अफगानिस्तान: तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर दो रॉकेट दागे

काबुल। अफगानिस्तान की राजधानी में मंगलवार को तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर दो रॉकेट दागे। उस वक्त राष्ट्रपति अशरफ गनी ईद के एक दिन पहले देश के नाम संदेश दे रहे थे।
पुलिस के मुताबिक पहला रॉकेट राष्ट्रपति भवन के पास से दागा गया जबकि दूसरा नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) कंपाउंड और अमेरिकी दूतावास के पास से दागा गया। हालांकि इस घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। रॉकेट का धमाका लाइव भाषण के दौरान टीवी पर भी सुनाई दिया।
स्पीच में गनी ने कहा, “अगर वे ये सोचते हैं कि रॉकेट हमले से अफगान झुक जाएंगे तो वे गलत हैं।” तालिबान ने न तो कोई बयान जारी किया है और न ही हमले की जिम्मेदारी ली है। दो दिन में ये दूसरी आतंकी घटना है। सोमवार को तालिबान आतंकियों ने कुंदूज प्रांत में 150 से ज्यादा लोगों बंधक बना लिया था। इनमें से 149 लोगों को सुरक्षा बलों ने छुड़ा लिया है। जवाबी कार्रवाई में 7 आतंकी मारे गए।
जहां से रॉकेट दागे गए, वो सबसे सुरक्षित इलाका : काबुल में जिस इलाके में विदेशी दूतावास हैं, वहीं से ये रॉकेट दागे गए। ये इलाका हाईसिक्योरिटी वाला माना जाता है। काबुल पुलिस के प्रवक्ता हश्मत स्तानेकजिया के मुताबिक, “पुलिसकर्मियों ने मंगलवार को इलाके में एक संदिग्ध गाड़ी को देखा था और उसका ईदगाह मस्जिद तक पीछा किया था। हमें लगा कि संदिग्ध एक घर में जाएंगे और वहां से रॉकेट दागेंगे। हमने एक लड़ाकू हेलिकॉप्टर बुलाया और उनके वाहन और घर को खत्म कर दिया।” चश्मदीदों का कहना है कि धमाके के बाद गोलियों के चलने की आवाज आई। लेकिन ये पता नहीं चला कि गोलियां चला कौन रहा है?
राष्ट्रपति गनी कर चुके हैं तीन महीने के युद्धविराम की अपील: राष्ट्रपति अशरफ गनी ने रविवार को ईद को ध्यान में रखते हुए तालिबान के साथ तीन महीने के युद्धविराम का ऐलान किया था। सरकारी आदेश के मुताबिक, अफगानिस्तान में युद्धविराम 20 अगस्त से 20 नवंबर (पैगम्बर मोहम्मद के जन्मदिन) तक रहेगा। आदेश में ये भी कहा गया है कि अगर तालिबान युद्धविराम का सम्मान करता है तो ही लागू रखा जाएगा। वहीं, तालिबान नेता मौलवी हबीबुल्ला अखुनजदाह के मुताबिक, “देश में 17 साल से चल रही जंग तभी बंद हो सकती है जब अमेरिका से सीधी बात हो। हम अफगानिस्तान कानून को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और संप्रभुता चाहते हैं।”
इससे पहले गनी ने 7 जून को ईद-उल-फितर के चलते युद्धविराम का ऐलान किया था। उस दौरान 11 से 19 जून तक सीजफायर रहा था। 2001 में अमेरिका की अगुआई वाली सेनाओं ने तालिबान को सत्ता से बेदखल कर दिया था। तभी से अफगान सेनाओं और तालिबान के बीच जंग चल रही है। 13 अगस्त को अफगान सरकार ने पुष्टि की कि 10 अगस्त को गजनी में हुए आतंकी हमले के बाद से 100 से ज्यादा लोग मारे गए और 133 जख्मी हुए।
-एजेंसियां

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