अधीर का गुलाम को जवाब: ज्ञान देना बंद कीजिए, अन्‍यथा पार्टी छोड़ दीजिए

नई दिल्‍ली। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने समाचार चैनल एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए पार्टी नेतृत्व को लेकर सवाल उठाने वाले नेताओं पर सख़्त नाराज़गी जताई और कहा कि ऐसे नेताओं को पार्टी छोड़ देनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि “नाराज़गी तो ज़रूर जताना पड़ेगा, क्या करें हम लोग, क्या बैठे-बैठे इन नेताओं का ज्ञान सुनें?
हम बंगाल में मैदान में उतरे हुए हैं, हमारे कार्यकर्ता पूछते हैं कि हम तो यहाँ लड़ रहे हैं मगर ऊपर के जिन नेताओं को कांग्रेस की मेहरबानी से नुमाइंदगी का मौक़ा मिला यदि वही लोग कांग्रेस में रहते हुए हमारे नेता के ख़िलाफ़ या पार्टी के ख़िलाफ़, राहुल जी के ख़िलाफ़ या आलाकमान के ख़िलाफ़ इस तरीक़े से विरोध करते रहे तो हम लोगों को क्या कहेंगे?”
अधीर रंजन चौधरी ने कहा “मैं उन लोगों को ये सलाह दूँगा कि ज्ञान देना बंद करिए, या तो कुछ करके दिखाइए, या चुप रहिए.”
उन्होंने कहा कि पार्टी पर सवाल उठाने वाले नेताओं को पार्टी से अलग हो जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि “हर बात में कांग्रेस की आलोचना करना ही इनकी आदत बनती जा रही है। अगर उन्हें लगता है कि यही सियासत है तो इसका मतलब है कि उन्हें कांग्रेस अच्छी नहीं लग रही, अगर ऐसा है तो ये लोग अलग से पार्टी बना सकते हैं.”
दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने एक बार फिर से पार्टी के कामकाज़ पर सवाल उठाए हैं. आज़ाद पार्टी के उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने अगस्त में पार्टी में सुधार के लिए लिखी गई चिट्ठी पर दस्तखत किए थे.
रविवार को उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि वे लोग एक मैकेनिक की भूमिका निभा रहे थे, जो ये बताता है कि गाड़ी में क्या ख़राबी है ताकि ड्राइवर जंग लगे उस पुर्जे को हटा सके. ग़ुलाम नबी आज़ाद का कहना है कि वो चिट्ठी कांग्रेस के भीतर पार्टी की कमज़ोर पड़ती विचारधारा के मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए लिखी गई थी.
उन्होंने कहा, “इस विशाल और विविधता भरे देश में कांग्रेस की विचारधारा जो गांधी, नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आज़ाद की विचारधारा है, वही इस देश में एकता बनाए रखेगी. कांग्रेस धर्म, जाति और वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं करती है. हमारे लिए सब बराबर है.”
चिट्ठी लिखे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब हम कांग्रेस के भीतर ये भीतर ये बात लिखते हैं तो हम उन्हें ये बताते हैं कि विचारधारा कमज़ोर पड़ रही है. इस चिट्ठी में कांग्रेस के 23 नेताओं ने पूर्णकालिक और प्रभावी नेतृत्व की मांग की थी, साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति के लिए चुनाव का भी मुद्दा उठाया गया था.
बिहार चुनावों और 11 राज्यों में हुए उपचुनावों में कांग्रेस के ख़राब प्रदर्शन के बाद इन नेताओं ने पार्टी में ठोस क़दम उठाए जाने की मांग फिर से की है.
कांग्रेस नेता ने कहा, “हम उन्हें बताना चाहते हैं कि मशीन के वो हिस्से जो इस विचारधारा को चलाते हैं, उनमें जंग लग गई है या फिर वे ढीले पड़ रहे हैं. जहां उनमें जंग लग गई है, उसे बदले जाने की ज़रूरत है और जहां वे ढीले पड़ गए हैं, उन्हें कसे जाने की ज़रूरत है.”
“इसलिए हम एक मैकेनिक की तरह काम करते हैं जो जो ये बताता है कि गाड़ी में क्या ख़राबी है ताकि ड्राइवर जंग लगे उस पुर्जे को हटा सके. हम ड्राइवर से अपना काम छोड़ने के लिए और हमें ड्राइविंग का काम सौंप देने के लिए नहीं कह रहे हैं.”
-BBC

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