पाकिस्तान: इस्लामिक काउंसिल की सलाह, मंदिर के लिए सरकार नहीं दे सकती पैसा

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान की इस्लामिक आइडियोलॉजी काउंसिल ने कहा है कि सरकार के नियंत्रण के बाहर मौजूद धार्मिक स्थलों पर सार्वजनिक पैसा ख़र्च करने का कोई चलन नहीं है इसलिए नए कृष्ण मंदिर के निर्माण के लिए पैसा देने का समर्थन नहीं किया जा सकता है.
काउंसिल ने सरकार को सलाह दी है कि वह इस्लामाबाद के सैदपुर में स्थानीय हिंदू समुदाय के लिए पहले से मौजूद एक हिंदू मंदिर और उससे सटी धर्मशाला को खोले.
धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने इस साल जुलाई में इस्लामाबाद में एक नए कृष्ण मंदिर के निर्माण के लिए 4 कनाल (20,000 स्क्वेयर फ़ुट) ज़मीन देने के लिए काउंसिल से उसकी राय पूछी थी, जिसके बाद कट्टर राजनेताओं और मुस्लिम धार्मिक समूहों ने इसका विरोध किया था.
इस्लामिक आइडियोलॉजी काउंसिल ने ये भी सलाह दी कि सभी धर्म के लोगों को अपनी परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का भी अधिकार है, इसलिए हिंदू समुदाय के पास इस्लामाबाद में श्मशान घाट की व्यवस्था करने का अधिकार है.
काउंसिल की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि काउंसिल को हिंदू समुदाय के लिए शादी और बैठक के लिए कम्युनिटी सेंटर के होने पर कोई आपत्ति नहीं है और इसमें संवैधानिक या शरिया के हिसाब से कोई बाधा भी नहीं है.
काउंसिल ने सलाह दी कि इसके अलावा इवाक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड को अधिकार दिया जाना चाहिए कि वो जनसंख्या का आकलन करके अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सुविधाएँ बढ़ाए या सरकार धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के लिए एक विशेष फ़ंड का प्रबंध करे. ये फ़ंड उन्हें दे दिया जाए ताकि वे इसका इस्तेमाल कर सकें.
इस्लामिक आइडियोलॉजी काउंसिल सरकार को इस्लामी मामलों पर सलाह देता है और इसकी सलाह मानने के लिए सरकार स्वतंत्र है.
काउंसिल ने कहा था कि संवैधानिक रूप से हर समुदाय और समूह को अपने धार्मिक संस्कार निभाने के लिए धर्म स्थल का अधिकार है.
लेकिन साथ ही काउंसिल ने कहा था कि राजधानी में हिंदू आबादी को देखते हुए उसे लगता है कि सैदपुर गाँव में पहले से मौजूद पुराने मंदिर को खोलना चाहिए.
-BBC

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