यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे का कारण Overspeed ही है, आरटीआई से खुलासा

Overspeed, टायर फटने व कोहरे के अतिरिक्त अन्य कारणों से हुए लगभग 60 प्रतिशत हादसे

आगरा। यमुना एक्सप्रेसवे पर हो रहे हादसों को लेकर निरन्तर विरोध का प्रभाव शायद दिखने लगा है। वर्ष 2018 के पहले तीन माह में हादसों की संख्या 108 थी, जिनमें 19 व्यक्तियों की मृत्यु हुई और 258 घायल हुए। हादसों में हुई मौतों के आंकड़ों की तुलना यदि विगत वर्षों से की जाये तो वे लगभग आधे हैं, जबकि घायलों की संख्या लगभग तीन-चौथाई है। यह खुलासा अभी हाल में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (येडा) से प्राप्त सूचना से हुआ जिसको कि येडा द्वारा आगरा डवलपमेन्ट फाउण्डेशन (एडीएफ) के सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता के0सी0 जैन को दिनांक 26.6.2018 को भेजा गया।

60 प्रतिशत हादसों के अन्य कारणों का कोई खुलासा नहीं
यमुना एक्सप्रेसवे पर तीन ब्लैक स्पॉट चिन्हित
यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों में हुई कमी
Overspeed के कारण हुए 24 प्रतिशत हादसे

उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार वर्ष 2012 से मार्च 2018 तक 4,956 सड़क हादसे हुए, जिनमें से 1,161 हादसे (23.42 प्रतिशत) Overspeed के कारण से हुए, जबकि 595 हादसे (12 प्रतिशत) टायर फटने से हुए और कोहरे के कारण कुल 235 (4.74 प्रतिशत) हादसे हुए। शेष 2,965 हादसे (59.82 प्रतिशत) अन्य कारणों से हुए, लेकिन ये कौन से अन्य कारण हैं इसका खुलासा येडा या जे0पी0 इन्फ्राटैक लि0 द्वारा नहीं किया गया है। अन्य कारणों से हुए हादसों की संख्या बड़ी होने के कारण यह जानना जरूरी हो गया है कि आखिर वे अन्य कारण कौन से हैं जो कि एक्सप्रेसवे पर बड़ी संख्या में मौतों का कारण बन रहे हैं।

सूचनाधिकार में उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार वर्ष 2018 की पहली तिमाही में ओवरस्पीडिंग करने वाले वाहनों की संख्या 3,04,713 रही, जो कि वर्ष 2017 की एक तिमाही के सापेक्ष में लगभग आधी रही। यह बदलाव जेवर टोल प्लाजा पर चालान की संख्या बढ़ने के कारण हुआ, यह स्पष्ट नहीं है क्योंकि जब चालानों की संख्या येडा से पूछी गई तो उसके द्वारा पुलिस विभाग से सूचना प्राप्त करने की बात कही गई है। यदि इन आंकड़ों पर विश्वास किया जाय तो ओवरस्पीडिंग भी कम हुई और हादसे व मौतों की संख्या में भी गिरावट आई है।

उपलब्ध कराई गई सूचना में यमुना एक्सप्रेसवे पर तीन ब्लैक स्पॉट्स बताये गये हैं, जो कि ग्रेटर नोएडा से आने पर यमुना एक्सप्रेसवे पर 8.5 किमी, 15 किमी व 61-62 किमी चेनेज पर है, जिसके लिए येडा के अनुसार हादसों को कम करने के लिए रम्बल स्ट्रिप लगाई गई हैं ताकि वाहन चालक को यदि नींद आ रही हो तो वह जाग जाये।

प्राप्त हुई सूचना पर प्रतिक्रिया देते हुए एडीएफ के सचिव के0सी0 जैन ने कहा कि हादसों में आई कमी अच्छी है किन्तु ओवरस्पीडिंग के आंकड़े अभी भी चौंकाने वाले हैं। उनके द्वारा मांग की गई-

* प्रतिमाह औसत रूप से 1 लाख से अधिक वाहन यदि ओवरस्पीडिंग कर रहे हैं, जिसके कारण 25 प्रतिशत हादसे हो रहे हैं, तो ओवरस्पीडिंग पर चालान के माध्यम से अंकुश लगाया जाना चाहिए।
* यमुना एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीडिंग, टायर फटने व कोहरे के कारण के अलावा अन्य कारणों से जो 60 प्रतिशत हादसे होते हैं, उसके विषय में भी येडा को खुलासा व आगाह करना चाहिए ताकि वाहन चालक उन कारणों को ध्यान में रखते हुए अपने वाहनों को चलायें।
* हादसों का विवरण येडा द्वारा अपनी वेबसाइट पर दिया जाना चाहिए ताकि कारण प्रचारित हो सकें।
* प्रत्येक हादसे की जांच रिपोर्ट (फोटो सहित) भी वेबसाइट पर दी जानी चाहिए।
* सेण्ट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) की सिफारिशों के अनुसार रोड सेफ्टी ऑडिट व अन्य कदम उठाये जाने चाहिए।

बहरहाल आंकड़े बता रहे हैं कि Overspeed भी कम हुई और हादसे व मौतों की संख्या में भी गिरावट आई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »