TTZ में उद्योग: तदर्थ रोक हटवाने के लिए PM व CM के पोर्टलों पर शिकायत

आगरा। TTZ में उद्योगों पर लगी तदर्थ रोक को हटवाने के लिए आगरा डेवलपमेन्ट फाउण्डेशन (ADF) ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के पोर्टलों पर आज अपनी विस्तृत शिकायत दर्ज की। ADF के सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता के. सी. जैन द्वारा कहा गया कि उद्यमियों ने केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के समक्ष यह बात अनेक बार रखी है कि रैड, औरेंज व ग्रीन श्रेणियों की सभी औद्योगिक इकाईयॉं वायु प्रदूषणकारी नहीं है, अतः ‘गैर वायु प्रदूषणकारी इकाईयों’ की स्थापना या विस्तार पर रोक लगाया जाना औचित्यपूर्ण नहीं था।

इससे पहले केन्द्रीय पर्यावरण सचिव अजय नारायन झा की अध्यक्षता में ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी की बैठक दिनांक 8.9.2016 को हुई, जिसमें 6 जनपदों के 10,400 वर्ग किमी में फैले TTZ क्षेत्र में वायु प्रदूषण के चलते व्हाइट कैटेगरी के उद्योगों को छोड़कर बाकी सभी उद्योगों की स्थापना एवं विस्तार पर तदर्थ रोक लगाई गई थी। रोक को समाप्त कराने के लिए उद्यमी तत्कालीन केन्द्रीय पर्यावरण राज्यमंत्री अनिल माधव दवे एवं पर्यावरण सचिव अजय नारायन झा से दि0 24.10.2016 को मिले। केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन व राज्यमंत्री महेश शर्मा व केन्द्रीय पर्यावरण सचिव सी के मिश्र से भी अनेक बार मिले। प्रदेश के मंत्रियों और सचिवों तक भी दौड़ लगाई, किन्तु 2 वर्ष पूर्व अस्थाई रूप से लगी तदर्थ रोक अभी तक नहीं हट सकी है।

परिणाम यह है कि समस्त TTZ में पिछले दो वर्षों से औद्योगिक विकास का पहिया पूरी तरह से थम चुका है। रोजगार के नये अवसर नगण्य हैं और इस क्षेत्र के उद्यमी व श्रमिक दोनों ही दिशाहीन हो चुके हैं।

TTZ में उद्योगों की स्थापना व विस्तार पर लगी तदर्थ रोक दि. 8.9.2016 को हुए दो वर्ष
TTZ में विगत दो वर्ष से थमा है औद्योगिक विकास का पहिया
नये उद्योगों की कमी से TTZ में बढ़ी बेरोजगारी
TTZके उद्यमियों की गुहार – नक्कारखाने में तूती की आवाज
दो साल में नहीं हट सकी उद्योगों पर लगी तदर्थ रोक
बिना अध्ययन के उद्यमी वायु प्रदूषण के दोषी क्यों?

उद्यमियों ने यह भी निरन्तर मांग की है कि पर्यावरण मंत्रालय के निर्णय दि0 8.9.2016 की पूर्व स्थिति को ही TTZ में पुनः लागू किया जाये। शिकायत में यह भी कहा कि यदि गैर वायु प्रदूषणकारी उद्योगों पर अस्थाई रोक लगी रहेगी तो टीटीजेड क्षेत्र के युवा वर्ग, पिछड़े वर्गों एवं उद्यमियों के बीच में व्यापक असंतोष व्याप्त रहेगा एवं रोजगार अवसर भी वृहद स्तर पर प्रभावित होते रहेंगे।

एडीएफ की ओर से कहा गया कि वर्ष 1996 से कोई प्रदूषणकारी उद्योग आगरा में नही लग रहा है तो ऐसी स्थिति में अप्रदूषणकारी उद्योगों पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं है। तदर्थ रोक नये उद्योगों की स्थापना एवं वर्तमान उद्योगों के विस्तार पर विपरीत प्रभाव डाल रही है।

डॉ. मनोरंजन होटा कमेटी की रिपोर्ट
उद्यमियों की पहल पर डॉ. मनोरंजन होटा की अध्यक्षता में दिनांक 3.12.2016 को समिति का गठन केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा किया गया था, जिसमें नीरी, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि के प्रतिनिधि थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट दिसम्बर 2016 में ही दे दी थी, जिसमें समिति ने यह माना था कि ताजमहल की वायु गुणवत्ता में प्रदूषण के मुख्य कारण वाहन, सड़कों व भवनों का निर्माण, बायोमास व कूड़ा जलाना व शवदाहगृह आदि हैं किन्तु तदर्थ रोक को हटाये जाने की कोई स्पष्ट संस्तुति नहीं की गई और उसे केन्द्र सरकार के पाले में ही छोड़ दिया। केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही नहीं की।

तदर्थ रोक से कौन-कौन सी परियोजनाएं प्रभावित हुईं
नगर निगम आगरा का ”वेस्ट-टू-एनर्जी प्लान्ट“
आगरा में बहुप्रतीक्षित सिविल एन्क्लेव का निर्माण
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 20 हजार वर्गमीटर से बड़ी आवासीय योजनाएं
लीला होटल परियोजना
चोखी धाणी थीम पार्क परियोजना
लगभग 25 नये होटलों के प्रोजेक्ट
लगभग 25 नये अस्पतालों की परियोजना
20 हजार वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाली निजी क्षेत्र की परियोजनाएंं
अनेक वर्तमान उद्योगों का विस्तार
ग्रीन, औरेंज व रैड कैटेगरी के गैर वायुप्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना

तदर्थ रोक से कौन-कौन सी नयी योजनायें हांगी प्रभावित

डिफेन्स कॉरीडोर के अंतर्गत आने वाली औद्योगिक इकाईयाँ
इन्वेस्टमेन्ट समिट के अंतर्गत टीटीजैड क्षेत्र में लगभग 25 हजार करोड़ के एमओयू की योजनायें, जो लगभग 40 हजार लोगों को रोजगार देंगी
वन-डिस्ट्रिक्ट : वन-प्रोडक्ट
आगरा के दक्षिणी भाग में इनर रिंग रोड परियोजना का तृतीय चरण
आगरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग का 4 लेनीकरण
नये उद्योग, होटल, अस्पताल आदि

क्यों गलत थी तदर्थ रोक?
वायु प्रदूषण के स्त्रोतों और उनके योगदान की मात्रा का कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं कराया गया।
वैज्ञानिक अध्ययन अब लगभग 2 वर्ष उपरान्त केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा आईआईटी-कानपुर को 19 लाख रुपये का भुगतान देकर दिया गया है।

वर्ष 1996 से वायु प्रदूषणकारी उद्योगों पर रोक थी, फिर कार्यरत गैर प्रदूषणकारी उद्योगों पर रोक क्यों?

तदर्थ रोक का उद्देश्य धूल के बारीक कण (पीएम-10 व पीएम-2.5) को रोकने का था लेकिन गैर वायु प्रदूषणकारी इकाईयों (जो ग्रीन, औरेंज व रैड कैटेगरी में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा वर्गीकृत की गई थीं) की स्थापना व विस्तार पर भी रोक लगा दी गई।

गैर वायु प्रदूषणकारी सर्विस सैक्टर के उद्यम – होटल, हॉस्पिटल, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप, बड़ी आवासीय योजनायें, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लान्ट आदि प्रभावित हुये।

पर्यावरण (संरक्षण) नियमावली, 1986 के नियम-5 के अनुरूप रोक लगाने से पूर्व आपत्तियाँ आमंत्रित नहीं की गईं, गजट में भी प्रकाशन नहीं हुआ और न ही आपत्तियों का निस्तारण हुआ

तदर्थ रोक अस्थाई प्रकृति की थी किन्तु 2 वर्ष उपरान्त भी समाप्त नहीं की गई।
वर्ष 2002 से वर्ष 2016 तक वायु प्रदूषण का स्तर लगभग यथावत् था तथापि 8.9.2016 को अचानक तदर्थ रोक लगा दी गई।

तदर्थ रोक के उपरान्त विभागों की कमियाँ
डॉ. मनोरंजन होटा की रिपोर्ट (दिसम्बर-2016) के उपरान्त भी तदर्थ रोक नहीं हटी।
पीएम-10 व 2.5 के कारणों के वैज्ञानिक अध्ययन में लगभग 2 साल की देरी।
पर्यावरण मंत्रालय द्वारा यह नजरअंदाज किया गया कि कैटेगरी वर्गीकरण के परिप्रेक्ष्य व आधार का परिप्रेक्ष्य अलग था, जिसके कारण गैर वायु प्रदूषणकारी इकाईयाँ भी ग्रीन, औरेंज व रैड कैटेगरी में वर्गीकृत की गई थीं।
तदर्थ रोक लगाने के उपरान्त सरकारी विभाग व एजेन्सियों के द्वारा किया जाने वाला कार्य नहीं किये गये और न ही एक्शन प्लान पर कार्यवाही हुई।

होटा समिति के मुख्य निष्कर्ष व सिफारिशें
1. ताजमहल की वायु गुणवत्ता में प्रदूषण के मुख्य कारण वाहन, सड़कों व भवनों का निर्माण, वायोमास व कूड़ा जलाना, शवदागृह आदि हैं।
2. किस स्रोत से कितना प्रदूषण है उसके अध्ययन की आवश्यकता है।
3. मथुरा रिफाइनरी व फिरोजाबाद के कांच उद्योग ताजमहल की वायु गुणवत्ता के प्रदूषण में कम कारण हैं।
4. ताजमहल पर कीणों के प्रभाव को बचाने के लिए नदी के किनारे कम से कम प्रकाश किया जाना चाहिए ताकि कीड़े मार्बल सतह पर आकर्षित न हों।
5. नदी के पानी का ठहराव और सॉलिड वेस्ट का निस्तारण एवं अशोधित नालों का पानी जल प्रदूषण का कारण हैं जिसे बचाना होना।
6. स्मारकों के निकट वाहनों का आवागमन की वर्तमान व्यवस्था को कड़ाई से लागू करना चाहिए व उसमें सुधार के लिए पुर्नरीक्षण करना चाहिए।
7. वायु के पार्टिकुलेट मैटर छोटे कणों का अध्ययन रसायनिक रूप से किया जाना चाहिए जो शहरी प्रदूषण को बता सके।
8. टीटीजेड क्षेत्र के वायु प्रदूषण के सेटेलाइट आंकड़ों का विश्लेषण किया जाना चाहिए।
9. ताजमहल के निकट निरन्तर वायु गुणवत्ता मॉनीटर की आवश्यकता है।
10. अनुमन्य श्रेणियों के उद्योगों के लिए नीतिगत निर्णय पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्रों के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
11. औद्योगिक प्रगति व पर्यावरण संरक्षण के मध्य संतुलन बनाये रखने के लिए ग्रीन व व्हाइट श्रेणी के उद्योगां की श्रेणियों का पुर्ननिरीक्षण किया जाना चाहिए जो टीटीजेड के लिए प्रासंगिक हों।
12. गैस आधारित उद्योगों के लिए पुर्नरीक्षित मानक विकसित किये जाने चाहिए और लघु कांच निर्माण इकाईयों के लिए पर्यावरणीय दिशा-निर्देश तैयार किये जाने चाहिए।
13. टीटीजेड क्षेत्र में नई व उद्योगों के विस्तार पर लगाये गये तदर्थ रोक के संबंध में उपयुक्त नीति /निर्देश जारी होने चाहिए।
14. जो उद्योग नेचुरल गैस में परिवर्तित होना चाहते हैं उनको समुचित पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ टीटीजेड अथॉरिटी द्वारा अनुमति दी जानी चाहिए।

एडीएफ के अध्यक्ष पूरन डावर द्वारा मांग की गई कि तदर्थ रोक को तुरन्त हटाया जाये ताकि TTZ के गैर प्रदूषकारी उद्योग स्थापित हों और रोजगार के नये अवसर सृजित हो सकें अन्यथा यहाँ के उद्यमी अन्य समीपस्थ प्रदेशों में पलायन करने को विवश होंगे।

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