इस्लामिक स्टेट की एडवायज़री, बीमारी का फैलना अल्लाह की मर्ज़ी

मार्च की 12 तारीख़ को कथित इस्लामिक चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट ने कोरोना वायरस से जुड़ी एक एडवायज़री जारी की थी जिसमें कहा गया था कि इस वायरस से कैसे बचा जाए.
इसमें इससे बचने के लिए आम स्वास्थ्य सलाह दी गई थी. इसमें ये भी कहा गया था कि ज़रूरी न हो तो वहां न जाएं जहाँ ये महामारी फैली है.
पश्चिमी देशों से प्रकाशित होने वाली कई ख़बरों में “महामारी वाले देशों में न जाने” की सलाह को ये समझा गया कि इस्लामिक स्टेट ने अपने लड़ाकों को कड़ाई से निर्देश दिया है कि वो यूरोपीय देशों की यात्रा न करें.
इस्लामिक स्टेट ने एडवायज़री में क्या कहा?
इस एडवायज़री में यूरोप या फिर किसी ख़ास देश या द्वीप का कोई ज़िक्र नहीं है.
ये एडवायज़री संगठन की साप्ताहिक पत्रिका अल-नबा में रंगीन इंफोग्राफिक के तौर पर छापी गई है. इस पेपर में धर्म को आधार बनाते हुए ये कहा गया था अपने धर्म के दायरे में रह कर कैसे कोरोना वायरस पैन्डेमिक से बचा जा सकता है.
इसमें कहा गया था कि खांसने और छींकने पर लोगों को अपना मुंह ढँकने और अपने हाथ बार-बार साबुन पानी से धोने की ज़रूरत है. साथ ही इसमें कहा गया था कि उन इलाक़ों में जाने से बचें जहां से व्यापक तौर पर इस वायरस के संक्रमण की ख़बरें आ रही हैं.
हर सलाह से जुड़ा मोहम्मद पैगंबर का एक कथन भी दिया गया था जिसमें साफ़ सफाई की ज़रूरत और तेज़ी से फैलने वाली बीमारी से बचने के लिए किस तरह से क़दम उठाने चाहिए इसकी जानकारी थी.
इस एडवायज़री का ज़ोर इस बात पर था कि मुसलमानों को “ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना चाहिए” प्रार्थना करनी चाहिए कि उन्हें ये बीमारी न हो “क्यों बीमारी अपनी मर्ज़ी से नहीं फैलती बल्कि बीमारी का फैलना अल्लाह की मर्ज़ी होता है”.
पश्चिमी मीडिया ने इस एडवायज़री को कैसे समझा?
कई विदेशी मीडिया ने विदेश यात्रा के बारे में चेतावनी वाले इस्लामिक स्टेट की इस एडवायज़री को अपने सदस्यों पर यूरोप जाने पर रोक की तरह समझा.
मार्च 15 को द टाइम्स ने ख़बर छापी, “इस्लामिक स्टेट समूह कोरोना वायरस के कारण साफ़ तौर पर यूरोप से दूर रहना चाहता है. ये समूह पहले कई बार यूरोप के देशों पर हमला कर चुका है लेकिन अब अपने सदस्यों को सलाह दे रहा है कि संक्रमण से बचने के लिए वो महामारी फैलने वाली जगहों से दूर रहें.”
कुछ इसी तरह द इंडिपेन्डेंट ने कहा कि “इस्लामिक स्टेट ने अपने समर्थकों से कहा है कि वो कोरोना वायरस के कारण यूरोप की यात्रा न करें.” न्यू यॉर्क पोस्ट और कई और अख़बारों ने भी इसी तरह की ख़बरों को अपनी हेडलाइन बनाया.
“महामारी वाली जगह” का मतलब किसी देश या कोरोना से बुरी तरह प्रभावित कोई ख़ास जगह भी हो सकता है. हालांकि इसका इशारा किसी ख़ास शहर या कस्बे से भी हो सकता है.
लेकिन पश्चिमी मीडिया में इस्लामिक स्टेट की एडवायज़री को ग़लत समझने की एक वजह ये हो सकती है कि 13 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने यूरोप वो कोराना वायरस पैन्डेमिक का केंद्र बताया था.
इस्लामिक स्टेट के एक समर्थक ने टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप पर पश्चिमी मीडिया पर आ रही ख़बरों को भ्रामक कहा है.
कोरोना वायरस को लेकर इस्लामिक स्टेट ने और क्या कहा?
इस्लामिक स्टेट के साप्ताहिक पत्रिका में पहले भी कोरोना वायरस को लेकर सलाह प्रकशित हुई है.
6 फरवरी को प्रकाशित पत्रिका के एक संस्करण में कोरोना वायरस को लेकर एक लंबा लेख छपा था जिसमें “संक्रमण पाए गए इलाक़ों में जाने से बचने की बात कही गई थी.”
27 को भी अल-नबा में इसी विषय पर एक लंबा लेख छपा था जिसमें इस्लामिक स्टेट ने कहा था ईरान के धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले क़ोम शहर में कोरोना संक्रमण के अधिक मामले आने पर उन्हें खुशी है.
आम तौर पर देखा जा रहा है कि जिहाद का समर्थन करने वाले पहले चीन और ग़ैर मुसलमान देशों में कोरोना के बढ़ते मामलों को अल्लाह का प्रकोप कह रहे थे, लेकिन अब वो अपने लड़ाकों को संक्रमित इलाक़ों से बचने और अल्लाह से उन्हें बख्श देने की प्रार्थना करने को कह रहे हैं.
-BBC

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