिजिटल रूप में परिवर्तित कराने का अधिकार दे सकती है। ष्वेत या काले धन को डिजिटल या आंकिक रूप में परिवर्तित करने पर किसी भी प्रकार के षुल्क या दण्ड या आपराधिक आरोप या जाँच आदि से नागरिकों को छूट दी जा सकती है, यदि वे इस समयावधि के भीतर सभी स्थूल मुद्राओं को लेखांकित करवाना चाहें, तो इस पर कोई बाधा उपस्थित न की जाए, जिससे कि सम्पूर्ण खुली या छिपी धनराषि का लेखांकन हो सके। इसप्रकार बैंकों में जमा की जानेवाली सम्पूर्ण मुद्राओं को लेखांकित होने के पष्चात् उन्हें नष्ट करके सदा के लिए समाप्त कर दिया जाए। इस उपाय के द्वारा सम्पूर्ण ‘कालाधन’ एक महीने के भीतर स्वयमेव ‘ष्वेतधन’ के रूप में परिवर्तित हो जाएगा, तथा वह राष्ट्रहित में उपयोग हो सकेगा। इससे राष्ट्रीय आर्थिक विकास की संभावना बढ़ेगी।
न्यायधर्मसभा द्वारा प्रस्तावित ‘आंकिक मुद्रा प्रणाली’ लागू करने से व्यापक देशहित एवं जनहित सधेगा एवं अनेक समस्याओं का तुरन्त समाधान होगा तथा अनेक सकारात्मक प्रभाव समाज एवं राष्ट्र पर पड़ेंगे, सारांश के रूप में जिनका बिन्दुवार विवरण निम्नलिखित है:-
1. भ्रष्टाचार, कालाधन, नकलीमुद्रा, टैक्सचोरी एवं अन्य मौद्रिक अपराध तुरन्त एवं पूर्णतः समाप्त हो जायेंगे।
2. व्यक्ति का सुधार नहीं करना पड़ेगा। व्यवस्था के सुधार से ही व्यक्ति सुधरे हुए सिद्ध होंगे।
3. जिसके पास जितनी भी नगदी है, वह ज्यों की त्यों बैंकों में जमा हो जाएगी। व्यक्ति पर टैक्सचोरी के अपराध का भी आरोपण नहीं होगा।
4. व्यवस्था के दोष से ही समाज में सभी अपराध होते हैं। अतः व्यक्तियों (नागरिकों) को अपराधी सिद्ध नहीं किया जाएगा। अतः आर्थिक जमा पर जनता पर कोई दण्ड, पेनाल्टी, टैक्स, सजा, जेल, कानूनी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होगी।
5. नोटों का बदलने के लिए बैंक में लम्बी-लम्बी लाइनें और बाजार की आपाधापी तुरन्त समाप्त हो जाएगी।
6. जनता के पास जो भी स्थूल सम्पत्ति होगी, उसकी लिस्ट बनाकर जमा कर दी जाएगी, वह भी डिजिटल हो जाएगी।
7. कालाबाजारी, माफियागिरी, स्मगलिंग पूर्णतः समाप्त हो जाएगी।
8. गन्दी राजनीति का स्वतः अन्त हो जाएगा तथा स्वच्छ राजनीति का उदय होगा।
10.बैंक की पासबुक में कैश एवं काइण्ड के लिए दो कालम होंगे। नगदी और वस्तुओं का लेन-देन या आदान-प्रदान डिजिटल रूप में होगा, जिससे सम्पूर्ण धन-सम्पत्ति व्हाइट होगी, कुछ भी ब्लैक नहीं होगा।
11.धातुज सिक्के और कागजी नोट पूर्णतः समाप्त हो जाएँगे। मुद्रा केवल लिखित अंकों के रूप में ही चलेगी, जिससे खोने, फटने, गिरने, लुटने, जेब कटने, चोरी होने के खतरे तुरन्त समाप्त हो जायेंगे।
12.सिक्के और नोटों की ढलाई, ढुलाई, छपाई, गिनाई, सुरक्षा, भण्डारण आदि की समस्या और उन पर होने वाला भारी व्यय पूर्णतः समाप्त हो जाएगा।
13.सरकारी कार्यों में घूसखोरी, धन की हेराफेरी, गबन, घोटाला, जालसाजी पूर्णतः समाप्त हो जाएगी।
14.सरकार और जनता दोनों ही स्वतः नैतिक और ईमानदार हो जायेंगे।
15.‘आंकिक मुद्रा’ लागू होने पर राजकोष का 100 प्रतिशत सदुपयोग प्रारम्भ हो जाएगा। अर्थात् दुरुपयोग की सभी संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी।
16.मुद्रा डिजिटल होने पर तरलीकरण सरल होगा और मुद्रानिगमन की लागत समाप्त हो जाएगी। अतः मुद्रा पर व्याज, टैक्स आदि भार आरोपित करने की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। तब निव्र्याज व निर्भार मुद्राप्रचाालन प्रारम्भ हो जाएगा।
17. आंकिक मुद्रा लागू होने पर सभी टैक्स समाप्त करके एकमात्र राजस्व की कटौती सीधे बैंक अकाउंट पर करके टैक्सेशन की भयंकर समस्याओं से तुरन्त छुटकारा हो जाएगा तथा तरलीकरण भी सरल हो जाएगा, जिससे राष्ट्र का आर्थिक विकास महागति को प्राप्त हो जाएगा।
नोट बदलने की व्यवस्था तात्कालिक रूप से कालेधन के आहरण हेतु कुछ समय के लिए कारगर सिद्ध हो सकती है, किन्तु समस्याओं के पीछे के मूल कारण ज्यों के त्यों उपस्थित रहने के कारण वे पुनः अपनी स्थिति ग्रहण कर लेते हैं।
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी चन्द्रसेन जी ने बताया १११ न्यायशील प्रस्तावों  केंद्र सरकार को भेजे गए हैं जिनमे काफी प्रस्ताव क्रियान्वय भी हो चुके हैं।  Digital-currency इन्ही प्रस्तावों की जानकारी मीडिया के माध्यम से जनता को भी पहुचायी जा रही हैं।